रेलवन ऐप के 4.76 करोड़ डाउनलोड, रोजाना 10 लाख टिकट बुकिंग का रिकॉर्ड बना
रेलवन ऐप ने 4.76 करोड़ डाउनलोड का आंकड़ा पार कर लिया है और रोजाना औसतन 10 लाख टिकट बुक हो रहे हैं। उत्तर पश्चिम रेलवे में 14 प्रतिशत यात्री ऐप से टिकट ले रहे हैं, जबकि एनटीईएस रोज 6 करोड़ से अधिक पूछताछ संभालता है।

रेलवे के डिजिटल टिकटिंग सिस्टम को बड़ी उपलब्धि मिली है। 01 जुलाई, 2025 को लॉन्च किए गए रेलवन (RailOne) ऐप के डाउनलोड का आंकड़ा 4.76 करोड़ पार हो गया है, जबकि 02 अगस्त, 2026 तक इस ऐप के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 10 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं। उत्तर पश्चिम रेलवे पर कुल यात्राओं के लगभग 14 प्रतिशत यात्री रेलवन ऐप से अपना टिकट ले रहे हैं।
रेलवन ऐप को आरक्षित और अनारक्षित टिकटों की डिजिटल खरीद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था। यह यात्रियों को मोबाइल फोन पर आरक्षित और अनारक्षित टिकट बुक करने की सुविधा देता है। भारतीय रेलवे की सभी सार्वजनिक सेवाओं जैसे आरक्षित टिकट, अनारक्षित टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट, ट्रेन पूछताछ, पीएनआर पूछताछ और रेल सहायता को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है। इससे आरक्षण प्रणाली की सुविधा यात्रियों की उंगलियों पर आ गई है।
ऐप सिंगल-साइन-ऑन (एसएसओ) सुविधा के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को कई सेवाओं का लाभ उठाने में सक्षम बनाता है। इससे यात्रियों को रेलवे की कई अलग-अलग एप्लिकेशन डाउनलोड करने और कई पासवर्ड याद रखने की आवश्यकता नहीं रहती।
02 अगस्त, 2026 तक रेलवन ऐप के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 10 लाख टिकट बुक किए जा रहे थे। इनमें 2.79 लाख आरक्षित टिकट और 7.24 लाख अनारक्षित टिकट शामिल हैं। इसी अवधि तक ऐप के 4.76 करोड़ डाउनलोड दर्ज किए गए हैं।
रेलवे की डिजिटल यात्री सेवाओं में राष्ट्रीय रेल पूछताछ प्रणाली (एनटीईएस) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वर्ष 2000 में शुरू की गई एनटीईएस यात्रियों को लगभग वास्तविक समय में ट्रेनों की जानकारी उपलब्ध कराती है। इसमें ट्रेन के आगमन और प्रस्थान की स्थिति तथा ट्रेन कार्यक्रम की जानकारी शामिल है। यह जानकारी पूछताछ काउंटरों, एनटीईएस वेबसाइट, एंड्रॉइड और आईओएस मोबाइल एप्लिकेशन तथा राष्ट्रव्यापी रेल पूछताछ संख्या 139 के माध्यम से उपलब्ध है।
एनटीईएस की प्रमुख विशेषताओं में ‘अपनी ट्रेन ढूंढें’, ‘लाइव स्टेशन’, ‘ट्रेन कार्यक्रम’ और ‘स्टेशनों के बीच ट्रेनें’ शामिल हैं। इनके माध्यम से यात्री प्रामाणिक और विश्वसनीय जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। एनटीईएस मोबाइल एप्लिकेशन अक्टूबर 2014 में एंड्रॉइड और अक्टूबर 2015 में आईओएस के लिए लॉन्च किया गया था। 01 अगस्त, 2026 तक एंड्रॉइड पर इसके 4.5 करोड़ से अधिक और आईओएस पर 16 लाख से अधिक डाउनलोड दर्ज किए गए हैं।
एनटीईएस वर्तमान में लगभग 80,000 उपयोगकर्ताओं को संभालता है और प्रतिदिन 6 करोड़ से अधिक पूछताछों का निष्पादन करता है। यात्रियों द्वारा इसकी व्यापक रूप से सराहना की गई है।
राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ प्रणाली की शुरुआत के बाद यात्रियों को वेबसाइट, मोबाइल एप्लिकेशन और रेल पूछताछ संख्या 139 सहित कई डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से ट्रेनों के संचालन की सटीक और लगभग वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध हो रही है। इससे रेलवे पूछताछ काउंटरों पर जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हुई है। परिणामस्वरूप पूछताछ काउंटरों पर लगने वाली कतारें और प्रतीक्षा समय भी कम हुआ है।
ट्रेन रद्द होने की स्थिति में ऑनलाइन ई-टिकटिंग सिस्टम एनजीईटी (नेक्स्ट जेनरेशन ई-टिकटिंग) ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय के तुरंत बाद स्वतः ही रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर देता है। लागू रिफंड यात्री के बैंक खाते में जमा कर दिया जाता है। ट्रेन रद्द होने से संबंधित यह स्वचालित रिफंड सुविधा फिलहाल केवल ऑनलाइन बुक किए गए ई-टिकटों के लिए उपलब्ध है और काउंटर टिकटों के लिए उपलब्ध नहीं है। ऐसे मामलों में काउंटर टिकटधारक यात्री को निकटतम पीआरएस काउंटर पर जाना होगा।
रेलवन भारतीय रेलवे का आधिकारिक ऐप है, जो आईआर की सभी सार्वजनिक सेवाओं के लिए एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है। एक ही मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से आरक्षित, अनारक्षित और प्लेटफॉर्म टिकट बुकिंग, यात्रा योजना, ट्रेन की जानकारी, यात्री सहायता और संबद्ध रेलवे सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
रेलवे की ऑनलाइन टिकटिंग व्यवस्था में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में आरक्षित टिकटों में से लगभग 89 प्रतिशत ऑनलाइन बुक किए जाते हैं, जबकि 2013-14 में यह आंकड़ा लगभग 49 प्रतिशत था। काउंटर के अलावा अन्य माध्यमों से बुक किए गए अनारक्षित टिकटों की संख्या बढ़कर लगभग 39 प्रतिशत हो गई है।
केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना और प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी। रेलवन और एनटीईएस के आंकड़े रेलवे की टिकट बुकिंग और ट्रेन पूछताछ सेवाओं के बढ़ते डिजिटल उपयोग को दर्शाते हैं।

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