सहकारी बैंकिंग तंत्र को अत्याधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सोमवार को जयपुर स्थित नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित नाबार्ड की उच्च स्तरीय समिति एवं राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की 62वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि बैंकिंग सेवाओं में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई तिमाही और संपूर्ण वित्तीय वर्ष के दौरान राज्य के सहकारी बैंकों द्वारा अर्जित लक्ष्यों और बैंकिंग मानकों की गहन समीक्षा की गई, जिसमें ग्रामीण बैंकिंग को डिजिटल युग से जोड़ने पर सर्वाधिक बल दिया गया।

डॉ. समित शर्मा ने बैंकिंग प्रणाली की साख बनाए रखने के लिए बैंकों को केवाईसी (KYC) मानकों की समयबद्ध पालना सुनिश्चित करने और बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट, 1956 की विभिन्न धाराओं के तहत निर्धारित वैधानिक प्रावधानों की कड़ाई से अनुपालना करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने दो टूक कहा कि आगामी बैठकों से पूर्व सभी तकनीकी और वैधानिक कमियों को दूर कर सुधारात्मक कार्यवाही पूरी की जाए। विशेष रूप से पाली एवं जैसलमेर केंद्रीय सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति को सुधारने और उन्हें वैधानिक मानकों के अनुरूप सक्षम बनाने के लिए विशेष रणनीति पर चर्चा की गई। साथ ही नाबार्ड निरीक्षण में कमजोर ‘सी’ एवं ‘डी’ रेटिंग प्राप्त बैंकों के पुनरुद्धार हेतु ‘टर्न अराउंड प्लान’ तैयार कर उसकी नियमित मासिक समीक्षा करने का निर्णय लिया गया।

केंद्र सरकार के “सहकार से समृद्धि” अभियान को गति देते हुए शासन सचिव ने पैक्स कम्प्यूटरीकरण और नए बहुउद्देशीय पैक्स के गठन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रथम चरण की 6,781 पैक्स का पूर्ण कंप्यूटरीकरण आगामी 30 जून तक हर हाल में पूरा किया जाए। तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए उन्होंने कहा कि नाबार्ड से मिसिंग टूल प्राप्त होते ही 15 दिनों के भीतर सभी गो-लाइव पैक्स को डायनामिक डे-एंड की स्थिति पर लाया जाए। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने हेतु ‘सहकारिता में सहकार’ अभियान के तहत 12 हजार प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों एवं पैक्स को नाबार्ड की सहायता से माइक्रो एटीएम उपलब्ध कराए जाएंगे। इन माइक्रो एटीएम में खाता खोलने का प्रावधान भी होगा, जिससे काश्तकारों और पशुपालकों को उनके घर के द्वार पर बैंकिंग सेवाएं मिल सकेंगी।

डिजिटल बैंकिंग के विस्तार पर जोर देते हुए डॉ. शर्मा ने सभी केंद्रीय सहकारी बैंकों को अपने ग्राहकों के लिए मोबाइल बैंकिंग सेवाएं शीघ्र शुरू करने और मांग के अनुसार रूपे डेबिट कार्ड जारी करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर राजस्थान राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक ने जानकारी दी कि चालू वित्तीय वर्ष में 10 लाख रूपे डेबिट कार्ड वितरण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इस महत्वपूर्ण बैठक में नाबार्ड की महाप्रबंधक श्रीमती उर्वशी गर्ग, श्री निखिल कुमार, भारतीय रिजर्व बैंक के सहायक महाप्रबंधक श्री कैलाश विश्नोई सहित भीलवाड़ा, नागौर एवं भरतपुर केंद्रीय सहकारी बैंकों के प्रबंध निदेशक उपस्थित रहे। यह बैठक राजस्थान के सहकारी ढांचे को डिजिटल रूप से सशक्त और वैधानिक रूप से अभेद्य बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।

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