राजस्थान में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने नशे के सौदागरों के खिलाफ अपनी स्ट्राइक को और तेज करते हुए लगातार तीसरे दिन एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। ऑपरेशन मदाविकाढ़त के तहत मध्य प्रदेश से दबोचे गए तस्कर रमेश बंजारा से मिली कड़ियों को जोड़ते हुए एएनटीएफ ने अब 'ऑपरेशन यमलकमली' के तहत उसके समधी और मुख्य साझीदार रणजीत दायमा उर्फ रंजीत बंजारा को केरल से गिरफ्तार कर लिया है। फलोदी पुलिस की आंखों में धूल झोंककर पिछले 7 सालों से सुदूर दक्षिण भारत में फरारी काट रहे इस 25 हजार रुपये के इनामी अपराधी को पकड़ने के लिए पुलिस ने 'गेटवे टू मारवाड़' से 'गेटवे टू मालाबार' तक करीब 2500 किलोमीटर का सफर तय किया और उसकी मांद में जाकर उसे दबोच लिया।

गिरफ्तार तस्कर रणजीत दायमा भले ही पढ़ा-लिखा नहीं है, लेकिन वह बेहद चतुर भाषाई विशेषज्ञ निकला, जिसने केरल के शोरानूर जिले में फरारी काटने के दौरान स्थानीय भाषा पर ऐसी पकड़ बनाई कि वहां के लोग उसे पक्का मलयाली ही समझते थे। वह जहां भी जाता, वहां की स्थानीय भाषा कन्नड़, तेलुगु या मलयालम इतनी धाराप्रवाह बोलता था कि कोई उसकी राजस्थानी या मध्य प्रदेश की पहचान को पकड़ ही नहीं पाता था। जांच में सामने आया है कि रणजीत और दो दिन पहले पकड़ा गया रमेश बंजारा आपस में समधी हैं और पिछले 8 वर्षों से इस काले कारोबार में बराबर के पार्टनर हैं। दोनों ने काम का सटीक बंटवारा कर रखा था, जिसमें तस्करी की डील करने का काम रमेश का था, जबकि माल भरवाने और उसे सुरक्षित ठिकानों से निकलवाने का जिम्मा रणजीत संभालता था, जिसके बदले उसे रमेश से 500 रुपये प्रति किलो के हिसाब से फिक्स कमीशन मिलता था। जब भी कोई तस्कर 100 से 500 किलो तक डोडा-चूरा खरीदता, तो रणजीत को बैठे-बिठाए 50 हजार से 2 लाख रुपये तक की मोटी कमाई हो जाती थी। केरल के शोरानूर जिले के वडकनचेरी कस्बे में रणजीत ने कंबल की एक दुकान खोल रखी थी और वह अपनी मोटरसाइकिल पर कंबल लादकर रोजाना आसपास के इलाकों में 150 किलोमीटर का सफर तय करता था, तथा कुछ समय के लिए मध्य प्रदेश-राजस्थान आकर स्थानीय तस्करों को माल की सप्लाई करता और पुलिस को भनक लगने से पहले ही वापस केरल भाग जाता था।

रमेश बंजारा से पूछताछ में जब एएनटीएफ को रणजीत के केरल कनेक्शन का पता चला, तो टीम ने बिना वक्त गंवाए दक्षिण भारत की ओर कूच किया और वहां राजस्थानी कारीगर बनकर उसके ठिकाने की रेकी की। जब पता चला कि रणजीत शोरानूर से करीब 100 किलोमीटर दूर नीलयांमती पहाड़ियों की दुर्गम बस्तियों में मोटरसाइकिल पर कंबल बेचने गया है, तो टीम तुरंत पहाड़ियों में पहुंची और ग्राहक बनकर कंबल का मोलभाव शुरू कर दिया। बड़ी मात्रा में कंबल खरीदने का लालच देकर टीम ने रणजीत को फाइनल डील के लिए पास खड़ी गाड़ी के पास बुलाया और जैसे ही वह कार के पास पहुंचा, एएनटीएफ ने उसे धर-दबोचा। पूछताछ में रणजीत ने स्वीकार किया कि वह राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में डोडा-चूरा की सप्लाई करता था और उसे खुद नहीं पता कि उसके खिलाफ कहां-कहां मुकदमे दर्ज हैं। एएनटीएफ की टीम इस इनामी तस्कर को ट्रेन में बिना रिजर्वेशन 2500 किलोमीटर का सफर कराकर वापस राजस्थान लाई है, जहाँ आईजी विकास कुमार ने बताया कि इस बेहद दुर्गम और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को अंजाम देने वाली पूरी टीम को मुख्यालय में सम्मानित किया जाएगा।

Pratahkal Newsroom

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