एग्रीस्टैक पर बड़ा फैसला: राजस्थान में बनेगा कमिश्नरेट, 87.44 लाख किसानों की बनी फार्मर आईडी
राजस्थान में एग्रीस्टैक कमिश्नरेट बनेगा। 87.44 लाख किसानों की फार्मर आईडी बनी, उर्वरक वितरण और डिजिटल क्रॉप सर्वे पर भी बड़ा फैसला।

तस्वीर में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास केंद्र में अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए नजर आ रहे हैं, जिनके साथ बाईं ओर एक अधिकारी दस्तावेज देख रहे हैं और दाईं ओर प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल बैठी हैं।
राजस्थान में एग्रीस्टैक को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी तेज कर दी है। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में सोमवार को एग्रीस्टैक स्टीयरिंग कमेटी की बैठक आयोजित हुई। बैठक में फॉर्मर रजिस्ट्री, फॉर्मर आईडी, डिजिटल क्रॉप सर्वे, डेटा सिंक्रोनाइजेशन, एग्रीस्टैक आधारित उर्वरक वितरण, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने कहा कि एग्रीस्टैक का उद्देश्य केवल डिजिटल डाटाबेस तैयार करना नहीं, बल्कि कृषक को उसकी भूमि, फसल एवं कृषि सेवाओं से संबंधित सुविधाएं एकीकृत और सुगम रूप से उपलब्ध कराना होना चाहिए। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ एग्रीस्टैक के सभी निर्धारित माइलस्टोन समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
बैठक में फॉर्मर रजिस्ट्री की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने शेष कृषकों का पंजीकरण अभियान के रूप में पूरा करने के निर्देश दिए। कम प्रगति वाले जिलों में विशेष फील्ड विजिट, संभागवार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एवं प्रशिक्षण तथा कृषि पर्यवेक्षकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि फॉर्मर रजिस्ट्री को शत-प्रतिशत पूर्ण करने के साथ इसे निरंतर अद्यतन रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए मोबाइल ऐप का व्यापक उपयोग सुनिश्चित करने तथा शेष कृषकों को एसएमएस, समाचार पत्रों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्राम पंचायतों एवं अन्य प्रचार माध्यमों के जरिए पंजीकरण के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में बताया गया कि राज्य में अब तक 87 लाख 44 हजार 842 कृषक पंजीकृत हो चुके हैं, जो निर्धारित लक्ष्य का 96.95 प्रतिशत है। राज्य को एग्रीस्टैक से संबंधित कार्य पूर्ण करने पर अब तक 737 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत हुई है।
मुख्य सचिव ने कृषक रजिस्ट्री एवं राजस्व अभिलेखों के बीच नियमित एवं स्वचालित समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इससे नामांतरण के बाद भूमि संबंधी नवीनतम जानकारी स्वतः अपडेट हो सकेगी। उन्होंने नामांतरण के समय आधार संख्या एवं कृषक पहचान संख्या दर्ज करने की व्यवस्था शीघ्र लागू करने तथा संबंधित विभागों के बीच आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने को कहा।
काश्तकारों, बटाईदारों एवं अन्य वास्तविक कृषकों को कृषक रजिस्ट्री में शामिल करने के लिए कार्यविधि को शीघ्र अंतिम रूप देने तथा मैदानी स्तर पर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि एग्रीस्टैक के माध्यम से वास्तविक खेती एवं बटाईदार कृषि व्यवस्था की सटीक जानकारी जुटाई जाए, ताकि कृषि योजनाओं का लाभ वास्तविक कृषक तक सुनिश्चित रूप से पहुंच सके।
बजट घोषणा के अनुरूप कृषि विभाग के आयुक्तालय में एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना तथा स्वतंत्र पद सृजन से संबंधित प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही में प्रगति बढ़ाने के निर्देश दिए।
उन्होंने एग्रीस्टैक के तहत चिन्हित प्राथमिक सेवाओं को समयबद्ध रूप से लागू करने तथा कृषक रजिस्ट्री के आंकड़ों का उपयोग उर्वरक वितरण, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद एवं अन्य किसान केन्द्रित सेवाओं में करने पर जोर दिया।
कृषि विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती मंजू राजपाल ने बैठक में बताया कि राजसंद एवं सिरोही में फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाईजर सेल लागू किया जा चुका है। इसके अंतर्गत 65 हजार से अधिक किसानों द्वारा 10 हजार मैट्रिक टन से अधिक उर्वरक क्रय किया जा चुका है। मुख्य सचिव ने फ्रेमवर्क की सफलता को देखते हुए एग्रीस्टैक आधारित उर्वरक वितरण व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू करने तथा किसानों को उर्वरक खरीद में सुगमता एवं पारदर्शिता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने फॉर्मर रजिस्ट्री को सभी किसान केन्द्रित योजनाओं से जोड़ने तथा चरणबद्ध रूप से इसका उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सहित अन्य योजनाओं के शेष लाभार्थियों को कृषक पहचान संख्या से जोड़ने और किसानों को इसके प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में रबी के डिजिटल फसल सर्वेक्षण की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने आगामी खरीफ 2083 में सर्वेक्षण को अधिक सटीक एवं सहभागी बनाने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि लक्षित 2.36 करोड़ खसरों में से 1.89 करोड़ खसरों का सर्वेक्षण पूर्ण किया गया है, जो 80.21 प्रतिशत है।
मुख्य सचिव ने खरीफ 2083 में सभी 424 ऑनलाइन तहसीलों एवं 50,478 ऑनलाइन गांवों में सर्वेक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने 20 मीटर भू-सीमा निर्धारण एवं भू-चिह्नित फसल फोटो के माध्यम से प्रमाणिक आंकड़े संकलित करने को कहा। किसानों की प्रत्यक्ष भागीदारी बढ़ाते हुए कम से कम 25 प्रतिशत यानी लगभग 71 लाख खसरों की स्वयं गिरदावरी का लक्ष्य हासिल करने पर भी जोर दिया।
मुख्य सचिव ने कहा कि एग्रीस्टैक एक बहु विभागीय पहल है। इसके लिए कृषि विभाग, राजस्व मंडल, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग, एनआईसी, सहकारिता विभाग, राजफेड तथा जिला प्रशासन के मध्य निरंतर समन्वय आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि एग्रीस्टैक के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किसानों को समय पर एवं लक्षित सेवाएं उपलब्ध कराने, फसल एवं उर्वरक संबंधी आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने तथा कृषि योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए। बैठक में वित्त विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री वैभव गालरिया, राजस्व एवं उपनिवेशन विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री टी. रविकांत, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती मंजू राजपाल, सहकारिता विभाग के सचिव श्री समित शर्मा एवं श्री राजीव चावला सेवानिवृत्त (आई.ए.एस.) चीफ नॉलेज ऑफिसर एग्रीस्टैक नई दिल्ली से ऑनलाइन भाग लिया।
एग्रीस्टैक के तहत फॉर्मर रजिस्ट्री, किसान पहचान, डिजिटल फसल सर्वेक्षण और उर्वरक वितरण जैसी सेवाओं को एकीकृत करने की दिशा में हुई यह बैठक राज्य में कृषि सेवाओं को अधिक पारदर्शी एवं किसान केन्द्रित बनाने के लिए निर्धारित कार्ययोजना की प्रगति को रेखांकित करती है।

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