RailOne App ने बदली रेलवे टिकटिंग की तस्वीर, 4.55 करोड़ डाउनलोड के बीच 6.68 करोड़ फर्जी यूजर अकाउंट निष्क्रिय
RailOne App ने 4.55 करोड़ डाउनलोड का आंकड़ा पार किया। भारतीय रेलवे ने 6.68 करोड़ फर्जी यूजर अकाउंट निष्क्रिय किए और टिकटिंग सिस्टम की साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाया।

भारतीय रेलवे का एकीकृत यात्री सेवा मंच रेलवन ऐप (RailOne App) यात्रियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। 01 जुलाई 2025 को शुरू किए गए इस ऐप को अब तक 4.55 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है और इसके माध्यम से प्रतिदिन औसतन 9.65 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं। उत्तर पश्चिम रेलवे में पिछले 15 दिनों के दौरान 14 प्रतिशत यात्रियों ने इसी ऐप के जरिए टिकट बुक किए हैं। इसी के साथ भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन टिकटिंग प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी-रोधी उपाय लागू किए हैं, जिनके तहत 01 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 तक असामान्य मोबाइल नंबर, ईमेल डोमेन और आईपी एड्रेस के आधार पर 6.68 करोड़ से अधिक यूजर खातों को निष्क्रिय तथा 6.22 करोड़ से अधिक खातों को पुनः सत्यापन के विकल्प के साथ अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है।
रेलवन ऐप एंड्रॉइड प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर पर उपलब्ध है तथा यह यात्रियों को मोबाइल फोन पर आरक्षित और अनारक्षित दोनों प्रकार के टिकट बुक करने की सुविधा देता है। ऐप में आरक्षित टिकट बुकिंग, अनारक्षित टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट, ट्रेन पूछताछ, पीएनआर पूछताछ और रेलमदद सहित भारतीय रेलवे की सभी प्रमुख यात्री सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया गया है। यह यात्री आरक्षण प्रणाली की सुविधा को सीधे यात्रियों के मोबाइल तक पहुंचाता है। वर्तमान में इस ऐप के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 2.75 लाख आरक्षित और 6.89 लाख अनारक्षित टिकट बुक किए जा रहे हैं।
भारतीय रेलवे का शिकायत निवारण मंच ‘रेलमदद’ यात्रियों को शिकायत, सहायता और पूछताछ के लिए एकीकृत सुविधा उपलब्ध कराता है। यात्री हेल्पलाइन नंबर 139, रेलमदद वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और एसएमएस के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के लिए इसमें स्वचालित शिकायत आवंटन और ऑटो-एस्केलेशन प्रणाली लागू है। 30 से अधिक ट्रेन और स्टेशन श्रेणियों में शिकायतों तथा सहायता कॉलों का पंजीकरण किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान रेलमदद ने 6,94,368 मामलों में सहायता प्रदान की, जिनमें 89.49 प्रतिशत मामलों में उत्कृष्ट और संतोषजनक फीडबैक प्राप्त हुआ। पिछले तीन वर्षों में शिकायत निस्तारण की दर 2023-24 में 99.98 प्रतिशत, 2024-25 में 99.99 प्रतिशत और 2025-26 में 99.98 प्रतिशत रही।
भारतीय रेलवे ने स्पष्ट किया है कि उसकी आरक्षण टिकट बुकिंग प्रणाली उद्योग-मानक और अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा नियंत्रणों से सुरक्षित है। तत्काल टिकट बुकिंग में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए केवल आधार सत्यापित यात्रियों को ऑनलाइन तत्काल टिकट बुक करने की अनुमति दी गई है। इससे फर्जी या अनधिकृत एजेंटों द्वारा संचालित बहु-उपयोगकर्ता खातों पर रोक लगी है और तत्काल टिकटों के न्यायसंगत आवंटन में पारदर्शिता बढ़ी है। चुनिंदा ट्रेनों में ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग के लिए आधार आधारित वन-टाइम पासवर्ड (OTP) सत्यापन भी शुरू किया गया है ताकि दुरुपयोग रोका जा सके और बुकिंग प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष बन सके।
साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारतीय रेलवे ने एप्लिकेशन लेयर पर स्क्रिप्टिंग, ब्रूट-फोर्स अटैक और डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस (DDoS) हमलों से बचाव के कई सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। ओपन वेब एप्लिकेशन सिक्योरिटी प्रोजेक्ट (OWASP) से संबंधित सुरक्षा कमजोरियों से निपटने के लिए भी बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर स्तर पर पूरी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) संरचना को उच्च उपलब्धता मोड में स्थापित किया गया है ताकि विफलताओं को न्यूनतम रखा जा सके। नेटवर्क फायरवॉल, नेटवर्क घुसपैठ रोकथाम प्रणाली, एप्लिकेशन डिलीवरी कंट्रोलर और वेब एप्लिकेशन फायरवॉल जैसे डेटा सेंटर ग्रेड सुरक्षा उपकरणों के माध्यम से प्रणाली को सुरक्षित किया गया है। लगभग 30 Gbps क्षमता वाली DDoS डिटेक्शन एवं मिटिगेशन सेवाएं भी लागू हैं। इसके साथ ही एंटरप्राइज स्तर का कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (CDN), एंटी-बॉट, सुरक्षित DNS और वेब एप्लिकेशन फायरवॉल सेवाएं वेब ट्रैफिक को नियंत्रित करने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और साइबर खतरों को कम करने में सहायक हैं। व्यापक साइबर खतरे की निगरानी, डीप-डार्क वेब मॉनिटरिंग, डिजिटल जोखिम सुरक्षा और घटना प्रतिक्रिया के लिए विशेष एजेंसियों को भी शामिल किया गया है।
भौतिक सुरक्षा के तहत यह प्रणाली नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित कैप्टिव डेटा सेंटर में होस्ट की गई है, जहां सीसीटीवी निगरानी और अनधिकृत प्रवेश रोकने की व्यवस्था है। यह सुविधा ISO 27001 (सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली) प्रमाणित है। सुरक्षा घटनाओं की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए प्रणाली को CERT-In TSAP (थ्रेट एंड सिचुएशनल अवेयरनेस प्रोजेक्ट्स) से जोड़ा गया है तथा ऑन-प्रेमाइसेज सुरक्षा टीम लगातार सुरक्षा लॉग की निगरानी कर रही है।
धोखाधड़ी रोकने के लिए भारतीय रेलवे ने प्रशासनिक स्तर पर भी कई कदम उठाए हैं। यूजर अकाउंट्स का कड़ाई से पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन किया गया है। 01 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 के बीच 6.68 करोड़ से अधिक यूजर खातों को निष्क्रिय और 6.22 करोड़ से अधिक खातों को पुनः सत्यापन के विकल्प के साथ अस्थायी रूप से निलंबित किया गया। भारतीय रेलवे ने स्पष्ट किया कि IRCTC ने आधार लिंक न होने के कारण किसी भी यूजर अकाउंट को निष्क्रिय नहीं किया है। संदिग्ध यूजर आईडी की पहचान के लिए असामान्य मोबाइल नंबर, ईमेल डोमेन, आईपी एड्रेस सहित कई व्यापक मापदंड अपनाए जाते हैं। आरक्षण प्रणाली का नियमित सुरक्षा ऑडिट CERT-In द्वारा सूचीबद्ध सूचना सुरक्षा ऑडिट एजेंसियों से कराया जाता है, जबकि CERT-In और नेशनल क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (NCIIPC) टिकटिंग सिस्टम से जुड़े इंटरनेट ट्रैफिक की लगातार निगरानी करते हैं। वर्ष 2025-26 और 2026-27 (30 जून 2026 तक) के दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर संदिग्ध बुकिंग से जुड़ी 530 शिकायतें दर्ज की गईं तथा 13,343 संदिग्ध ईमेल डोमेन ब्लॉक किए गए। केवल आधार सत्यापित उपयोगकर्ताओं को ही तत्काल टिकट और एआरपी (अग्रिम आरक्षण अवधि) टिकट बुक करने की अनुमति दी गई है।
प्रणालीगत सुधारों के तहत भारतीय रेलवे ने NGeT (नेक्स्ट जनरेशन ई-टिकटिंग) वेबसाइट पर ट्रैफिक कम करने और प्रदर्शन बेहतर बनाने के लिए कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (CDN) लागू किया है। इसके साथ एंटी-बॉट तकनीक तैनात की गई है, जिससे औसतन 64 प्रतिशत तक दुर्भावनापूर्ण और संदिग्ध प्रयासों को कम करने में सफलता मिली है। यह तकनीक संदिग्ध ट्रैफिक कम करने, स्टेटिक सामग्री उपलब्ध कराने, प्रणाली पर भार घटाने और वास्तविक तथा सत्यापित उपयोगकर्ताओं के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद करती है।
पिछले पांच वर्षों यानी 2021 से 2025 तथा वर्ष 2026 के जून माह तक रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने 22,676 दलालों को गिरफ्तार कर रेलवे अधिनियम, 1989 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई की है। पिछले छह महीनों में ई-टिकटिंग प्रणाली तक पहुंचने के लिए किए गए फर्जी प्रयासों में जून 2026 में 19.12 अरब अनुरोधों में से 12.61 अरब बॉट (65.95 प्रतिशत), मई 2026 में 20.07 अरब में 12.08 अरब बॉट (60.18 प्रतिशत), अप्रैल 2026 में 17.33 अरब में 10.64 अरब बॉट (61.39 प्रतिशत), मार्च 2026 में 12.44 अरब में 5.71 अरब बॉट (45.90 प्रतिशत), फरवरी 2026 में 11.01 अरब में 5.01 अरब बॉट (45.50 प्रतिशत) तथा जनवरी 2026 में 12.35 अरब अनुरोधों में 7.26 अरब बॉट (58.78 प्रतिशत) प्रयासों को रोका गया। इन छह महीनों में औसतन 15.38 अरब अनुरोधों में से 8.88 अरब यानी 57.74 प्रतिशत बॉट ट्रैफिक रहा।
ऑनलाइन टिकटिंग पर लागू कड़े सुरक्षा उपायों के बाद जून 2025 से जून 2026 के बीच कुल 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक किए गए, जिनमें 57.90 करोड़ यानी 89 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन और 7.18 करोड़ यानी 11 प्रतिशत टिकट काउंटर के माध्यम से बुक हुए। भारतीय रेलवे का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य वास्तविक यात्रियों को सुरक्षित, पारदर्शी और निर्बाध टिकट बुकिंग सुविधा उपलब्ध कराना है। यह जानकारी लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने दी।

Pratahkal Bureau
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