राजस्थान कृषि विभाग-टैफे जेफ़ार्म सर्विसेज के बीच एमओयू, किसानों को किराए पर मिलेंगे आधुनिक कृषि यंत्र
राजस्थान कृषि विभाग और टैफे जेफ़ार्म सर्विसेज के बीच हुए एमओयू से किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र किराए पर मिलेंगे। जानिए इस साझेदारी से किसानों को क्या लाभ होगा।

तस्वीर में पंत कृषि भवन में राजस्थान कृषि विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती मंजू राजपाल, आयुक्त कृषि श्री नरेश कुमार गोयल और टैफे के प्रतिनिधि हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) के दस्तावेज दिखाते हुए खड़े हैं।
राजस्थान में कृषि यंत्रीकरण को नई गति देने की दिशा में कृषि विभाग और टैफे – जेफ़ार्म सर्विसेज के बीच गुरुवार को पंत कृषि भवन के सभा कक्ष में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य पूरे प्रदेश में कृषि यंत्रीकरण को मजबूत करना तथा विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना है।
इस समझौते के तहत किसान जेफ़ार्म सर्विसेज के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ट्रैक्टर और कृषि उपकरण आसानी से किराए पर ले सकेंगे। इससे खेती की लागत कम करने के साथ कृषि कार्यों में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ेगा और उत्पादकता में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।
समझौते के अनुसार जेफ़ार्म सर्विसेज प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को बिना किसी अतिरिक्त सेवा शुल्क के ट्रैक्टर एवं कृषि उपकरण किराए पर उपलब्ध कराए जाएंगे। जेफ़ार्म सर्विसेज प्लेटफॉर्म को राज किसान साथी पोर्टल के साथ एकीकृत किया जाएगा, ताकि किसानों को डिजिटल माध्यम से निर्बाध सेवाएं मिल सकें। फसल चक्र के पूरे चरण, जिसमें भूमि तैयारी, बुआई, कटाई और पोस्ट-हार्वेस्टिंग शामिल हैं, में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों, कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHCs), ट्रैक्टर मालिकों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को प्लेटफॉर्म से जोड़कर कृषि यंत्र किराया इकोसिस्टम को मजबूत बनाया जाएगा। इसके साथ ही किसान जागरूकता कार्यक्रम, प्रदर्शन, किसान गोष्ठियां और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। किसानों, एफपीओ, ग्रामीण युवाओं, छात्रों, महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और एग्री-स्टार्टअप्स के क्षमता विकास के लिए प्रशिक्षण एवं ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।
प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी श्रीमती मंजू राजपाल ने कहा कि कस्टम हायरिंग सेंटर राजस्थान में कृषि यंत्रीकरण को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मॉडल है। विभाग की सोच है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित हों, जिनका संचालन फेडरेशन, सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) अथवा व्यक्तिगत उद्यमियों द्वारा किया जा सके। इससे कृषि यंत्रों की उपलब्धता का मजबूत और व्यापक नेटवर्क विकसित होगा।
उन्होंने कहा कि कस्टम हायरिंग सेंटर का मूल उद्देश्य आधुनिक और महंगे कृषि यंत्रों को उन लघु एवं सीमांत किसानों तक किराये पर उपलब्ध कराना है, जो उन्हें व्यक्तिगत रूप से खरीदने में सक्षम नहीं हैं। इससे किसानों को कम लागत में आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा, कृषि कार्य समय पर पूरे होंगे तथा उत्पादन के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
श्रीमती मंजू राजपाल ने कहा कि विभाग केवल इन केंद्रों की स्थापना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनकी नियमित मॉनिटरिंग, पारदर्शी संचालन और प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करेगा। राज्य सरकार द्वारा कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों को कस्टम हायरिंग सेंटर और अधिक मजबूत बनाएंगे तथा प्रदेश के किसानों तक योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य विकसित राजस्थान के विजन के अनुरूप कृषि को अधिक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और किसान-केंद्रित बनाना है।
आयुक्त कृषि श्री नरेश कुमार गोयल ने कहा कि इस साझेदारी से राजस्थान के छोटे एवं सीमांत किसानों को कृषि यंत्रीकरण और डिजिटल सेवाएं अधिक आसानी से उपलब्ध होंगी। इससे ट्रैक्टर एवं उपकरण किराया इकोसिस्टम मजबूत होगा और राज्य में सतत कृषि विकास को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि टैफे – जेफ़ार्म सर्विसेज के साथ यह साझेदारी राजस्थान के हर किसान तक आधुनिक कृषि यंत्र पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल से कृषि यंत्रीकरण और डिजिटल सेवाओं को व्यापक रूप से अपनाया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में कृषि क्षेत्र को आधुनिक, टिकाऊ और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में 10 जुलाई को भी कृषि विभाग ने कुल 32 संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए थे। इनमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग (NIAM), 10 अग्रणी एग्रीटेक स्टार्टअप्स तथा 20 प्रतिष्ठित सिविल सोसाइटी संगठनों (CSOs) शामिल हैं। इन साझेदारियों का उद्देश्य प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, कृषि नवाचार, आधुनिक तकनीकों के प्रसार तथा किसानों की आय में सतत वृद्धि सुनिश्चित करना है।
इन सभी संगठनों द्वारा एक साझा मंच पर मिलकर कार्य किया जाएगा, जिससे प्रदेश के किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती का लाभ मिल सके। प्रत्येक तिमाही में सभी एमओयू से जुड़े संगठन कार्य प्रगति की समीक्षा करेंगे। जिला स्तर पर सेमिनार आयोजित होंगे, जिनमें जिला प्रशासन की अहम भागीदारी रहेगी।
इन समझौता ज्ञापनों का लाभ प्रदेश के किसानों को मिलेगा। किसानों को प्राकृतिक एवं जलवायु अनुकूल खेती की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे खेती की लागत घटेगी, उत्पादकता बढ़ेगी तथा मृदा स्वास्थ्य और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को तकनीकी सहायता, प्रमाणन, मूल्य संवर्धन और बेहतर विपणन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनकी आय बढ़ाने के नए अवसर विकसित होंगे। विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसान, महिला किसान, युवा किसान तथा जनजातीय क्षेत्रों के कृषकों को इन साझेदारियों का अधिक लाभ मिलेगा। प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्लॉट, किसान समूहों का गठन, तकनीकी मार्गदर्शन तथा स्थानीय स्तर पर सतत सहयोग के माध्यम से कृषि को अधिक व्यवहारिक और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
समारोह के दौरान आयुक्त उद्यानिकी श्रीमती श्वेता चौहान सहित कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी, टैफे के प्रतिनिधि तथा संयुक्त निदेशक कृषि जिला परिषद् वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

Pratahkal Bureau
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