कृषि विभाग को मिली नई ऊर्जा: 157 सहायक कृषि अधिकारियों की नियुक्ति से सशक्त होगा किसान कल्याण का संकल्प
राजस्थान कृषि विभाग ने 157 सहायक कृषि अधिकारियों को नियुक्ति देकर किसानों की राह आसान कर दी है। युवाओं को मिला रोजगार और कृषि विस्तार सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती। क्या है सरकार की आगामी भर्ती योजनाओं का रोडमैप? जानिए पूरी खबर।

जयपुर, 24 जून। राजस्थान के कृषि परिदृश्य में आज एक नई और उत्साहजनक सुबह का सूत्रपात हुआ है, जहाँ राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए 157 युवाओं को सहायक कृषि अधिकारी (AAO) के रूप में नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। प्रदेश के किसानों तक सरकारी योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों की पहुँच को गति देने के उद्देश्य से उठाया गया यह कदम न केवल युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलता है, बल्कि कृषि विकास की नींव को भी और अधिक मजबूत बनाता है।
कृषि विभाग द्वारा आयोजित सीधी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से इन 157 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है, जिनमें से 142 अभ्यर्थी गैर-अनुसूचित क्षेत्र और 15 अभ्यर्थी अनुसूचित क्षेत्र से हैं। आधिकारिक आदेशों के अनुसार, इन नवचयनित अधिकारियों को दो वर्ष की परिवीक्षाधीन प्रशिक्षण अवधि (प्रोबेशनर-ट्रेनी) के अंतर्गत सेवाएँ देनी होंगी। यह नियुक्ति प्रक्रिया राज्य सरकार के उस संकल्प का हिस्सा है, जिसके तहत प्रदेश के शिक्षित युवाओं को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इस अवसर पर कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने बताया कि यह नियुक्तियां विभागीय कार्यक्षमता में वृद्धि करेंगी और राज्य की किसान-हितैषी नीतियों के धरातल पर क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाएंगी। उन्होंने आगे जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि सरकार रोजगार सृजन को लेकर पूरी तरह सजग है। विभाग द्वारा कृषि पर्यवेक्षक के 1100 पदों, सहायक कृषि अभियंता के 281, सहायक कृषि अधिकारी (2024) के 125, सांख्यिकी अधिकारी के 15, कृषि अनुसंधान अधिकारी के 25, सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी के 73 तथा प्रयोगशाला सहायक के 32 पदों पर भर्ती प्रक्रिया निरंतर गति से चल रही है, जिन्हें शीघ्र ही पूर्ण किया जाएगा।
इन नियुक्तियों का सीधा लाभ प्रदेश के अन्नदाताओं को मिलेगा। अब ये नवनियुक्त अधिकारी किसानों के बीच जाकर उन्हें उन्नत कृषि तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण बीजों के चयन, उर्वरकों के संतुलित प्रबंधन और फसल सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। इसके साथ ही, कृषि यंत्रीकरण और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे किसान तक पहुँचाना इनकी प्राथमिकता होगी। कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि इन अधिकारियों की जमीनी स्तर पर सक्रियता से राज्य में कृषि उत्पादन और उत्पादकता के नए कीर्तिमान स्थापित होंगे, जिससे किसानों की आय में सकारात्मक वृद्धि सुनिश्चित हो सकेगी।

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