राजस्थान साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 को सुदृढ़ करने के लिए 30 दिन का प्लान लागू होगा
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने पुलिस मुख्यालय में साइबर अपराध नियंत्रण व्यवस्था की समीक्षा कर 15 जून तक टेलीफोन लाइनें और ऑपरेटर बढ़ाने के निर्देश दिए।

जयपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान कंप्यूटर स्क्रीन पर साइबर हेल्पलाइन और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लेते मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास (दाएं से दूसरे) और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) श्री भास्कर ए. सावंत (दाएं से तीसरे) के साथ अन्य पुलिस अधिकारी।
राजस्थान में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास गुरुवार को पुलिस मुख्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 और राजस्थान साइबर क्राइम एंड ऑपरेशन सेंटर (R4C) की व्यवस्थाओं को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस दौरान पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा ने मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) श्री भास्कर ए. सावंत का स्वागत किया।
मुख्य सचिव ने राजकीय अवकाश के दिन ढाई घंटे से अधिक समय तक साइबर क्राइम सेल की संरचना, कार्यप्रणाली और साइबर हेल्पलाइन 1930 के संचालन की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। बैठक में साइबर अपराधों की रोकथाम, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, कॉल रिस्पॉन्स सिस्टम और जांच व्यवस्था की गहन समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 को और अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाया जाए। इसके लिए अगले 30 दिनों में विस्तृत पॉलिसी प्लान लागू करने का लक्ष्य तय कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने पुलिस मुख्यालय स्थित साइबर क्राइम हेल्पलाइन सेंटर का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने कई लाइव कॉल्स सुनीं और देखा कि किस प्रकार साइबर अपराधों की शिकायतें दर्ज की जा रही हैं तथा एफआईआर और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। एडीजी साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने कॉल सेंटर की कार्यप्रणाली और शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया की जानकारी प्रस्तुत की।
समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम और त्वरित कार्रवाई के लिए तकनीकी क्षमता और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि राजस्थान साइबर क्राइम एंड ऑपरेशन सेंटर (R4C) को जल्द पूर्ण रूप से ऑपरेशनल किया जाए। साथ ही मौजूदा कॉल सेंटर सिस्टम में आवश्यक सुधार कर शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया को और तेज एवं प्रभावी बनाया जाए।
बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। साइबर अपराध के प्रत्येक पीड़ित को तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल सुविधा उपलब्ध कराने के लिए टेलीफोन लाइनों और कॉल ऑपरेटरों की संख्या आगामी 15 जून तक बढ़ाई जाएगी। साइबर अपराध रिपोर्टिंग और शिकायत निवारण की गुणवत्ता सुधारने के लिए मासिक रिपोर्ट प्रकाशित की जाएगी। प्रदेश के साइबर थानों को प्रतिदिन अपनी कार्रवाई और उपलब्धियों की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से आमजन तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए।
मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग कर साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और जनोपयोगी बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 41 साइबर सुरक्षा पुलिस स्टेशनों के बेहतर प्रदर्शन के लिए मासिक समीक्षा व्यवस्था विकसित की जाएगी और संबंधित अधिकारियों के साथ विशेष कार्यशालाएं आयोजित होंगी।
इसके अलावा साइबर अपराध रिपोर्ट होने और संबंधित बैंक खातों को ब्लॉक करने के बीच लगने वाले समय का गहन विश्लेषण करने के निर्देश दिए गए, ताकि पीड़ितों को त्वरित राहत मिल सके। मुख्य सचिव ने विश्वास जताया कि अगले 30 दिनों में साइबर अपराध नियंत्रण व्यवस्था में सकारात्मक और प्रभावी परिणाम देखने को मिलेंगे।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह श्री भास्कर ए. सावंत, पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा, एडीजी साइबर क्राइम श्री वीके सिंह, एडीजी श्री भूपेंद्र साहू, डीआईजी श्री शांतनु सिंह, एसपी श्री सुमित मेहरड़ा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

Pratahkal Bureau
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