ऑपरेशन मदाविकाढ़त: सात साल से फरार इनामी तस्कर रमेश बंजारा एमपी से गिरफ्तार
राजस्थान के शातिर तस्कर रमेश बंजारा का अंत! सात साल से कंबल की आड़ में नशे का कारोबार और भाई की पहचान का ढोंग कर पुलिस को दे रहा था चकमा। जानिए कैसे एएनटीएफ ने 'ऑपरेशन मदाविकाढ़त' के जरिए एमपी से दबोचा इस इनामी अपराधी को।

एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की टीम द्वारा मध्य प्रदेश के नीमच से गिरफ्तार किए गए मादक पदार्थ तस्कर रमेश बंजारा की फाइल फोटो।
राजस्थान में नशामुक्त अभियान के तहत एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए सात साल से फरार 25 हजार रुपये के इनामी मादक पदार्थ तस्कर रमेश बंजारा को मध्य प्रदेश के नीमच से गिरफ्तार किया है। फलोदी पुलिस द्वारा वांछित यह अपराधी अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए पिछले सात वर्षों से लगातार पुलिस को छका रहा था। इस कार्रवाई को एएनटीएफ ने 'ऑपरेशन मदाविकाढ़त' का नाम दिया है, जो नशे की तस्करी के खिलाफ एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा था।
आरोपी रमेश बंजारा की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। वह दिन में कंबल बेचने के बहाने लोगों के बीच सीधा-साधा 'बहादुर' बनकर रहता, लेकिन रात के अंधेरे में वही रमेश बनकर मादक पदार्थों की बड़ी खेप सप्लाई करता था। उसका नेटवर्क राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु तक फैला हुआ था। वह मोटरसाइकिल पर कंबल बेचने की आड़ में घूम-घूमकर तस्करी के लिए एजेंट तैयार करता था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वह अपने भाई से मिलती-जुलती शक्ल का फायदा उठाकर पुलिस की दबिश के दौरान भाई का ही पहचान पत्र दिखाकर खुद को निर्दोष साबित कर देता था। इस पैंतरे से वह पूर्व में दो बार एएनटीएफ की टीम को चकमा देने में सफल रहा था।
एएनटीएफ महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में टीम ने इस तस्कर को दबोचने के लिए एक विशेष जाल बुना था। टीम ने रमेश के ससुराल ग्राम गुंदारेत में खुफिया नेटवर्क सक्रिय कर सात दिनों तक दोनों भाइयों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी। अंततः इनपुट मिला कि वह अपनी पत्नी के साथ एक मृत्युभोज कार्यक्रम में शामिल होने जा रहा है। राजस्थान सीमा पर सुरक्षा के मद्देनजर टीम ने उसे नहीं पकड़ा, लेकिन जैसे ही वह मध्य प्रदेश की सीमा में दाखिल हुआ, एएनटीएफ ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय भी उसने खुद को भाई बताने की कोशिश की और उसकी पत्नी ने भी पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया, लेकिन टीम की सतर्कता और साक्ष्यों के कारण उसकी पहचान उजागर हो गई। यह एएनटीएफ की सूची में 66वां बड़ा शिकार है, जो नशे के खिलाफ चल रहे अभियान की एक बड़ी उपलब्धि है।

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