राजस्थान अशांत क्षेत्र विधेयक पर विधायक गोपाल शर्मा का समर्थन
राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा ने प्रस्तावित विधेयक को सामाजिक समरसता और कानून व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में अहम बताया।

जयपुर, 06 मार्च। राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रस्तुत किए गए ‘राजस्थान अशांत क्षेत्र विधेयक’ को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच सिविल लाइंस से विधायक Gopal Sharma ने इस विधेयक का खुलकर समर्थन करते हुए इसे प्रदेश में शांति, सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यह कानून किसी विशेष वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और ‘सर्वधर्म समभाव’ की भावना की रक्षा के उद्देश्य से लाया गया है।
विधायक गोपाल शर्मा ने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता में एकता और सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की परंपरा से होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे लिए Ashfaqulla Khan और Chandra Shekhar Azad, Atal Bihari Vajpayee और A. P. J. Abdul Kalam, तथा Abdul Hamid और शहीद अमित भारद्वाज जैसे राष्ट्रनायकों का सम्मान समान है। यही भारतीय संस्कृति और समावेशी सोच देश की असली पहचान है।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कुछ क्षेत्रों में सुनियोजित तरीके से जनसांख्यिकीय असंतुलन पैदा करने और अल्पसंख्यकों को भयभीत कर वहां से बाहर निकालने की साजिशें रची गई हैं। उनके अनुसार यह विधेयक ऐसे प्रयासों पर रोक लगाने और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है।
गोपाल शर्मा ने इस संदर्भ में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री Bhairon Singh Shekhawat के शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय असामाजिक तत्वों और बाहरी शक्तियों को जयपुर में पैर जमाने का मौका नहीं दिया गया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार भी उसी दृढ़ संकल्प के साथ प्रदेश में शांति और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है।
विधायक ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में प्रेम, सहजता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत करना है। उनका कहना था कि जमीनों और दुकानों की खरीद-फरोख्त के माध्यम से यदि कहीं सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने की कोशिश होती है तो इस विधेयक के माध्यम से उस पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा।
उन्होंने इस कानून की तुलना समाज को सुरक्षित रखने वाली व्यवस्था से करते हुए कहा कि जिस प्रकार जेल का उद्देश्य समाज को विकृतियों और अपराध से बचाना होता है, उसी प्रकार यह कानून उन प्रवृत्तियों को अलग-थलग करने का प्रयास है जो समाज में वैमनस्य और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश करती हैं।
राजस्थान विधानसभा में पेश यह विधेयक आने वाले समय में राज्य की सामाजिक संरचना, कानून व्यवस्था और सामुदायिक संतुलन को किस प्रकार प्रभावित करेगा, इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। हालांकि समर्थकों का मानना है कि यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो यह कानून प्रदेश में शांति और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
