जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देते हुए अनुकम्पा नियुक्ति के प्रतीक्षारत 29 परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य के दिवंगत कार्मिकों के आश्रितों द्वारा लंबे समय से लंबित अनुकम्पा नियुक्ति के आवेदनों को सहानुभूतिपूर्वक स्वीकार करते हुए विभिन्न नियमों में शिथिलता प्रदान की गई है। इस निर्णय के तहत, आवेदन में देरी से संबंधित 16 प्रकरणों को स्वीकृति दी गई है, जबकि आयु सीमा और विलंब अवधि से जुड़े 9 मामलों में भी नियमों को शिथिल कर नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, आश्रित पत्नियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, उनके कार्यस्थल के नजदीक पदस्थापन हेतु विभाग परिवर्तन के 4 विशेष प्रकरणों पर भी राज्य सरकार ने सकारात्मक निर्णय लिया है।

प्रशासनिक दक्षता और अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में एक अन्य महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मुख्यमंत्री ने अनियमितताओं के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया है। विभागीय जांच समिति की अनुशंसा पर हाउसकीपर पद पर तैनात चार कर्मचारियों—सत्यदेव सिंह कृष्णवत, गिरिराज प्रसाद मीणा, योगेन्द्र सिंह सिसोदिया और तरूण जोशी—की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। जांच में यह स्पष्ट हुआ था कि इन कार्मिकों के पास मौजूद शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण पत्र और डिप्लोमा विज्ञापित पद की अनिवार्य पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते थे। सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बनाए रखने और अयोग्य नियुक्तियों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से लिया गया यह निर्णय राज्य में प्रशासनिक शुचिता का संदेश देता है।

Pratahkal Newsroom

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