नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन के गलियारे आज एक ऐतिहासिक परिवर्तन के साक्षी बने, जहाँ परंपरा और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिला। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक विशेष समारोह के दौरान देश के छात्रों और जनप्रतिनिधियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सर्टिफिकेट प्रदान कर एक नए युग की शुरुआत की। यह आयोजन केवल प्रमाण पत्र वितरण तक सीमित नहीं था, बल्कि राष्ट्रपति द्वारा घोषित ‘#SkillTheNation चैलेंज’ के माध्यम से एक डिजिटल रूप से सशक्त और समावेशी राष्ट्र निर्माण के संकल्प की गूँज थी। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि एआई अब केवल एक तकनीकी शब्द नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं और सार्वजनिक प्रणालियों को पुनर्गठित करने वाली एक क्रांतिकारी शक्ति है।

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि एआई विश्व स्तर पर समाजों को तीव्र गति से बदल रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत जैसे युवा और आकांक्षी देश के लिए यह तकनीक विकास को गति देने, सार्वजनिक सेवाओं में अभूतपूर्व सुधार लाने और प्रत्येक नागरिक को सशक्त बनाने का एक स्वर्णिम अवसर है। राष्ट्रपति के विजन को साझा करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी नवाचार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने पहले ही यूपीआई और सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे (डीपीआई) के माध्यम से अपनी वैश्विक धाक जमा ली है और अब समय आ गया है कि हमारी नई पीढ़ी 'एआई-संचालित' होकर भविष्य की चुनौतियों का नेतृत्व करे।

इस परिवर्तनकारी यात्रा की सफलता के आंकड़ों को साझा करते हुए कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयन्त चौधरी ने एआई की सुलभता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि जुलाई 2025 में लॉन्च किए गए 'SOAR' कार्यक्रम ने एआई के जटिल मिथकों को तोड़कर इसे हर वर्ग के लिए सरल बनाया है। महज छह महीनों के भीतर 1.59 लाख नामांकनों का आंकड़ा यह सिद्ध करता है कि भारतीय युवा इस आधुनिक तकनीक को अपनाने के लिए कितने उत्सुक हैं। उनके अनुसार, एआई अब भविष्य की बात नहीं, बल्कि हमारे वर्तमान का हिस्सा बन चुका है।

इस गौरवशाली अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए 15 माननीय संसद सदस्यों के साथ-साथ दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के पीएम श्री स्कूलों, केंद्रीय विद्यालयों और जवाहर नवोदय विद्यालयों के 17 मेधावी छात्रों ने अपने प्रमाण पत्र प्राप्त किए। यह क्षण देश की लोकतांत्रिक शक्ति और युवा मेधा के एक साथ तकनीकी कौशल से लैस होने का प्रतीक बना। यह पहल न केवल शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में एक मील का पत्थर है, बल्कि यह इस बात की भी पुष्टि करती है कि भारत एआई के इस वैश्विक दौर में पीछे रहने के बजाय दुनिया का मार्गदर्शन करने के लिए तैयार है।

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Pratahkal Newsroom

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