राजस्थान में कर चोरी और आईटीसी धोखाधड़ी पर वाणिज्यिक कर विभाग का एक्शन
वाणिज्यिक कर विभाग ने जयपुर, अलवर और सीकर समेत कई जिलों में 8 प्रतिष्ठानों पर सर्वे कर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा कराई।

जयपुर, 22 अक्टूबर। राजस्थान में कर चोरी और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के कथित गलत इस्तेमाल के मामलों में वाणिज्यिक कर विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। विभाग ने 13 एवं 14 अक्टूबर को प्रदेश के विभिन्न जिलों में किराना, निर्माण, मार्बल, हार्डवेयर, लुब्रिकेंट एवं अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े 8 प्रतिष्ठानों पर सर्वे और जांच की। इन कार्रवाइयों के दौरान विभिन्न प्रतिष्ठानों से लगभग 1 करोड़ 43 लाख 67 हजार रुपये जमा कराने और आईटीसी रिवर्स कराने की कार्रवाई हुई। अन्य प्रतिष्ठानों से संबंधित अभिलेखों, स्टॉक और कारोबारी लेन-देन की जांच अभी जारी है।
विभागीय जांच में कारोबार छिपाने, बिक्री के अनुरूप कर जमा नहीं कराने, गलत तरीके से आईटीसी का लाभ लेने, कर विवरणियों में अंतर और निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ई-इनवॉइस जारी नहीं करने जैसी अनियमितताओं की आशंका सामने आई है।
जयपुर में 99.76 लाख रुपये की आईटीसी रिवर्स
जयपुर के सी-स्कीम स्थित मैसर्स एजीआरएस वेंचर्स एलएलपी के विरुद्ध अचल संपत्ति निर्माण से संबंधित इनपुट टैक्स क्रेडिट के उपयोग को लेकर जांच की गई। कार्रवाई के दौरान फर्म ने 99.76 लाख रुपये की आईटीसी स्वेच्छा से रिवर्स की। यह राशि प्रदेश में की गई कार्रवाई के दौरान सामने आए प्रमुख मामलों में शामिल है।
अलवर में किराना और लुब्रिकेंट कारोबारियों पर कार्रवाई
अलवर जिले के मालाखेड़ा स्थित मैसर्स नरेश जनरल स्टोर एवं संबंधित फर्मों के विरुद्ध जांच की गई। इस दौरान प्रतिष्ठान में उपलब्ध स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया। मामले में लगभग 11 लाख रुपये की संभावित कर देयता सामने आई, जिसके बाद करदाता ने 10.67 लाख रुपये स्वेच्छा से जमा कराए।
इसी तरह अलवर के मुंगस्का, दिल्ली रोड स्थित मैसर्स भव्य लुब्रिकेंट्स के विरुद्ध टर्नओवर छिपाने से संबंधित मामले में कार्रवाई की गई। फर्म ने 14 लाख 3 हजार 576 रुपये स्वेच्छा से जमा कराए।
सीकर में निर्माण और हार्डवेयर फर्मों की जांच
सीकर जिले के दांतारामगढ़ क्षेत्र स्थित मैसर्स पी.आर.के. कंस्ट्रक्शन कंपनी के मामले में वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 19.90 लाख रुपये का अंतर सामने आया। इस प्रकरण में रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत कर भुगतान, निर्धारित सीमा से अधिक आईटीसी का दावा और पांच करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार होने के बावजूद अनिवार्य ई-इनवॉइस जारी नहीं करने जैसे बिंदुओं की जांच की जा रही है।
वहीं, रींगस स्थित मैसर्स शिव हार्डवेयर एंड जनरल स्टोर के विरुद्ध कारोबार और कर दरों से संबंधित विसंगतियों के आधार पर सर्वे किया गया। इस मामले में लगभग 10 लाख रुपये की संभावित कर अनियमितता का अनुमान है। विभाग ने संबंधित अभिलेख जब्त कर विस्तृत जांच शुरू की है।
बारां में मार्बल कारोबारी के दस्तावेज जब्त
बारां स्थित मैसर्स पीयूष स्टोन्स के विरुद्ध भी विभाग ने कार्रवाई की। सर्वे के दौरान गोदाम में उपलब्ध माल का भौतिक सत्यापन किया गया और संबंधित अभिलेख जब्त किए गए। करदाता ने पांच लाख रुपये जमा कराने पर सहमति जताई, जिसमें से 2 लाख 3 हजार 272 रुपये नकद बही में जमा कराए गए हैं। जब्त दस्तावेजों के परीक्षण और स्टॉक के मूल्यांकन के बाद इस मामले में वास्तविक कर देयता निर्धारित की जाएगी।
दो अन्य मामलों में 17.21 लाख रुपये जमा
विभाग ने एक अन्य प्रकरण में बिक्री छिपाने और कर देयता के मुकाबले अत्यधिक आईटीसी का उपयोग किए जाने की आशंका के आधार पर जांच की। संबंधित करदाता ने डीआरसी-03 के माध्यम से 10.21 लाख रुपये नकद जमा कराए।
इसी प्रकार, 14 अक्टूबर को की गई एक अन्य कार्रवाई में संबंधित कारोबारी ने सात लाख रुपये नकद बही में जमा कराए। दोनों मामलों में खरीद-बिक्री के बिलों, लेखा पुस्तिकाओं और अन्य दस्तावेजों का विस्तृत सत्यापन किया जा रहा है।
दस्तावेजों और जीएसटी विवरणियों के मिलान के बाद तय होगी कर देयता
वाणिज्यिक कर विभाग ने संबंधित प्रकरणों में करदाताओं को आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए समन जारी किए हैं। विभाग जब्त दस्तावेजों, भौतिक स्टॉक, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और जीएसटी विवरणियों का मिलान कर वास्तविक कर देयता निर्धारित करेगा।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि कर चोरी, कारोबार छिपाने, गलत तरीके से आईटीसी का लाभ लेने और जीएसटी प्रावधानों की अवहेलना करने वाले कारोबारियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही व्यापारियों से समय पर सही विवरणियां दाखिल करने, वास्तविक कर देयता का भुगतान करने और पारदर्शी व्यावसायिक लेन-देन सुनिश्चित करने की अपील की गई है।

