राजस्थान में आपराधिक घटनाओं, पुलिसकर्मियों की लापरवाही और अमर्यादित व्यवहार पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सख्त रुख अपनाते हुए जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जयपुर में मंगलवार, 13 अक्टूबर को कानून-व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने संबंधित पुलिस अधिकारियों और कार्मिकों को तत्काल हटाने तथा उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बैठक के बाद एक पुलिस अधिकारी को निलंबित, छह अधिकारियों को पदस्थापन की प्रतीक्षा में (एपीओ) रखा गया और दो अधिकारियों को पद से हटा दिया गया।

मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक सहित बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश में अपराध पर किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान हमेशा से शांतिप्रिय प्रदेश रहा है। पिछली सरकार के समय प्रदेश की इस छवि पर प्रतिकूल असर पड़ा था, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इसकी गरिमा लौटी है। ऐसे में अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति हर हाल में लागू रहनी चाहिए।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि कानून सबके लिए समान है और अपराधी कोई भी हो, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अपराध को बढ़ावा देने वाले मामलों में जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने तथा ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।

खनन और भूमि विवादों पर कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री ने खनन एवं भूमि से जुड़े विवादों की जिलेवार विस्तृत सूची तैयार करने और उनके निस्तारण के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाकर कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है और राज्य सरकार किसी भी तरह के अपराध को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने माफियाओं पर पूरी तरह शिकंजा कसने के निर्देश दिए। साथ ही, आपराधिक घटनाओं और पुलिस के आचरण से जुड़े मामलों की गहन समीक्षा करने पर जोर दिया।

त्योहारों में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर जोर

आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छोटी से छोटी घटना पर भी संबंधित पुलिस अधिकारी तत्काल संज्ञान लें, ताकि गंभीर घटनाओं को होने से रोका जा सके। सभी अधिकारियों को अपने प्रभार वाले रेंज और जिलों में कानून-व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए।

महिला सुरक्षा के संबंध में मुख्यमंत्री ने कालिका पेट्रोलिंग यूनिट्स का सुचारू और सुव्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करने को कहा। इसके साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में कालिका पेट्रोलिंग यूनिट्स के साथ संवाद और संपर्क गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि महिला अपराधों की प्रभावी रोकथाम की जा सके।

मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के अनुचित आचरण पर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ घटनाओं और कुछ कार्मिकों के व्यवहार से पूरे पुलिस विभाग की छवि और विश्वसनीयता प्रभावित होती है। पुलिस का मूल दायित्व अपराधियों में कानून का भय पैदा करना और आमजन में सुरक्षा तथा विश्वास की भावना मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि पुलिस का व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस करे।

बैठक के बाद अधिकारियों पर कार्रवाई

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई करते हुए एक अधिकारी को निलंबित किया, छह अधिकारियों को पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा और दो अधिकारियों को तत्काल पद से हटाया।

वेर के थानाधिकारी धीरेन्द्र सिंह को निलंबित किया गया, जबकि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रेरणा शेखावत को पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया है।

इसी क्रम में वृत्ताधिकारी भुसावर नीरज भारद्वाज, उपपुलिस अधीक्षक (यातायात) अजमेर अंजू यादव, वृत्ताधिकारी सांभर मुकेश जोशी, वृत्ताधिकारी श्रीगंगानगर विष्णु कुमार खत्री और पुलिस निरीक्षक, आयुक्तालय जयपुर मुकेश खराड़िया को भी एपीओ किया गया है।

इसके अतिरिक्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसआईयूसीएडब्ल्यू, जयपुर ग्रामीण बृजमोहन मीणा और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, खैरथल जया सिंह को पद से हटाया गया है।

कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक में पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) भास्कर ए. सावंत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद हुई यह कार्रवाई अपराध नियंत्रण, पुलिस जवाबदेही, महिला सुरक्षा और आगामी त्योहारी सीजन में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक सख्ती का संकेत है।

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