डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय का नवम दीक्षांत समारोह संपन्न
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने आयुर्वेद को समग्र जीवन विज्ञान बताया, विश्वविद्यालय में ड्रग टेस्टिंग लेबोरेट्री का लोकार्पण कर छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान कीं।

जोधपुर में आयोजित डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह के दौरान मंच पर उपस्थित राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और अन्य गणमान्य अतिथि।
जयपुर/जोधपुर, 20 मार्च। राज्यपाल सचिवालय, लोकभवन, राजस्थान द्वारा डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय का नवम दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत केवल उपाधि प्रदान करने का अवसर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के नव जीवन की शुरुआत का महत्वपूर्ण क्षण है। उन्होंने कहा कि यह वह समय होता है जब विद्यार्थी अर्जित ज्ञान को समाज और राष्ट्र के उत्थान में उपयोग करने के लिए तैयार होते हैं। शुक्रवार को आयोजित इस समारोह में राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दीक्षांत आत्मावलोकन का भी अवसर है, जहां विद्यार्थी अपने ज्ञान और कौशल को व्यवहार में उतारने के लिए संकल्पित होते हैं।
आयुर्वेद: पंचतत्व और त्रिदोष के संतुलन का विज्ञान
राज्यपाल श्री बागडे ने आयुर्वेद की व्याख्या करते हुए कहा कि "‘आयु’ अर्थात जीवन और ‘वेद’ अर्थात विज्ञान, यानी आयुर्वेद जीवन का विज्ञान है। यह पंचतत्व—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—तथा वात, पित्त और कफ के संतुलन पर आधारित समग्र स्वास्थ्य प्रणाली है।" उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि आयुर्वेद केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के संतुलन के माध्यम से सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करने वाला जीवन दर्शन है। उन्होंने कहा कि वेदों और प्राचीन ग्रंथों में चिकित्सा विज्ञान के समृद्ध संदर्भ मिलते हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा में आयुर्वेद का विशेष स्थान रहा है, जो आज भी जीवनशैली जनित रोगों के समाधान में अत्यंत प्रासंगिक है।
सेवा भाव और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समन्वय
वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि दुनिया के लिए आयुर्वेद मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे सेवा भाव को अपने जीवन का मूलमंत्र बनाएं और "‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के सिद्धांत को अपनाते हुए समाज के स्वास्थ्य संवर्धन में योगदान दें।" उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे शिक्षण, अनुसंधान एवं सेवा कार्यों की सराहना की और कहा कि आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। राज्यपाल ने प्रमाण आधारित अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक स्तर पर आयुष पद्धतियों के प्रसार पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय के ग्रामीण चिकित्सा शिविरों, स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय समझौतों और "धन्वन्तरि वनौषधि उद्यान" के विकास को उल्लेखनीय पहल बताया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे आयुर्वेद के ज्ञान को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में विकसित कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। इसी अवसर पर राज्यपाल के कर कमलों से विश्वविद्यालय की ड्रग टेस्टिंग लेबोरेट्री का लोकार्पण भी किया गया। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने उद्बोधन में कहा कि "दीक्षांत समारोह केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण का उत्सव है।" उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व भारत के ज्ञान और जीवन-दर्शन की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है और इस उपलब्धि के पीछे विद्यार्थियों के परिवारजनों का त्याग और परिश्रम निहित है।
राजस्थान को 'आयुष हब' बनाने का संकल्प
उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन और शाश्वत ज्ञान परंपरा का हिस्सा है और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पारंपरिक चिकित्सा का वैश्विक केंद्र बन रहा है। वहीं संसदीय कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल ने कहा कि "राजस्थान आयुष हब के रूप में उभर रहा है और जोधपुर इस दिशा में अपनी विशेष पहचान बना रहा है।" उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को हेल्थ डेस्टिनेशन बनाने के लिए कृतसंकल्पित है। समारोह के अंत में शैक्षणिक उपलब्धियों का विवरण साझा किया गया, जिसमें 16 विद्यार्थियों को आयुर्वेद में पीएचडी, 133 को आयुर्वेद तथा 12 को होम्योपैथी में एमडी/एमएस, और कुल 1230 विद्यार्थियों को स्नातक उपाधियां प्रदान की गईं। समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को कुल 6 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

Pratahkal Bureau
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