जयपुर। राजस्थान में भारत की जनगणना 2027 के महाभियान का प्रथम चरण आगामी 16 मई 2026 से शुरू होने जा रहा है। 14 जून 2026 तक चलने वाले इस 'मकानसूचीकरण और मकानों की गणना' (HLO) चरण को पूर्णतः डिजिटल और सहभागी बनाने के लिए भारत सरकार ने 'स्व-गणना' (Self-Enumeration) की एक अभिनव एवं ऐतिहासिक पहल की है। जनगणना कार्य निदेशालय के निदेशक श्री बिष्णु चरण मल्लिक ने आज जयपुर में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में इन महत्वपूर्ण तैयारियों का खुलासा करते हुए बताया कि आमजन 1 मई 2026 से 15 मई 2026 तक https://se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर डेस्कटॉप या स्मार्टफोन के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे।

श्री मल्लिक ने स्पष्ट किया कि स्व-गणना की सुविधा व्यस्त परिवारों के लिए एक सुलभ विकल्प है, हालांकि डिजिटल प्रविष्टि के बाद भी प्रगणक द्वारा फील्ड स्तर पर सत्यापन की अनिवार्य प्रक्रिया संपादित की जाएगी। साइबर सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने नागरिकों को सचेत किया कि वे केवल आधिकारिक वेब एड्रेस का ही प्रयोग करें और किसी भी स्थिति में अपना ओटीपी साझा न करें। उन्होंने बताया कि स्व-गणना हेतु SE ID तथा OTP केवल 'RGICEN' के नाम से प्राप्त होंगे और विभाग का कोई भी प्रतिनिधि आपसे ओटीपी या लिंक साझा करने की मांग नहीं करेगा।

इस व्यापक अभियान के सफल निष्पादन हेतु संपूर्ण राजस्थान में करीब 1 लाख 60 हजार प्रगणक एवं पर्यवेक्षक घर-घर जाकर डेटा संग्रहण करेंगे। राज्य सरकार द्वारा 29 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए गए कुल 33 प्रश्नों के आधार पर भवनों, जनगणना मकानों, परिवारों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं, परिसंपत्तियों और उपभोग किए जाने वाले अनाज जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए जाएंगे। इस चरण का मुख्य उद्देश्य आगामी जनसंख्या गणना (PE) के लिए एक विश्वसनीय मास्टर फ्रेम तैयार करना है ताकि कोई भी परिवार इस राष्ट्रीय गणना से वंचित न रहे।

तकनीकी मोर्चे पर जनगणना 2027 को आधुनिक बनाने हेतु जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (CMMS) पोर्टल, मकानसूचीकरण ब्लॉक निर्माण (HLBC) वेब पोर्टल और मकान सूचीकरण ऐप (HLO App) विकसित किए गए हैं। जहां HLBC पोर्टल के माध्यम से प्रत्येक ब्लॉक की जियो टैगिंग और सैटेलाइट इमेज पर सीमांकन होगा, वहीं चार्ज अधिकारियों द्वारा CMMS पोर्टल से वास्तविक समय पर निगरानी रखी जाएगी। प्रगणकों के प्रशिक्षण हेतु भी त्रि-स्तरीय ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें 103 मास्टर ट्रेनर्स और 2550 फील्ड ट्रेनर्स के माध्यम से 1.6 लाख कर्मियों को तहसील एवं नगर पालिका स्तर पर दक्ष किया जा रहा है। श्री मल्लिक ने नागरिकों से अपील की है कि वे परिचय-पत्र पर अंकित QR कोड को स्कैन कर प्रगणक की पुष्टि करें और पूर्ण सत्यता के साथ जानकारी साझा करें। उन्होंने आश्वस्त किया कि व्यक्तिगत जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए ही होगा।




Pratahkal Newsroom

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