लोकतंत्र सेनानियों को बड़ी सौगात: सम्मान राशि बढ़ी, रोडवेज में निःशुल्क यात्रा की सुविधा; आपातकाल को बताया संविधान पर सबसे बड़ा हमला
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में आयोजित लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह में लोकतंत्र सेनानियों की मासिक सम्मान राशि ₹20,000 से बढ़ाकर ₹25,000 और चिकित्सा सहायता ₹5,000 करने की घोषणा की। साथ ही रोडवेज में निःशुल्क यात्रा सुविधा दी गई। समारोह में आपातकाल, संविधान रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी जोर दिया गया।

तस्वीर में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (बाएं) और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ (दाएं) जयपुर में आयोजित कार्यक्रम के मंच पर एक लोकतंत्र सेनानी को सम्मानित करते हुए।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने लोकतंत्र सेनानियों का अभिनंदन करते हुए उनके सम्मान और सुविधाओं में महत्वपूर्ण वृद्धि की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों को मिलने वाली मासिक सम्मान राशि ₹20,000 से बढ़ाकर ₹25,000 तथा चिकित्सा सहायता ₹4,000 से बढ़ाकर ₹5,000 करने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्हें राजस्थान रोडवेज में निःशुल्क यात्रा की सुविधा भी प्रदान करने की घोषणा की गई। अब लोकतंत्र सेनानियों को प्रतिमाह कुल ₹30,000 की सहायता प्राप्त होगी।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को विदेशी शासन से मुक्त कराया, उसी प्रकार लोकतंत्र सेनानियों ने आपातकाल के दौरान संविधान और लोकतंत्र को बचाने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय देशवासियों को लोकतंत्र पर हुए सबसे बड़े हमले की याद दिलाने वाला ऐतिहासिक निर्णय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कुचलने का काम किया। 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से संविधान की मूल भावना को बदल दिया गया, विपक्षी नेताओं और लोकतंत्र सेनानियों को जेलों में डाल दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई, अखबारों के संपादकीय तक खाली छोड़ने पड़े और न्यायपालिका पर भी दबाव बनाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों ने जेलों में अमानवीय यातनाएं सहन कीं और उनके परिवारों ने असंख्य कठिनाइयों का सामना किया, फिर भी वे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के अपने संकल्प से पीछे नहीं हटे।
उन्होंने कहा कि आज आपातकाल को 51 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन तुष्टिकरण, वंशवाद, भ्रष्टाचार और संविधान की मूल भावना को कमजोर करने वाली राजनीति से देश को सतर्क रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों से युवाओं को उस दौर के संघर्ष, बलिदान और लोकतंत्र की रक्षा के महत्व से परिचित कराने का आह्वान करते हुए कहा कि भविष्य में कोई भी लोकतंत्र पर ऐसा हमला करने का साहस न कर सके।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि आपातकाल की मानसिकता आज भी कांग्रेस के भीतर जीवित है। उन्होंने कांग्रेस नेता अशोक गहलोत पर तंज कसते हुए उन्हें “राष्ट्रीय अध्यक्ष इन वेटिंग” बताया और उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि आज इंदिरा गांधी होतीं तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगा देतीं और भाजपा नेताओं को जेल में डाल देतीं। राठौड़ ने कहा कि इससे उनके इरादे स्पष्ट होते हैं कि यदि आज भी अवसर मिले तो वही दमनकारी सोच दोहराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी को आपातकाल की सच्चाई और कांग्रेस की लोकतंत्र विरोधी मानसिकता से अवगत कराना आवश्यक है।
मदन राठौड़ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों की भूमिका का स्मरण करते हुए कहा कि आपातकाल के समय संघ के कार्यकर्ताओं ने जेल भरो आंदोलन चलाया, स्वयं यातनाएं सहीं तथा जेलों में बंद लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों की सेवा और सहायता का दायित्व निभाया। अनेक स्वयंसेवकों को गिरफ्तार किया गया, उन पर वारंट जारी हुए और उन्हें शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़नाएं झेलनी पड़ीं, लेकिन उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा का संघर्ष जारी रखा।
समारोह में मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों मोहन जी बालाहाडी, बालगोपाल जी, हरिहर जी पारीक, ओ.पी. गुप्ता, सुरेश कुमार शर्मा तथा बाबूलाल शर्मा सहित अनेक लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया। अन्य लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी, लोकसभा सांसद मंजू शर्मा, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक अशोक परनामी, पूर्व सांसद एवं मंत्री नाथू सिंह गुर्जर, विधायक गोपाल शर्मा, विधायक बालमुकुंद आचार्य, भाजपा महामंत्री श्रवण बागड़ी, भूपेंद्र सैनी, पूर्व सांसद रामचरण बोहरा सहित मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया।
मदन राठौड़ ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष भारत के लोकतांत्रिक इतिहास की अमूल्य धरोहर है। उनके त्याग और बलिदान को सदैव स्मरण रखा जाएगा तथा नई पीढ़ी को लोकतंत्र की रक्षा के इस गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का अभियान निरंतर जारी रहेगा।
समारोह में अनेक लोकतंत्र सेनानी, प्रदेश पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे। लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान, आपातकाल की स्मृतियों और संविधान की रक्षा के संकल्प के साथ संपन्न यह समारोह लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण और नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने के संदेश का प्रमुख मंच बना।

Pratahkal Bureau
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