मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय, जयपुर में मंत्रिमंडल एवं मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित हुई, जिसमें पंचायत राज एवं नगरीय निकाय चुनावों को वन स्टेट-वन इलेक्शन की अवधारणा पर कराने, किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को प्रोत्साहन देने, श्रम सुधार लागू करने, हरित क्षेत्र के विस्तार, अक्षय ऊर्जा उत्पादन और सरकारी कर्मचारियों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक के बाद आयोजित प्रेसवार्ता में उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चन्द बैरवा, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ तथा संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने मंत्रिमंडल के निर्णयों की विस्तृत जानकारी दी।

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि प्रदेश में आगामी पंचायत राज एवं स्थानीय निकाय चुनाव वन स्टेट-वन इलेक्शन की अवधारणा पर कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पंचायत राज एवं स्थानीय निकाय चुनाव अलग-अलग समय पर होने से विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है। विकास कार्यों को निर्बाध बनाए रखने तथा धन, श्रम और समय की बचत के उद्देश्य से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वर्ष 2024-25 के बजट में नगरीय निकाय तथा पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव एक साथ कराने की घोषणा की थी।

उन्होंने बताया कि राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग की अनुशंसाएं 5 अगस्त 2026 को राज्य सरकार को प्राप्त हुई थीं। मंत्रिमंडल ने इन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है, जिससे नगरीय निकाय एवं पंचायत राज अधिनियम में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के साथ-साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण का प्रावधान लागू करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। अनुमोदन के बाद अब इन वर्गों की सीटों के आरक्षण के लिए लॉटरी प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से राजस्थान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026 को मंजूरी दी गई है। नीति का उद्देश्य कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देना, ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता विकसित करना, कृषि उपज का मूल्य संवर्धन कर किसानों की आय बढ़ाना, सप्लाई चेन को मजबूत करना तथा प्रोसेस्ड एग्रो उत्पादों के विपणन की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत फल-सब्जी, मसाला, अनाज, तिलहन, दलहन, औषधीय उत्पाद, लघु वन उपज, शहद, दुग्ध एवं पशु आहार इकाइयों के साथ-साथ साइलोज और कोल्ड स्टोरेज जैसी आधारभूत ढांचा विकास परियोजनाओं को शामिल किया गया है।

उन्होंने बताया कि श्रीअन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के लिए श्रीअन्न प्रमोशन एजेंसी की स्थापना की जाएगी। कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों, श्रीअन्न इकाइयों तथा प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 50 लाख रुपये तक के ऋण पर 60 प्रतिशत, 50 से 100 लाख रुपये तक के ऋण पर 50 प्रतिशत तथा एक करोड़ रुपये से अधिक के ऋण पर 40 प्रतिशत की दर से अधिकतम 1 करोड़ 50 लाख रुपये तक पूंजीगत अनुदान दिया जाएगा। एफपीओ, टीएसपी क्षेत्रों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा महिला उद्यमियों के लिए अतिरिक्त 5 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान का विशेष प्रावधान किया गया है। कोल्ड स्टोरेज, साइलोज एवं निर्यात संबंधी अनुदान राजस्थान निवेश प्रोत्साहन नीति-2024 के प्रावधानों के अनुसार उपलब्ध होंगे तथा कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाएं रिप्स-2024 के एमएसएमई मानक पैकेज के अंतर्गत भी पूंजीगत अनुदान के लिए आवेदन कर सकेंगी।

कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि कृषि जिंसों के प्रसंस्करण, व्यवसाय एवं निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राजस्थान फूड पार्क विकास नीति-2026 को भी मंजूरी दी गई है। राज्य में पहले से विभिन्न स्थानों पर फूड पार्कों के विकास के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है और अब विश्वस्तरीय फूड पार्कों की स्थापना, संचालन एवं प्रबंधन के लिए नई नीति तैयार की गई है। इसके तहत प्रत्येक जिले में क्लस्टर आधारित चरणबद्ध फूड पार्क विकसित किए जाएंगे। इन फूड पार्कों में खाद्य उत्पादों के संरक्षण, भंडारण, प्रसंस्करण एवं परिवहन के लिए एकीकृत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उत्पादक समूहों एवं किसानों को मजबूत सप्लाई चेन के माध्यम से प्रसंस्करण इकाइयों और बाजारों से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने बताया कि नीति में फूड पार्कों को भूमि स्वामित्व एवं विकास संबंधी मानदंडों के आधार पर चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इसमें उन विकासकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी जो राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट-2024 के अंतर्गत फूड पार्क विकास के लिए एमओयू धारक हैं अथवा प्रस्तावित फूड पार्क में न्यूनतम 10 करोड़ रुपये के निवेश के साथ एंकर फूड प्रोसेसिंग इकाई स्थापित करने के इच्छुक हैं।

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि श्रमिक हितों की रक्षा और व्यावसायिक एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के सुव्यवस्थित संचालन के लिए मजदूरी संहिता (राजस्थान) नियम-2026 जारी करने की स्वीकृति दी गई है। इन नियमों में न्यूनतम मजदूरी और कार्य के घंटे पारदर्शी तरीके से निर्धारित किए गए हैं। न्यूनतम वेतन तय करने के लिए वैज्ञानिक फॉर्मूला और कौशल आधारित वर्गीकरण अपनाया जाएगा। महंगाई भत्ते को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ते हुए वर्ष में दो बार 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर को संशोधित करने का प्रावधान किया गया है। सामान्य कार्य दिवस के लिए निश्चित कार्य घंटे, विश्राम अंतराल तथा रात्रि शिफ्ट में कार्यरत कर्मचारियों की सुरक्षा के पर्याप्त प्रावधान भी किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि सप्ताह में 48 घंटे कार्य निर्धारित किए गए हैं। छह दिवसीय कार्य सप्ताह में विश्राम अंतराल सहित प्रतिदिन अधिकतम साढ़े दस घंटे कार्य होगा तथा सातवां दिन सवैतनिक अवकाश रहेगा। लगातार पांच घंटे कार्य के बाद आधे घंटे का विश्राम अंतराल अनिवार्य होगा। अवकाश के दिन कार्य करने पर कर्मचारी को ओवरटाइम दर से वेतन मिलेगा। नियोक्ताओं के लिए वेतन पर्ची देना अनिवार्य किया गया है तथा वेतन से कानूनी कटौतियों की सीमा और डिजिटल रजिस्टर संबंधी नियमों को भी स्पष्ट किया गया है।

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने बताया कि राजस्थान औद्योगिक संबंध नियम-2026 का भी अनुमोदन किया गया है। इसके तहत सभी प्रकार के श्रम अनुपालन और विवाद संबंधी शिकायतों को पूरी तरह ऑनलाइन पोर्टलों पर स्थानांतरित किया जाएगा। औद्योगिक विवादों के त्वरित समाधान के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है तथा बातचीत करने वाली यूनियनों के निष्पक्ष चुनाव के लिए गुप्त मतदान प्रणाली अनिवार्य कर दी गई है। कार्यस्थल पर शिकायत निवारण और कार्य समितियों के गठन एवं संचालन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। कर्मचारियों की छंटनी तथा फैक्ट्री बंद करने की कानूनी प्रक्रियाओं और उनसे जुड़े प्रपत्रों को पहले की तुलना में अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है।

कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश में 'मिशन हरियालो राजस्थान' प्रारंभ किया है। इसके तहत पांच वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिनमें से लगभग दो वर्षों में करीब 20 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। वर्तमान मानसून सत्र में भी 10 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया है। वन क्षेत्र के बाहर हरित क्षेत्र का विस्तार करने के लिए मंत्रिमंडल ने ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट पॉलिसी लागू करने की स्वीकृति प्रदान की है।

उन्होंने बताया कि इस नीति से बंजर, परती भूमि, रेलवे और सड़कों के आसपास की भूमि तथा सिंचित क्षेत्रों में ट्री कवर बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इससे जैव विविधता संरक्षण, जल संचयन और भू-क्षरण की रोकथाम को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही राजस्थान वन नीति-2023 के लक्ष्यों की प्राप्ति, कार्बन अवशोषण, रोजगार सृजन तथा गैर-काष्ठ वन उत्पादों एवं कृषि आधारित वृक्ष उत्पादों से बाजार और उद्यमिता के अवसर भी बढ़ेंगे।

संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि राजस्थान भू-राजस्व (नवीनीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर आधारित शक्ति संयंत्र स्थापित करने के लिये भूमि का आवंटन) नियम, 2007 में दो महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी गई है। अब सौर, पवन और बायोमास जैसी गैर-पारंपरिक अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के विकासकर्ताओं को आवंटित भूमि का 10 प्रतिशत हिस्सा वृक्षारोपण के लिए आरक्षित रखना होगा। सौर एवं पवन ऊर्जा संयंत्रों के लिए प्रति मेगावाट 2 हेक्टेयर तथा हाइब्रिड परियोजनाओं के लिए 2.5 हेक्टेयर भूमि आवंटित की जा सकेगी। यह संशोधन वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा की अनुपालना में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया है।

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने बताया कि राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024 में संशोधन को भी मंजूरी दी गई है। बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए फिक्स पंजीकरण शुल्क के स्थान पर क्षमता आधारित स्लैब लागू किए जाएंगे। 50 प्रतिशत या उससे अधिक क्षमता की बैटरी स्टोरेज के साथ स्थापित परियोजनाओं को पंजीकरण शुल्क में छूट मिलेगी। प्रसारण तंत्र पर पावर इवैक्यूएशन की अधिकतम समय-सीमा तीन वर्ष से घटाकर दो वर्ष कर दी गई है। उन्होंने बताया कि राजस्थान सौर ऊर्जा क्षमता स्थापना में देश में प्रथम स्थान पर है और राज्य में अब तक 49 हजार मेगावाट से अधिक क्षमता की अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित हो चुकी हैं। नीति के अनुसार वर्ष 2030 तक प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन 125 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चन्द बैरवा ने बताया कि मंत्रिमंडल ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना प्रारंभ करने की स्वीकृति दी है। यह योजना विकसित भारत और विकसित राजस्थान विजन-2047 के अनुरूप ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर, समावेशी और दीर्घकालिक स्वरूप प्रदान करेगी। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा जल संरक्षण, अवसंरचना निर्माण और आपदा प्रबंधन के कार्य कराए जा सकेंगे। योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिवस के रोजगार की वैधानिक गारंटी दी गई है। डिजिटल मॉनिटरिंग के माध्यम से पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी तथा महिला एवं कमजोर वर्गों की भागीदारी को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकारी कर्मचारी बीमा नियम, 1998 में संशोधन का निर्णय भी लिया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार जिस वित्तीय वर्ष में राज्य कर्मचारी सेवानिवृत्त होता है, उस वर्ष 1 अप्रैल को उसकी स्टेट इंश्योरेंस पॉलिसी भुगतान के लिए मैच्योर हो जाती है, जिससे वास्तविक सेवानिवृत्ति तिथि तक बीमा कवरेज समाप्त हो जाता है। संशोधन के बाद सभी राज्य कर्मचारियों को उनकी वास्तविक सेवानिवृत्ति तिथि तक निरंतर बीमा कवरेज उपलब्ध रहेगा।

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री ने बताया कि बालोतरा जिले के पचपदरा में रिफाइनरी से प्रभावित 198 नमक खानों को शेष लवणीय क्षेत्र में विस्थापित करने के लिए डिस्टर्बेंस चार्जेज में संशोधन किया गया है। खुदाई लागत में वृद्धि के कारण पूर्व स्वीकृत 7.85 करोड़ रुपये की राशि में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी करते हुए 9.81 करोड़ रुपये के भुगतान को मंजूरी दी गई है। इससे नमक खानधारकों को आजीविका का साधन मिलेगा और राज्य सरकार को राजस्व लाभ होगा।

उन्होंने बताया कि औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए दो सीमेंट संयंत्रों हेतु भूमि आवंटन की मंजूरी दी गई है। मैसर्स स्टार सीमेंट नॉर्थ ईस्ट लिमिटेड को जैसलमेर जिले की तहसील रामगढ़ के ग्राम जोगा एवं सोनू में लगभग 254 हेक्टेयर औद्योगिक भूमि आवंटित की जाएगी। इस परियोजना में लगभग 6 हजार 200 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इसी प्रकार मैसर्स अल्ट्रा टेक सीमेंट लिमिटेड को जैसलमेर जिले के ग्राम लीला पारेवर में लगभग 107 हेक्टेयर औद्योगिक भूमि आवंटित करने की मंजूरी दी गई है।

कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि मंत्रिपरिषद की बैठक में 'हर घर तिरंगा-2026' अभियान को प्रदेशव्यापी जन आंदोलन बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने को समर्पित यह अभियान 9 से 17 अगस्त तक पूरे प्रदेश में आयोजित किया जाएगा। अभियान के तहत घरों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और कार्यस्थलों पर तिरंगा फहराया जाएगा तथा वंदे मातरम का सामूहिक गायन होगा। ब्लॉक से ग्राम पंचायत स्तर तक तिरंगा यात्रा, रैली और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि 922 मेगावाट क्षमता की तीन सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन को भी मंजूरी दी गई है। बीकानेर जिले की तहसील पूगल के ग्राम भानीपुरा में 22 मेगावाट परियोजना के लिए लगभग 44 हेक्टेयर, जैसलमेर जिले की तहसील फतेहगढ़ के ग्राम रणधा में 200 मेगावाट परियोजना के लिए 324 हेक्टेयर तथा जैसलमेर की उपनिवेशन तहसील नाचना के ग्राम बोडाना में 700 मेगावाट परियोजना के लिए 1678 हेक्टेयर भूमि सशर्त कीमतन आवंटित की जाएगी। इन परियोजनाओं से प्रदेश को ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के साथ संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चन्द बैरवा ने बताया कि मंत्रिपरिषद की बैठक में मानसून और उससे उत्पन्न परिस्थितियों की विस्तृत समीक्षा की गई। निर्णय लिया गया कि सभी मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों का दौरा करेंगे तथा विद्युत, पेयजल, सड़क, चिकित्सा और आपदा प्रबंधन से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा करेंगे। साथ ही यह सुनिश्चित करेंगे कि भारी वर्षा के दौरान आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो और आवश्यक जनसेवाएं निर्बाध रूप से संचालित होती रहें।

उन्होंने बताया कि किसानों को उर्वरक, प्रमाणित बीज तथा अन्य आवश्यक कृषि आदानों की निर्बाध, समयबद्ध और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी मंत्रिपरिषद की बैठक में चर्चा हुई। प्रभारी मंत्री अपने जिला प्रवास के दौरान इन व्यवस्थाओं की समीक्षा करेंगे ताकि किसानों को फसल उत्पादन के प्रत्येक चरण में आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध हो सकें और कृषि गतिविधियां बिना किसी व्यवधान के संचालित होती रहें।

Pratahkal Newsroom

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