राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय ने बंदरसिंदरी में शुरू किया सामुदायिक पुस्तकालय
रेगर समुदाय के बच्चों, युवाओं और महिलाओं के शैक्षिक सशक्तिकरण और पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय के सामुदायिक विकास प्रकोष्ठ की अनूठी पहल।

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के सामुदायिक विकास प्रकोष्ठ द्वारा बंदरसिंदरी के रेगर समुदाय में स्थापित नए सामुदायिक पुस्तकालय के उद्घाटन समारोह में उपस्थित विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव, संकाय सदस्य, शोधार्थी और स्थानीय नागरिक।
शिक्षा के लोकतंत्रीकरण और सामाजिक सरोकारों को धरातल पर उतारते हुए राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय ने एक ऐतिहासिक मिसाल पेश की है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के कुशल मार्गदर्शन एवं संरक्षण में बंदरसिंदरी स्थित रेगर समुदाय में एक अत्याधुनिक सामुदायिक पुस्तकालय (Community Library) का भव्य उद्घाटन किया गया। ज्ञान के इस नए केंद्र की स्थापना से न केवल क्षेत्र में पठन-पाठन की संस्कृति सुदृढ़ होगी, बल्कि यह पहल ज्ञान के व्यापक प्रसार और हाशिए के समाज को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में विश्वविद्यालय का एक क्रांतिकारी और बेहद महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।
यह नवस्थापित पुस्तकालय रेगर समुदाय के बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों सहित सभी आयु वर्गों के लिए ज्ञान, गहन अध्ययन और बौद्धिक संवाद का एक जीवंत साझा मंच बनेगा। इस दूरदर्शी परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पठन-पाठन की लुप्त होती संस्कृति को पुनर्जीवित करना, गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक संसाधनों तक वंचित समुदाय की पहुंच को सीधे तौर पर मजबूत करना और प्रत्येक नागरिक में आजीवन सीखने की ललक व भावना को निरंतर प्रोत्साहित करना है।
इस युगांतरकारी अवसर पर राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने अपने विशेष संदेश के जरिए विश्वविद्यालय की सामाजिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने अत्यंत गंभीर और प्रेरणादायक शब्दों में कहा कि शिक्षा को मात्र चार दीवारों या कक्षा-कक्षों की कंक्रीट तक ही सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि समाज के प्रत्येक अंतिम वर्ग और व्यक्ति तक ज्ञान तथा सीखने के समान अवसर पहुंचाना किसी भी विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी है। प्रो. भालेराव ने दृढ़ता से स्पष्ट किया कि सामुदायिक पुस्तकालय जैसी जमीनी पहलें न केवल समाज में पढ़ने की आदत को विकसित करती हैं, बल्कि यह धरातल पर समुदाय के मासूम बच्चों, ऊर्जावान युवाओं और विशेषकर महिलाओं को सामाजिक व आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी और सशक्त माध्यम सिद्ध होती हैं।
इस गरिमामयी उद्घाटन समारोह में अकादमिक जगत की कई प्रख्यात विभूतियों ने शिरकत की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अमिताभ श्रीवास्तव, आईक्यूएसी (IQAC) के निदेशक प्रो. राजेश कुमार, लोक नीति एवं सुशासन विभाग के प्रो. नागेंद्र आंबेडकर सोले तथा पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रो. एल. के. शर्मा ससम्मान उपस्थित रहे। वहीं, विशिष्ट अतिथियों की श्रेणी में सोशल वर्क विभाग के अध्यक्ष डॉ. डी. पी. नेगी, डीएसटीआई (DSTI) की अध्यक्षा डॉ. जया ओझा, लोक नीति एवं सुशासन विभाग के डॉ. सुधीर कुमार गढ़वाल एवं डॉ. मोहन मिश्रा, शिक्षा विभाग की डॉ. कनक शर्मा, स्कूल ऑफ फिजिकल साइंसेज़ के डॉ. सुखमेंदर सिंह तथा कंप्यूटर विज्ञान विभाग के डॉ. गौरव मीणा ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की महत्ता को बढ़ाया।
इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर स्थानीय रेगर समुदाय के लोगों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया और नागरिकों ने भारी संख्या में भाग लेते हुए इस पुस्तकालय की स्थापना का खुले दिल से स्वागत किया। समारोह को संबोधित करते हुए उपस्थित वक्ताओं ने मानव जीवन में शिक्षा, निरंतर ज्ञानार्जन और सामुदायिक सशक्तिकरण में पुस्तकालयों की अपरिहार्य व महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। मंच से इस पूरी पहल को विश्वविद्यालय और स्थानीय समुदाय के बीच जीवंत सहयोग, अटूट सहभागिता और आपसी समन्वय का एक सर्वोत्कृष्ट तथा अनुकरणीय उदाहरण घोषित किया गया।
इस पूरे जनकल्याणकारी कार्यक्रम का सफल आयोजन विश्वविद्यालय के सामुदायिक विकास प्रकोष्ठ (Community Development Cell) के बैनर तले संपन्न हुआ। सोशल वर्क विभाग की कुशल समन्वयक डॉ. शैज़ी अहमद के नेतृत्व में पिछले लंबे समय से संचालित की जा रही सामुदायिक सहभागिता गतिविधियों की श्रृंखला में इस पुस्तकालय की स्थापना को एक बेहद महत्वपूर्ण, मील का पत्थर और प्रेरणादायक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
इस गौरवशाली और ऐतिहासिक क्षण के गवाह बनने के लिए विभिन्न विभागों के उत्साही विद्यार्थी, शोधार्थी, संकाय सदस्य तथा बहुत बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। इस पूरे आयोजन ने न केवल विश्वविद्यालय और ग्रामीण समुदाय के मध्य सामाजिक सहभागिता और उत्तरदायित्व को नए आयाम दिए, बल्कि समावेशी विकास की वैश्विक भावना को भी धरातल पर पूरी तरह से सुदृढ़ कर दिया। उल्लेखनीय और विशेष बात यह भी रही कि इस पूरे सामुदायिक पुस्तकालय की जमीनी स्थापना, रूपरेखा और इसके क्रमिक विकास में सोशल वर्क विभाग के छात्र-छात्राओं ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए बेहद सराहनीय और अनुकरणीय योगदान दिया, जिसने उच्च शिक्षा के वास्तविक अर्थ को चरितार्थ कर दिखाया है।

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