जयपुर, 14 अक्टूबर। राजस्थान में सहकारी समितियों, सहकारी दवा भंडारों और प्राथमिक भूमि विकास बैंकों के कामकाज की मुख्य निष्पादन संकेतक (केपीआई) के आधार पर राज्य स्तरीय समीक्षा की गई। समीक्षा में जिलों और बैंकों की रैंकिंग के साथ कमजोर प्रदर्शन करने वाली इकाइयों को सुधार के निर्देश दिए गए। शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारिता डॉ. समित शर्मा ने स्पष्ट किया कि सहकारी संस्थाएं केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ किसानों, पशुपालकों, महिलाओं और युवाओं तक पहुंचाने में प्रभावी भूमिका निभाएं।

डॉ. समित शर्मा ने बुधवार को शासन सचिवालय स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राजस्थान क्रय-विक्रय सहकारी संघ, राजस्थान राज्य उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड और राज्य भूमि विकास बैंक की समीक्षा बैठक को संबोधित किया। बैठक में राज्य की सभी क्रय-विक्रय सहकारी समितियों, राजस्थान राज्य उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड और प्राथमिक भूमि विकास बैंकों के प्रबंध निदेशक, अधिशासी अधिकारी तथा कार्मिक शामिल हुए।

उन्होंने कहा कि कार्मिकों का कार्यस्थल पर समय पर उपस्थित होना और पूर्ण सदाशयता के साथ बिना किसी भेदभाव के सेवाएं देना उनका कर्तव्य है। उन्होंने सभी से मिलकर सहकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में राजस्थान को पूरे देश में प्रथम स्थान पर लाने का आह्वान किया।

क्रय-विक्रय सहकारी समितियों की केपीआई आधारित समीक्षा में राज्य की 228 समितियों का मूल्यांकन किया गया। इसमें कोटा जिला प्रथम और सवाई माधोपुर जिला द्वितीय स्थान पर रहा। रैंकिंग में कम अंक प्राप्त करने वाले जिलों को भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करने के निर्देश दिए गए। शासन सचिव ने आगामी समर्थन मूल्य खरीद के दौरान विभाग के सभी अधिकारियों को तत्परता से खरीद कार्य पूरा करने और किसानों की ओर से बेची गई कृषि जिंसों का भुगतान तेजी से सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों का उत्थान सहकारिता विभाग का प्रमुख लक्ष्य है, इसलिए समर्थन मूल्य पर खरीद में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाए। विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी इस कार्य को पूर्ण निष्ठा से संपादित करें।

बैठक में राज्य की सभी क्रय-विक्रय सहकारी समितियों को खाद वितरण की व्यवस्था पारदर्शी रखने के निर्देश भी दिए गए। प्रबंध निदेशक, राजफेड ने फर्टिलाइजर डिमांड मॉड्यूल के माध्यम से उर्वरकों की मांग और बकाया टैगिंग खाद की सूचना वर्षवार शीघ्र भेजने के संबंध में चर्चा की। इसके साथ ही बीबीएसएसएल, एनसीओएल और एनसीईएल की आगामी रणनीति पर भी विचार किया गया। एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत चयनित समितियों के कॉनफेड के साथ एमओयू करवाने के बारे में भी जानकारी दी गई।

सहकारी दवा भंडारों की केपीआई आधारित समीक्षा शासन सचिवालय स्थित मंथन सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। इस मूल्यांकन में टोंक जिला प्रथम और उदयपुर जिला द्वितीय स्थान पर रहा। बिक्री के मामले में कुछ दवा भंडारों का प्रदर्शन बेहतर पाया गया। बैठक में प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्रों पर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए और 200 प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र खोले जाने को कहा गया।

डॉ. समित शर्मा ने दवा भंडारों में दवाओं की कीमतों से जुड़ी विसंगतियां दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दवाओं का मूल्य निर्धारण आधार मूल्य पर उचित मार्जिन जोड़कर किया जाए। निजी दवा वितरकों को भी दवाओं की दरों के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा गया, ताकि मूल्य निर्धारण में एकरूपता और उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

प्राथमिक भूमि विकास बैंकों की केपीआई समीक्षा में बिलाड़ा (जोधपुर) प्रथम, बीकानेर द्वितीय और जोधपुर भूमि विकास बैंक तृतीय स्थान पर रहा। पिछले महीने की तुलना में 34 बैंकों के प्राप्तांकों में वृद्धि दर्ज की गई। इन 34 बैंकों के प्रदर्शन में सुधार को सराहनीय बताया गया, जबकि झालावाड़ और जैसलमेर के दो प्राथमिक बैंकों के प्राप्तांकों में पिछली समीक्षा की तुलना में गिरावट आई।

पिछले महीने जहां 25 बैंक सबसे कमजोर श्रेणी में थे, वहीं इस महीने इनकी संख्या घटकर नौ रह गई। इनमें चूरू, सवाई माधोपुर, टोंक, बारां, सिरोही, उदयपुर, राजसमंद, बांसवाड़ा और डूंगरपुर शामिल हैं। कमजोर अंक वाले क्षेत्रों को आगामी महीने में अपेक्षित प्रगति के साथ अपनी रैंकिंग सुधारने के निर्देश दिए गए। साथ ही स्पष्ट किया गया कि डी श्रेणी में कोई भी प्राथमिक बैंक नहीं रहना चाहिए।

प्राथमिक भूमि विकास बैंकों को आवंटित लक्ष्यों के अनुरूप ही ऋण वितरण करने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए गए। सभी बैंकों को आगामी दो दिनों में ऋण संबंधी पत्रावलियां पोर्टल पर अपलोड करने का काम तत्काल पूरा करने को कहा गया। अवधिपार मामलों की शत-प्रतिशत ऋण पत्रावलियां भी पोर्टल पर अपलोड कराकर दस्तावेजों की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

राज्य बैंक स्तर से सभी प्राथमिक बैंकों को माहवार वसूली लक्ष्य आवंटित किए गए हैं। निर्देश दिए गए कि निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार वसूली सुनिश्चित की जाए और अकृषि एवं आवास ऋण मामलों में अधिनियम के तहत वसूली की कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए। जिला उप रजिस्ट्रार और खंडीय रजिस्ट्रार स्तर से क्रमशः पांच लाख रुपये से अधिक और 10 लाख रुपये से अधिक के अवधिपार मामलों में समझाइश कर वसूली सुनिश्चित करने को कहा गया।

पांच लाख रुपये या इससे अधिक राशि के ऋण मामलों में सचिव को स्वयं संबंधित संपत्ति का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए गए। रायसिंहनगर, बीकानेर और जालौर प्राथमिक बैंकों के एनपीए के अंतर्गत अन्य बैंकों की तुलना में प्राप्त अंक कम रहे। समीक्षा बैठक में सहकारी संस्थाओं के प्रदर्शन, किसानों को समय पर भुगतान, दवाओं की उचित दरों पर उपलब्धता और ऋण वसूली में वित्तीय अनुशासन को लेकर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए। केपीआई आधारित मूल्यांकन के जरिए सहकारिता विभाग ने सभी संबंधित संस्थाओं से अपने प्रदर्शन में सुधार कर सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने की अपेक्षा जताई।

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