राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक परिसर से इस वक्त की सबसे बड़ी सांगठनिक हलचल सामने आ रही है, जहां भारतीय शिक्षण मंडल (BSM) की विश्वविद्यालय इकाई ने राष्ट्र निर्माण और शिक्षा व्यवस्था में भारतीयता के समावेश को नई गति देने के उद्देश्य से अपना व्यापक सांगठनिक विस्तार कर दिया है। विश्वविद्यालय परिसर में भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा दृष्टि को जमीनी स्तर पर उतारने के संकल्प के साथ विभिन्न महत्वपूर्ण गतिविधियों एवं कार्य विभागों के लिए नए दायित्वधारकों के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। यह दूरगामी घोषणा इकाई के अध्यक्ष डॉ. ज्ञान रंजन पांडा एवं महामंत्री डॉ. धनेश्वर पृष्टि द्वारा संयुक्त रूप से कोर समिति के सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति में की गई, जिसने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और सामाजिक गलियारों में एक नई चेतना का संचार कर दिया है।

अगस्त 2025 से ही परिसर में निरंतर सक्रिय रूप से कार्य कर रही भारतीय शिक्षण मंडल की राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय इकाई ने बेहद अल्प समय में अपनी गहरी पैठ बनाई है। इस अल्पावधि में इकाई द्वारा स्थापना दिवस, परिचायक वर्ग, सदस्यता अभियान, शिक्षक-विद्यार्थी संवाद और भारतीय शिक्षा विषयक परिचर्चाओं जैसे अत्यंत सफल व प्रभावकारी कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है। संगठन की बढ़ती लोकप्रियता और प्रासंगिकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में विश्वविद्यालय के लगभग 190 शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी इस वैचारिक संगठन से सीधे जुड़े हुए हैं। इस पूरी इकाई का संचालन भारतीय शिक्षण मंडल, चित्तौड़ प्रांत के अध्यक्ष एवं राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के दूरदर्शी कुलपति प्रो. आनंद भालेराव के कुशल मार्गदर्शन में किया जा रहा है, जिनके सशक्त नेतृत्व में भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय शिक्षा दृष्टि के संवर्धन हेतु विभिन्न गतिविधियों का निरंतर विस्तार हो रहा है।

सांगठनिक ढांचे को अभेद्य और कार्यकुशल बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों के प्रमुखों और सह-प्रमुखों की घोषणा की गई है। डॉ. ज्ञान रंजन पांडा के अनुसार, परिसर में प्रभावी संचालन के लिए प्रत्येक विंग में प्रमुख, सह-प्रमुख तथा टोली सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके तहत गुरुकुल शिक्षा गतिविधि के प्रमुख पद पर गणित विभाग के प्रो. राजेश प्रताप सिंह तथा सह-प्रमुख पद पर भौतिकी विभाग के डॉ. राजेंद्र पवार को नियुक्त किया गया है, जबकि इनकी टोली में गौतम मिश्रा एवं यशस्वी पांडेय को शामिल किया गया है। उच्च शिक्षा गतिविधि की कमान स्वास्थ्य विज्ञान विभाग की डॉ. गाथा ठक्कर को बतौर प्रमुख और प्रबंधन विभाग की डॉ. प्रीति गोटमारे को बतौर सह-प्रमुख सौंपी गई है, जिनकी टोली में छाया कुमारी, प्रेषिता भालेराव एवं दर्शना हजारिका को दायित्व मिला है। शिक्षा एवं तंत्रज्ञान गतिविधि के प्रमुख का गुरुतर दायित्व प्रबंधन विभाग के डॉ. भावेश कुमार परमार तथा सह-प्रमुख का दायित्व डॉ. रामुलु भुक्या को दिया गया है, जिनके साथ टोली में गौरव राजाराम धुले, दिलीप कुमार एवं अजय सैनी कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करेंगे। शिक्षक शिक्षा गतिविधि के प्रमुख जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रो. गजानन बी. जोरे तथा सह-प्रमुख जैव रसायन विभाग के डॉ. दीपक गायेन बनाए गए हैं, जिनकी टोली में कमलजीत जांगिड़, अनुश्री नारायण, अजय चौधरी एवं अविनय राज वर्मा को शामिल किया गया है। वहीं, भारतीय भाषा जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मोर्चे की कमान हिंदी अधिकारी डॉ. ओम कर्ण को बतौर प्रमुख और डॉ. अनुराग सिंह को बतौर सह-प्रमुख दी गई है, जिनकी टोली में सत्यम राय, शुभम एवं कृतिका गुर्जर को शामिल कर भाषाई राष्ट्रवाद को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।

गतिविधियों के साथ-साथ सुचारू कार्यप्रणाली के लिए विशिष्ट कार्य विभागों की जिम्मेदारियों का भी पूरी तरह से बंटवारा कर दिया गया है। इसके अंतर्गत मंडल कार्य विभाग के प्रमुख डॉ. सागर बराले तथा सह-प्रमुख आशीष गुप्ता मनोनीत किए गए हैं, जिनकी टोली में अनुराग भाटी एवं सिद्धार्थ मणि शर्मा को रखा गया है। संपर्क कार्य विभाग के प्रमुख पद पर डॉ. देबाश्री दास तथा सह-प्रमुख पद पर डॉ. जयेंद्र नाथ शुक्ला की नियुक्ति हुई है, जिनकी टोली में सरिना योगी, ज्ञान कुमार एवं कथा शर्मा अपनी सेवाएं देंगी। विश्वविद्यालय कार्य विभाग के प्रमुख का दायित्व डॉ. जयेश सोनवणे तथा सह-प्रमुख का दायित्व डॉ. संजीत मेहरिया को सौंपा गया है, जिनकी टोली में पल्लवी रॉय एवं देवेंद्र बैरवा को शामिल किया गया है। पूरे संगठन की रीढ़ माने जाने वाले व्यवस्था विभाग के प्रमुख पद की जिम्मेदारी प्रो. संजय अरोड़ा तथा सह-प्रमुख की जिम्मेदारी दिलीप कुमार को दी गई है, जिनकी टोली में शिवेंद्र राजपूत एवं ऋतु चौधरी को शामिल किया गया है।

इस रणनीतिक विस्तार के ऐतिहासिक अवसर पर चित्तौड़ प्रांत के प्रांत सहमंत्री डॉ. जय प्रकाश त्रिपाठी ने विशेष रूप से शिरकत की और संगठन की विविध गतिविधियों तथा विभिन्न कार्य विभागों के दायित्वों, कर्तव्यों एवं उनके दूरगामी महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। इकाई के अध्यक्ष डॉ. ज्ञान रंजन पांडा ने इस महा-विस्तार के संदेश को रेखांकित करते हुए अत्यंत दृढ़ता के साथ कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल की इन तमाम गतिविधियों का मूल और अंतिम उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में भारतीय दृष्टिकोण को पूरी ताकत से सशक्त करना तथा शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा की प्रक्रिया से सीधे जोड़ना है। उन्होंने सभी नव-नियुक्त दायित्वधारकों को उज्ज्वल कार्यकाल की शुभकामनाएं देते हुए पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि इन ऊर्जावान चेहरों के नेतृत्व में विश्वविद्यालय इकाई की गतिविधियां भविष्य में और अधिक प्रभावी, व्यापक तथा परिणामोन्मुखी साबित होंगी।

इस ऐतिहासिक सांगठनिक घोषणा के भव्य क्षणों के दौरान भारतीय शिक्षण मंडल की विश्वविद्यालय इकाई के कोर समिति सदस्यों सहित चित्तौड़ प्रांत के सहमंत्री डॉ. जय प्रकाश त्रिपाठी, प्रांत प्रकाशन प्रमुख डॉ. अक्षांश भारद्वाज, विश्वविद्यालय इकाई के प्रचार प्रमुख डॉ. सोमनाथ, व्यवस्था सह-प्रमुख डॉ. गजानन, महिला गतिविधि प्रमुख डॉ. टी. संगीता, विकास पाठक, रुषम दास, त्र्यंबक, अंजलि रमोला तथा सत्यम राय सहित संगठन के अन्य तमाम वरिष्ठ व सक्रिय कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिन्होंने इस नए युग के सूत्रपात का गवाह बनकर राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में अपनी आहुति देने का संकल्प दोहराया।

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