चूरू-बीकानेर रेल मार्ग पर रेलवे की बड़ी छलांग: दुधवाखरा तक बिछी दोहरी लाइन, अब सरपट दौड़ेंगी ट्रेनें
उत्तर पश्चिम रेलवे ने रेवाड़ी-बीकानेर रेल मार्ग पर चूरू-दुधवाखरा के बीच 27.98 किमी लंबे रेल खंड का दोहरीकरण और ऑटो सिग्नलिंग कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री शशि किरण ने बताया कि इस उपलब्धि से ट्रेनों की गति बढ़ेगी और देरी कम होगी। मार्च 2026 तक सादुलपुर तक दोहरीकरण पूरा करने का लक्ष्य है, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

चूरू। उत्तर पश्चिम रेलवे ने बुनियादी ढांचे के विकास में एक मील का पत्थर गाड़ते हुए रेवाड़ी-बीकानेर रेल मार्ग पर चूरू से दुधवाखरा के बीच दोहरीकरण के चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। आधुनिक भारत की बदलती रेल व्यवस्था की झलक पेश करते हुए इस 27.98 किलोमीटर लंबे रेल खंड पर 24 जनवरी 2026 को ऑटो सिग्नलिंग प्रणाली के साथ परिचालन शुरू कर दिया गया। यह उपलब्धि न केवल तकनीकी कौशल का प्रमाण है, बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के नए युग का सूत्रपात भी है, जो आने वाले समय में मारवाड़ और शेखावाटी की आर्थिक रीढ़ को मजबूती प्रदान करेगा।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री शशि किरण ने इस परियोजना की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रेलवे पर इंफ्रास्ट्रक्चर के कार्यों को युद्धस्तर पर अंजाम दिया जा रहा है। रतनगढ़-सादुलपुर रेल मार्ग के बीच स्थित इस खंड के दोहरीकरण में इंजीनियरिंग की जटिलताओं को बड़ी कुशलता से सुलझाया गया है। रेल यात्रियों के सुखद और निर्बाध अनुभव को प्राथमिकता देते हुए इस कार्य के दौरान मार्ग में आने वाले सात प्रमुख कर्वों (मोड़ों) को सुधारा गया, जिसके परिणामस्वरूप दो स्थायी गति प्रतिबंधों को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया है। इतना ही नहीं, सुरक्षा मानकों को उच्चतम स्तर पर ले जाते हुए एक व्यस्त समपार (लेवल क्रॉसिंग) को भी हटा दिया गया है, जिससे अब ट्रेनों के साथ-साथ सड़क यातायात भी सुरक्षित और तेज होगा।
इस परियोजना की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चूरू-सादुलपुर खंड के दोहरीकरण को जनवरी 2024 में हरी झंडी मिली थी और महज दो वर्षों के भीतर इस खंड का 50 प्रतिशत कार्य धरातल पर उतार दिया गया है। रेलवे के इस संकल्पबद्ध प्रयास से अब दुधवाखरा से सादुलपुर के बीच शेष 50 प्रतिशत हिस्से को मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दोहरी लाइन और ऑटो सिग्नलिंग स्थापित होने से नेटवर्क की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी, जिससे ट्रेनों के घंटों देरी से चलने की समस्या का समाधान होगा। यात्री और माल ढुलाई सेवाओं के लिए अधिक गति, विश्वसनीयता और सुरक्षित यात्रा का यह नया मार्ग न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि स्थानीय व्यापार और उद्योग के लिए भी प्रगति के नए द्वार खोलेगा।

Pratahkal Bureau
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