राजस्थान में AI से बदलेगी खेती की तस्वीर, 13 जिलों के कृषि अधिकारियों को प्रशिक्षण
राजस्थान में कृषि अधिकारियों को AI प्रशिक्षण के साथ खेती और किसान सेवाओं को तकनीक से जोड़ने की तैयारी, 38 संगठनों के MoU से बढ़ेगा दायरा।

तस्वीर में पंत कृषि भवन में कृषि विभाग की कार्यशाला के दौरान उपस्थित अधिकारी नजर आ रहे हैं।
राजस्थान में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, नवाचार और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली से जोड़ने की दिशा में कृषि विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में 13 जिलों के कृषि अधिकारियों को Wadhwani Institute for Artificial Intelligence (Wadhwani AI) के विशेषज्ञों ने कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग, संभावनाओं और व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर प्रशिक्षण दिया। शुक्रवार को पंत कृषि भवन के सभागार में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में कृषि प्रशासन से लेकर किसान सेवाओं तक AI के इस्तेमाल की संभावनाओं पर प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य कृषि अधिकारियों को AI की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने के साथ कृषि प्रशासन, योजना निर्माण, निगरानी, निर्णय प्रक्रिया और किसान सेवाओं में इसके प्रभावी उपयोग की संभावनाओं को समझना है। विभाग का लक्ष्य AI को केवल तकनीकी प्रयोग तक सीमित न रखते हुए कृषि व्यवस्था और किसान सेवा वितरण का अभिन्न हिस्सा बनाना है।
कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने कहा कि कृषि क्षेत्र में AI की उपयोगिता विभागीय कार्यों तक सीमित नहीं है। किसानों तक इस तकनीक का प्रभावी हस्तांतरण आने वाले समय में कृषि को अधिक स्मार्ट, लाभकारी, टिकाऊ और जोखिम-रोधी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि बुवाई से लेकर कटाई और उपज के विपणन तक कृषि की पूरी वैल्यू चेन में AI आधारित तकनीकों का उपयोग किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है। मौसम आधारित कृषि सलाह, फसल की स्थिति का आकलन, कीट एवं रोगों की पहचान, उत्पादन पूर्वानुमान, सिंचाई एवं संसाधनों का बेहतर प्रबंधन तथा बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने में AI की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
AI एवं Data Analytics के माध्यम से कृषि, मौसम और फसल संबंधी बड़ी मात्रा में उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण कर किसानों को अधिक सटीक, स्थानीय और समयबद्ध सलाह उपलब्ध कराने की संभावनाएं विकसित की जा रही हैं। मौसम के पूर्वानुमान और खेत में फसल की वास्तविक स्थिति के आधार पर किसानों को बुवाई, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, कीट नियंत्रण और कटाई जैसे महत्वपूर्ण कृषि कार्यों के संबंध में समय पर निर्णय लेने में सहायता मिल सकेगी। इससे उत्पादन लागत को नियंत्रित करने, जोखिम कम करने और फसल उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इसी प्रकार, AI आधारित प्रणालियों के माध्यम से फसल की नियमित निगरानी, कीट एवं रोगों की शुरुआती पहचान तथा संभावित उत्पादन का आकलन अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में भी AI और आधुनिक डेटा आधारित तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। फसल की स्थिति और प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के आकलन में रिमोट सेंसिंग, इमेज एनालिटिक्स, ड्रोन एवं अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर फसल क्षति मूल्यांकन को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा सकेगा।
इससे फसल नुकसान के आकलन, दावों के निस्तारण और योजना की निगरानी में दक्षता बढ़ेगी तथा किसानों को बीमा योजना का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
राजस्थान कृषि विभाग AI को केवल प्रशिक्षण अथवा प्रायोगिक गतिविधियों तक सीमित न रखते हुए कृषि प्रशासन और किसान सेवा वितरण की व्यापक व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी कार्य कर रहा है। AI आधारित नवाचारों, परियोजनाओं और तकनीकी समाधानों के विकास, परीक्षण, उपयोग और विस्तार के लिए एक मजबूत Institutional Framework तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके माध्यम से कृषि विभाग, तकनीकी संस्थानों, विशेषज्ञों, शोध संगठनों और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।
यह संस्थागत व्यवस्था कृषि क्षेत्र की स्थानीय चुनौतियों के अनुरूप उपयोगी एवं व्यवहारिक तकनीकी समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
राजस्थान में Artificial Intelligence, Machine Learning और Data Analytics आधारित समाधानों को कृषि क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य किसानों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए नवाचारपूर्ण तकनीकी मॉडल विकसित करना तथा उन्हें खेत स्तर तक पहुंचाना है।
इसके अंतर्गत फसल एवं मौसम आधारित सलाह, कीट एवं रोगों की समयपूर्व पहचान, फसल उत्पादन एवं उपज का पूर्वानुमान, सिंचाई और कृषि संसाधनों का दक्ष उपयोग, फसल क्षति का त्वरित आकलन, कृषि योजनाओं की बेहतर निगरानी, बाजार एवं मूल्य संबंधी जानकारी और किसान शिकायतों एवं सेवाओं का समयबद्ध निस्तारण संबंधित क्षेत्रों में विशेष संभावनाएं हैं।
किसानों को कृषि योजनाओं एवं सेवाओं से जोड़ने वाले Raj Kisan Portal को भी AI आधारित तकनीकों से और अधिक सक्षम बनाया जाएगा। AI एवं Data Analytics के माध्यम से किसान की आवश्यकता, फसल, क्षेत्र और प्रोफाइल के अनुरूप योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जा सकेगी। इसके साथ ही आवेदन प्रक्रिया, सेवा वितरण, लंबित प्रकरणों और संभावित समस्याओं की पहचान में भी सहायता मिलेगी।
इससे One-to-One Farmer Service Delivery की दिशा में आगे बढ़ते हुए किसान को उसकी आवश्यकता के अनुसार लक्षित, त्वरित और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना संभव होगा।
विभाग का उद्देश्य AI का उपयोग केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि किसान को इस Technology-driven Transformation के केंद्र में रखना है। AI आधारित समाधानों के माध्यम से किसानों को फसल एवं मौसम संबंधी सलाह, कीट एवं रोगों की पहचान, कृषि समस्याओं का समाधान, योजनाओं की जानकारी और बाजार संबंधी आवश्यक सूचनाएं सरल, स्थानीय और समयबद्ध रूप में उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
तकनीकी समाधान तभी प्रभावी होंगे, जब वे किसान की भाषा, स्थानीय परिस्थितियों और वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप हों। इसलिए AI आधारित सेवाओं के साथ-साथ किसानों और ग्रामीण स्तर के कार्मिकों में डिजिटल जागरूकता एवं तकनीकी क्षमता निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कृषि अधिकारियों का AI प्रशिक्षण, AI in Agriculture के लिए संस्थागत ढांचे का विकास तथा RAJAIIMS और Raj Kisan Portal जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को AI एवं डेटा आधारित तकनीकों से जोड़ने के प्रयास राजस्थान की कृषि व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
इन पहलों से Technology + Data + AI + Good Governance पर आधारित मजबूत कृषि इकोसिस्टम विकसित होने की उम्मीद है। इससे कृषि प्रशासन की दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी तथा किसानों को अधिक स्मार्ट, त्वरित और जरूरत आधारित सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। विभाग का लक्ष्य है कि आधुनिक तकनीक और नवाचारों का अधिकतम उपयोग करते हुए कृषि प्रशासन को पारदर्शी, जवाबदेह, कुशल और किसान-केंद्रित बनाया जाए। AI आधारित तकनीकों का लाभ खेत से लेकर बाजार तक प्रत्येक किसान तक पहुंचाकर प्रदेश की कृषि को अधिक उत्पादक, प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार बनाया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में कृषि क्षेत्र को आधुनिक, टिकाऊ और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में कृषि विभाग ने कुल 38 संगठनों टैफे–जेफॉर्म सर्विसेज, मणिपाल यूनिवर्सिटी, वाधवानी एआई, श्री रामशान्ताय जैविक कृषि एवं प्रशिक्षण केंद्र, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग (NIAM) सहित 10 अग्रणी एग्रीटेक स्टार्टअप्स तथा 20 प्रतिष्ठित सिविल सोसाइटी संगठनों (CSOs) के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
इन समझौता ज्ञापनों से प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, कृषि नवाचार, आधुनिक तकनीकों के प्रसार तथा किसानों की आय में सतत वृद्धि के लिए मील का पत्थर साबित होने की उम्मीद है। ये सभी संगठन मिलकर एक मंच पर काम करेंगे, जिससे प्रदेश के किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती में लाभ मिल सकेगा। प्रत्येक तिमाही में सभी एमओयू संगठन मिलकर कार्य प्रगति पर चर्चा करेंगे। जिला स्तर पर जिला स्तरीय सेमिनार होगी, जिसमें जिला प्रशासन की अहम भागीदारी होगी।
इन समझौता ज्ञापनों का लाभ प्रदेश के किसानों को मिलेगा। किसानों को प्राकृतिक एवं जलवायु अनुकूल खेती की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे खेती की लागत घटेगी, उत्पादकता बढ़ेगी तथा मृदा स्वास्थ्य एवं जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने वाले किसानों को तकनीकी सहायता, प्रमाणन, मूल्य संवर्धन तथा बेहतर विपणन की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे उनकी आय बढ़ने के नए अवसर विकसित होंगे।
विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसान, महिला किसान, युवा किसान तथा जनजातीय क्षेत्रों के कृषकों को इन साझेदारियों का अधिक लाभ मिलेगा। प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्लॉट, किसान समूहों का गठन, तकनीकी मार्गदर्शन तथा स्थानीय स्तर पर सतत सहयोग के माध्यम से कृषि को अधिक व्यवहारिक एवं परिणामोन्मुख बनाया जाएगा।

