राजस्थान में भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग, अनियमितताओं और गंभीर कदाचार के मामलों में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सख्त कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री जनसम्पर्क प्रकोष्ठ के अनुसार मुख्यमंत्री ने अभियोजन स्वीकृति और धारा 17-ए के तहत कार्यवाही के अनुमोदन के साथ विभागीय जांच से जुड़े गंभीर मामलों का निस्तारण करते हुए लगभग 40 मामलों में कार्रवाई की है।

राजकीय महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज में छात्राओं के लैंगिक उत्पीड़न के एक मामले में मुख्यमंत्री ने कॉलेज के प्राचार्य को सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया है। इस मामले में सहयोग करने वाले एक प्रवक्ता और पुस्तकालयाध्यक्ष को भी सेवा से हटाने की मंजूरी दी गई है।

भ्रष्टाचार और अन्य आपराधिक मामलों में पद एवं प्रभाव का दुरुपयोग कर अवैध लाभ लेने से जुड़े 6 गंभीर प्रकरणों में मुख्यमंत्री ने अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है। भ्रष्टाचार निवारण (यथा संशोधित 2018) अधिनियम तथा धन संशोधन निवारण अधिनियम 2002 के तहत सवाई मानसिंह चिकित्सालय के वरिष्ठ आचार्य, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता, वित्तीय सलाहकार, सहायक अभियंता तथा विकास अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई करने का फैसला लिया गया है।

सेवानिवृत्त अधिकारियों के सेवा काल में की गई अनुशासनहीनता, दुराचरण और भ्रष्टाचार में संलिप्तता के विभिन्न मामलों में 10 अधिकारियों की पेंशन रोकने का निर्णय भी लिया गया है। इनमें 5 प्रकरणों में शत-प्रतिशत पेंशन रोकने की स्वीकृति दी गई। एक प्रकरण में न्यायालय से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषसिद्धि होने पर शत-प्रतिशत पेंशन रोकने का निर्णय लिया गया है। अन्य प्रकरणों में विभागीय जांच पूरी होने तक शत-प्रतिशत पेंशन रोकने का निर्णय किया गया।

मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच का अनुमोदन करते हुए 5 प्रकरणों में एसीबी को आगामी अन्वेषण की अनुमति दी है। इसके साथ ही राजस्थान सिविल सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 16 के तहत 6 प्रकरणों में विभिन्न अधिकारियों को देय वेतन वृद्धियां संचयी प्रभाव से रोकने का निर्णय लिया गया है।

सीसीए नियम 17 के तहत विचाराधीन 2 मामलों में आरोपित अधिकारियों को परिनिंदा के दंड से दंडित करने तथा नियम 23 के तहत 2 रिव्यू याचिकाओं में राहत देते हुए वेतन वृद्धि रोकने के दंड को परिनिंदा में परिवर्तित करने की स्वीकृति दी गई है। वहीं, सीसीए नियम 34 के तहत प्रस्तुत 4 रिव्यू याचिकाओं को खारिज करते हुए दण्डादेश यथावत रखे गए हैं और इसकी अभिशंसा राज्यपाल को भिजवा दी गई है।

इसी क्रम में विभागीय जांच के 4 प्रकरणों को समाप्त करते हुए आरोपित अधिकारियों को दोषमुक्ति की राहत दी गई है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के इन निर्णयों से भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग, अनुशासनहीनता और कार्यस्थल पर गंभीर कदाचार से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में सरकार की कार्रवाई सामने आई है। इन मामलों में पारदर्शी एवं स्वच्छ प्रशासन को मजबूत करने के लिए कठोर, निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई की गई है।

Pratahkal Newsroom

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