प्रदेश के पशुपालन विभाग ने हाल ही में पशु उप चिकित्सा केंद्र से क्रमोन्नत हुए 20 पशु चिकित्सालयों के लिए 44 अतिरिक्त नवीन पदों के सृजन का आदेश जारी किया है। यह निर्णय 13 जिलों में पशु चिकित्सा सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस संबंध में पशुपालन विभाग के संयुक्त शासन सचिव दिनेश कुमार जांगिड़ द्वारा प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की गई है।

पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत के निर्देशों की अनुपालना में इन क्रमोन्नत पशु चिकित्सालयों में पशु चिकित्सा अधिकारी के 17 पद, पशुधन परिचर के 16 पद तथा पशु परिचर के 5 अतिरिक्त पद सृजित किए गए हैं। मंत्री कुमावत ने कहा कि इन पदों के सृजन से ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

इनमें कोटपुतली-बहरोड़ जिले के चतरपुरा, अलवर के मालपुर, अजमेर के लीडी, बाड़मेर के बामरला, बूंदी के नवलपुरा, डीग के कौरेर, डूंगरपुर के घोटाद तथा जोधपुर जिले के मांडियाई खुर्द स्थित पशु उप चिकित्सा केंद्रों को क्रमोन्नत कर पशु चिकित्सालय बनाया गया है। इन सभी संस्थानों में आवश्यक स्टाफ के अतिरिक्त नए पद स्वीकृत किए गए हैं।

इसी प्रकार नागौर जिले के कितलसर एवं हरसोलाव, टोंक जिले के डाबरकलां, सिरोही जिले के टोडा का गोठड़ा एवं सावतगढ़, सवाई माधोपुर जिले के तलावड़ा, श्रीगंगानगर के गोमावाली तथा पाली जिले के खिवांडा गांव के पशु उप चिकित्सा केंद्रों को भी पशु चिकित्सालय के रूप में क्रमोन्नत किया गया है।

इन सभी क्रमोन्नत चिकित्सालयों में फर्नीचर एवं आवश्यक उपकरणों की खरीद के लिए 60-60 हजार रुपये की राशि भी स्वीकृत की गई है, जिससे आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा सके।

इसके अतिरिक्त, जोधपुर जिले के शेरगढ़ तहसील के सुवालिया, झुंझुनूं जिले के पीपली चौक तथा जयपुर जिले की चौमू तहसील के मोरीजा स्थित पशु चिकित्सालयों में एक-एक पशु चिकित्सा अधिकारी एवं एक-एक पशु परिचर का नवीन पद सृजित किया गया है।

वहीं बजट घोषणा वर्ष 2026-27 के अंतर्गत नागौर जिले की नांवा तहसील के गांव केरियावास में स्वीकृत नवीन पशु चिकित्सा उप केंद्र के संचालन हेतु पशुपालन विभाग के संयुक्त शासन सचिव दिनेश कुमार जांगिड़ द्वारा पशुधन निरीक्षक एवं पशु परिचर का एक-एक पद सृजित करने के आदेश भी जारी किए गए हैं।

यह संपूर्ण निर्णय प्रदेश में पशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और ग्रामीण पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक सशक्त प्रशासनिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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