जयपुर, 3 जून। राजस्थान की ग्रामीण आबादी को बैंकिंग सेवाओं के लिए अब शहरी केंद्रों के चक्कर नहीं काटने होंगे। सहकारिता विभाग ने राज्य के सुदूर अंचलों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक क्रांतिकारी पहल की है, जिसके तहत 'सहकार से समृद्धि' अभियान के अंतर्गत ग्राम सेवा सहकारी समितियों (पैक्स) एवं प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से फिनटेक आधारित डोर-स्टेप बैंकिंग का विस्तार किया जा रहा है।

सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां डॉ. समित शर्मा ने शासन सचिवालय में राजस्थान राज्य सहकारी बैंक के अधिकारियों की टू-डू लिस्ट की समीक्षा करते हुए इस महत्वाकांक्षी परियोजना की रूपरेखा स्पष्ट की। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य की सभी सक्रिय प्राथमिक डेयरी समितियों को 'बैंक मित्र' के रूप में सशक्त किया जाए और उन्हें माइक्रो एटीएम की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है, जिसके अनुसार 30 सितंबर 2026 तक 5 हजार सहकारी समितियों और 31 मार्च 2027 तक सभी 12 हजार सक्रिय प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को माइक्रो एटीएम से लैस कर दिया जाएगा।

नाबार्ड की वित्तीय सहायता से संचालित इस योजना के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए शासन सचिव ने बताया कि माइक्रो एटीएम के माध्यम से ग्रामीण अब अपने घर के निकट ही खातों का बैलेंस जानने, वित्तीय लेन-देन करने, ऋण राशि प्राप्त करने और ऋण जमा करने जैसी समस्त सुविधाएं प्राप्त कर सकेंगे। अब तक प्रदेश में लगभग 2 हजार 700 पैक्स और बैंक मित्र के रूप में कार्य कर रही 557 प्राथमिक डेयरी समितियों को माइक्रो एटीएम उपलब्ध कराए जा चुके हैं।

इस सेवा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य सहकारी बैंक अपने एफआईजी पोर्टल पर एक विशेष व्यवस्था विकसित कर रहा है। इसके माध्यम से पैक्स और डेयरी समितियों के व्यवस्थापक ग्रामीणों के निवास या उनके कार्यस्थल तक जाकर खाते खोलने और जमा संग्रहण का कार्य सुगमता से कर सकेंगे। इससे जहां एक ओर ग्रामीणों को घर बैठे बैंकिंग का लाभ मिलेगा, वहीं दूसरी ओर सहकारी बैंकों की अमानतों में वृद्धि होने से उनकी ऋण वितरण क्षमता भी सुदृढ़ होगी। इस प्रक्रिया में पैक्स एवं डेयरी समितियों को जमा संग्रहण पर कमीशन के रूप में अतिरिक्त आय का लाभ भी प्राप्त होगा।

उल्लेखनीय है कि इस अभियान की शुरुआत 7 मई को राज्य सहकारी बैंक द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला से हुई थी, जिसे अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में केन्द्रीय सहकारी बैंकों द्वारा कार्यशालाओं के माध्यम से गति दी जा रही है। वर्तमान में राज्य की 11 हजार 70 ग्राम पंचायतों में से 9 हजार 500 से अधिक में पैक्स का गठन किया जा चुका है और सरकार का लक्ष्य प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक पैक्स की स्थापना करना है। यह पहल न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को नई दिशा देगी, बल्कि सहकारी संस्थाओं को बहुउद्देशीय सेवा केंद्रों के रूप में विकसित कर सहकारी आंदोलन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक सुदृढ़ आधार प्रदान करेगी।

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