विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय का परिसर पर्यावरण संरक्षण और सतत भविष्य के संकल्पों से गुंजायमान रहा। स्कूल ऑफ अर्थ साइंसेज के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम की धुरी "माइक्रोस्कोपिक मार्वल्स एक्सप्लोरिंग माइक्रोबियल डाइवर्सिटी फॉर ए सस्टेनेबल फ्यूचर" विषय पर केंद्रित विशिष्ट व्याख्यान रही। विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न इस आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में सीएसआईआर-राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला, पुणे के वैज्ञानिक-एफ डॉ. सैयद जी. दस्तागर ने शिरकत की। डॉ. दस्तागर ने सूक्ष्मजीव विविधता की अदृश्य शक्ति को रेखांकित करते हुए बताया कि जल, मृदा और संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण में सूक्ष्मजीवों की भूमिका अपरिहार्य है। उन्होंने जोर दिया कि भविष्य की जटिल पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान इन्हीं सूक्ष्मजीवों के वैज्ञानिक उपयोग में निहित है।

विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ अर्थ साइंसेज ने इंडियन मीटियोरोलॉजिकल सोसाइटी (IMS), जयपुर चैप्टर तथा मदनगंज मेडिकल हॉल, किशनगढ़ के सक्रिय सहयोग से एक अनूठी सामुदायिक सहभागिता पहल को अंजाम दिया। भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के मद्देनजर विश्वविद्यालय परिसर में पक्षियों के लिए जलपात्र (बर्ड फीडर डिशेज) स्थापित किए गए, जिसका उद्देश्य जैव विविधता के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देना है। इसी क्रम में परिसर में प्लास्टिक प्रदूषण के विरुद्ध एक सशक्त जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को एकल-उपयोग प्लास्टिक के घातक प्रभावों से अवगत कराते हुए इसके स्थायी विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान उपस्थित जनसमूह ने प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

पर्यावरण को जीवंत रूप देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय के हर्बल गार्डन में व्यापक वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया, जिसमें औषधीय, फलदार और छायादार पौधों का रोपण कर प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. राजेश कुमार ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता ह्रास और जल संकट को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियां करार दिया। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से प्रकृति संरक्षण हेतु सामूहिक और सक्रिय योगदान का आह्वान किया। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष पर्यावरण दिवस की थीम "इंस्पायर्ड बाय नेचर फॉर क्लाइमेट फॉर ऑर फ्यूचर" थी, जिसके अनुरूप विविध शैक्षणिक और व्यावहारिक गतिविधियों का संचालन किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सह-संरक्षक प्रो. देवेश शर्मा, संयोजक डॉ. प्रमोद कांबले, सह-संयोजक डॉ. निवेदिता चौधरी और आईक्यूएसी निदेशक प्रो. राजेश कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में संकाय सदस्यों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज कराई।

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