जयपुर, 28 अक्टूबर। राजस्थान में कर चोरी के खिलाफ वाणिज्यिक कर विभाग ने सख्ती दिखाते हुए प्रदेश के विभिन्न जिलों में छह व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर सर्वे और जांच की कार्रवाई की। इस दौरान करदाताओं ने कुल 1 करोड़ 22 हजार रुपये की राशि स्वैच्छिक रूप से जमा कराई अथवा इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा की। कार्रवाई में बिक्री और वास्तविक कारोबार छिपाने, बिना उचित बिल के माल की खरीद-बिक्री, स्टॉक में अंतर तथा नियम विरुद्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने जैसी अनियमितताओं की जांच की गई। विभाग संबंधित प्रतिष्ठानों के लेखा अभिलेखों और कर विवरणियों का विस्तृत सत्यापन कर रहा है।

अजमेर के केसरगंज स्थित मैसर्स रेवतीलाल सत्येन्द्रकुमार जैन के प्रतिष्ठान पर संभावित अघोषित स्टॉक और वित्तीय वर्ष 2022-23 तथा 2023-24 की जीएसटी विवरणियों में इनपुट टैक्स क्रेडिट संबंधी अंतर की आशंका के आधार पर कार्रवाई की गई। इस प्रकरण में प्रारंभिक संभावित कर देयता 20 से 25 लाख रुपये आंकी गई थी। जांच के दौरान संबंधित करदाता ने 30 लाख रुपये स्वैच्छिक रूप से जमा कराए।

अजमेर जिले के किशनगढ़ स्थित मैसर्स श्री बिहारी प्रोडक्ट्स के मार्बल, ग्रेनाइट और खनिज उत्पादों के कारोबार से संबंधित कर विवरणियों की भी जांच की गई। इसमें विभिन्न वित्तीय वर्षों के दौरान जीएसटीआर-3बी और जीएसटीआर-2बी में इनपुट टैक्स क्रेडिट के अंतर तथा घोषित कर देयता में विसंगतियों की पड़ताल की गई। करदाता ने अतिरिक्त आईटीसी से संबंधित विसंगति स्वीकार करते हुए 11 लाख 70 हजार रुपये कर और 1 लाख 52 हजार रुपये ब्याज सहित कुल 13 लाख 22 हजार रुपये डीआरसी-03 के माध्यम से जमा कराए। शेष विसंगतियों के सत्यापन के लिए सात दिवस में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

डीडवाना-कुचामन जिले के मकराना स्थित मैसर्स अमन मार्बल इंडस्ट्रीज पर बिना उचित बिल के माल की खरीद-बिक्री और कर देयता के समायोजन में अत्यधिक आईटीसी के उपयोग की आशंका के आधार पर जांच की गई। इस दौरान फर्म के प्रतिनिधि ने सत्यापित विसंगतियों को स्वीकार करते हुए 20 लाख रुपये इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा कराए। विभाग ने आगामी जांच के लिए प्रतिष्ठान से कुछ खुले कागजात और दस्तावेज जब्त किए हैं। संबंधित करदाता को खरीद-बिक्री के बिल, लेखा पुस्तकों और अन्य आवश्यक अभिलेखों के सत्यापन के लिए समन भी जारी किया गया है।

जयपुर के चौड़ा रास्ता स्थित मैसर्स मनोहर लाल एंड संस पर जीएसटी अधिनियम की धारा 17(5) के अंतर्गत प्रतिबंधित इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने और संभावित स्टॉक विसंगतियों के संबंध में जांच की गई। कार्रवाई के दौरान करदाता ने अप्रैल से सितम्बर 2026 की अवधि के लिए 12 लाख 33 हजार रुपये कर और 1 लाख 85 हजार रुपये जुर्माने सहित कुल 14 लाख 18 हजार रुपये डीआरसी-03 के माध्यम से जमा कराए। शेष अभिलेखों और लेखा विवरणों के सत्यापन के लिए संबंधित करदाता को समन जारी किया गया है।

चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं स्थित पारस जनरल स्टोर पर वास्तविक बिक्री और कारोबार छिपाने की आशंका के आधार पर जांच की गई। प्रारंभिक स्तर पर लगभग 12 लाख रुपये की संभावित कर देयता आंकी गई। जांच के दौरान सामने आई विसंगतियों के संबंध में फर्म के प्रतिनिधि से स्पष्टीकरण लिया गया। इसके बाद करदाता ने 11 लाख 20 हजार रुपये डीआरसी-03 के माध्यम से जमा कराए। विभाग ने जीएसटी अधिनियम की धारा 70 के तहत समन जारी कर संबंधित लेखा पुस्तकों और दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

जैतारण स्थित मैसर्स गोदावरी एंटरप्राइजेज पर घी, खाद्य तेल, सूखे मेवे और किराना सामग्री के कारोबार में बिक्री छिपाने की आशंका के आधार पर जांच की गई। भौतिक स्टॉक के सत्यापन में माल की कमी पाई गई और संबंधित बिक्री के कर चालान जारी नहीं किए जाने की बात सामने आई। करदाता ने प्रारंभिक स्तर पर अनियमितता स्वीकार करते हुए 10 लाख 10 हजार रुपये कर और 1 लाख 52 हजार रुपये जुर्माने सहित कुल 11 लाख 62 हजार रुपये डीआरसी-03 के माध्यम से जमा कराए। विभाग ने शेष दस्तावेजों और भौतिक स्टॉक के मूल्यांकन के लिए संबंधित करदाता को 23 अक्टूबर को उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

वाणिज्यिक कर विभाग सभी छह प्रकरणों में खरीद-बिक्री के अभिलेखों, कर विवरणियों, स्टॉक और इनपुट टैक्स क्रेडिट का विस्तृत सत्यापन कर रहा है। जांच में सामने आने वाली शेष कर देयता के संबंध में नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि कर अपवंचन, बिना बिल कारोबार, बिक्री छिपाने और गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने जैसी अनियमितताओं के खिलाफ जांच एवं प्रवर्तन संबंधी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। राजस्व हितों की सुरक्षा के साथ कर व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना और ईमानदार करदाताओं के हितों का संरक्षण विभाग की प्राथमिकता है।

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