राह-वीर योजना: ब्यावर में घायलों की मदद करने पर मिलेंगे 25 हजार रुपये
ब्यावर जिला कलेक्टर की समीक्षा बैठक में सीएमएचओ ने दी राह-वीर योजना की जानकारी, गोल्डन ऑवर में सहायता करने वाले नेक नागरिकों को मिलेगी कानूनी सुरक्षा।

सड़क हादसों में घायल होने वाले लोगों की जिंदगी बचाने और मददगारों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने एक बेहद संवेदनशील पहल की है। ब्यावर में जिला कलेक्टर कमल राम मीना की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. संजय गहलोत ने राह-वीर (गुड सेमेरिटन) योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के लिए बिना किसी डर के आगे आएं। इस योजना के तहत गोल्डन ऑवर में घायल की जान बचाने वाले नेक नागरिक को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
डॉ. संजय गहलोत ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद का पहला घंटा, जिसे "गोल्डन ऑवर" कहा जाता है, किसी भी घायल व्यक्ति का जीवन बचाने के लिए सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समय होता है। इस निर्णायक समय के दौरान यदि पीड़ित को बिना वक्त गंवाए अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो उसके जीवित बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। देश में अक्सर लोग पुलिसिया कार्रवाई, अस्पताल की जटिल औपचारिकताओं और अदालती चक्करों के डर से घायलों की मदद करने से कतराते हैं, जिससे समय पर इलाज न मिलने के कारण कई लोग दम तोड़ देते हैं। इसी डर को दूर करने के लिए कानून पूरी तरह से मददगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
इस मानवीय पहल के कानूनी पहलुओं को स्पष्ट करते हुए सीएमएचओ ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 134ए के तहत वर्ष 2020 में गुड समैरिटन नियम अधिसूचित किए गए थे। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य दुर्घटना पीड़ितों की निस्वार्थ सहायता करने वाले व्यक्तियों को मजबूत कानूनी संरक्षण प्रदान करना और उन्हें समाज में प्रोत्साहित करना है। कानूनन, दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले नेक नागरिक को किसी भी प्रकार की कानूनी परेशानी, अनावश्यक पूछताछ अथवा पुलिस हिरासत का सामना नहीं करना पड़ेगा। अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और न ही उसे गवाह बनने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
योजना की सरलता और गोपनीयता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि राह-वीर बनने के लिए किसी विशेष चिकित्सा प्रशिक्षण या महंगे उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि मानवता के नाते समय पर दिखाई गई संवेदनशीलता ही सबसे बड़ा योगदान है। पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को वहां से यह आधिकारिक प्रमाण पत्र प्राप्त करने का अधिकार है कि उसने घायल को उपचार के लिए पहुंचाया है। मददगार व्यक्ति चाहे तो पूरी तरह गुमनाम रह सकता है। उसे घायल के इलाज का कोई खर्च वहन नहीं करना होगा और मरीज को अस्पताल में भर्ती करवाने के तुरंत बाद वह अपनी इच्छानुसार वहां से स्वतंत्र रूप से जा सकता है।
देश में सड़क दुर्घटनाओं के भयावह आंकड़ों पर चिंता व्यक्त करते हुए बैठक में बताया गया कि भारत में सड़क हादसों की संख्या लगातार गंभीर विषय बनी हुई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, इन सड़क दुर्घटनाओं के कारण देश को अपनी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग तीन प्रतिशत तक भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
डॉ. गहलोत ने आमजन से भावुक अपील करते हुए कहा कि सड़क पर दुर्घटना दिखाई देने पर घबराने या उसे अनदेखा करके आगे बढ़ जाने के बजाय अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं और घायल को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग करें। किसी की जान बचाने के लिए डॉक्टर होना जरूरी नहीं है, बल्कि एक संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक होना आवश्यक है। राह-वीर योजना केवल एक सरकारी योजना मात्र नहीं है, बल्कि यह समाज में साहस, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का एक ऐसा जीवंत प्रतीक है जो मानवता और आपसी सहयोग की भावना को नई मजबूती प्रदान करता है।

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