धौलपुर, राजस्थान के प्रदीप शर्मा (तटरक्षक) ने किया अपने परिवार और गांव का नाम रोशन। जिला धौलपुर (राजस्थान) निवासी प्रदीप शर्मा –पिता – राजेंद्र शर्मा, शर्मा कॉलोनी, सरमथुरा रोड, बाड़ी के सहायक इंजीनियर (ए आर), 08962-T, वर्तमान में तटरक्षक जिला मुख्यालय संख्या-5, चेन्नई गोताखोरी विभाग में तैनात है।


भीषण समुद्री दुर्घटना: 100 फीट गहरे पानी में गिरा ट्रक

अपनी जान की परवाह किए बिना देश और अपनी ड्यूटी को प्राथमिकता देते हुए 07 फरवरी 2026 की सुबह चेन्नई बंदरगाह के कोस्टल बर्थ–1 पर एक गंभीर समुद्री दुर्घटना घटित हुई, जब कंटेनर लॉरी (TN 28 A 17605) संतुलन खोकर समुद्र में जा गिरी। रिपोर्ट के अनुसार 35 वर्षीय चालक मुथु मरियप्पन, निवासी तूतीकोरिन जिला, कंटेनर उतारने के बाद बंदरगाह परिसर से बाहर निकल रहे थे। इसी दौरान वाहन अनजाने में प्रतिबंधित एवं अनधिकृत क्षेत्र में प्रवेश कर गया। और ट्रक का अगला केबिन अलग होकर लगभग 100 फीट गहरे समुद्र में गिर गया, जिससे चालक अंदर ही फंस गया।


मुख्य गोताखोर प्रदीप शर्मा के नेतृत्व में रेस्क्यू ऑपरेशन

बंदरगाह पुलिस ने तत्काल तटरक्षक मुख्यालय को सूचित किया और बिना किसी देरी के व्यापक बचाव अभियान शुरू किया गया। इस अभियान का नेतृत्व मुख्य गोताखोर प्रदीप शर्मा, सहायक इंजीनियर (ए आर), 08962-T ने किया। वे वर्तमान में जिला मुख्यालय–5 के गोताखोर दल में कार्यरत हैं और उच्च जोखिम वाले अभियानों में अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए विख्यात हैं।

  • मुख्य गोताखोर प्रदीप शर्मा के नेतृत्व में सहायक इंजीनियर (ए आर), 08962-T, जान जोखिम में डालकर साहसिक सर्च अभियान चलाया, पहले भी ऐसे उत्कृष्ट सेवाएं दे चुके हैं।
  • उल्लेखनीय है कि पहले भी उन्होंने 18 दिसम्बर 24 दिन-रात्रि गोताखोरी अभियान कर जवाहर डॉक चेन्नई में समुद्र गिरे कार को कठिन अभियान चलाकर, एक व्यक्ति की जान बचाई थी और कार और चालक का शव बरामद किया था।

शून्य दृश्यता और जानलेवा चुनौतियां

वर्तमान इस अभियान के दौरान बर्थ के नीचे जल का वातावरण अत्यंत शत्रुतापूर्ण और चुनौतीपूर्ण था। भारी गाद की मोटी परतों के कारण दृश्यता लगभग शून्य हो गई थी, जिससे गोताखोर पूर्ण अंधकार में कार्य कर रहे थे। तीव्र जलधाराएँ लगातार संतुलन बिगाड़ रही थीं, जबकि जल के भीतर मौजूद धातु संरचनाएँ और मलबा उलझने का निरंतर खतरा उत्पन्न कर रहे थे। लगभग 100 फीट की गहराई पर जलदाब और अनिश्चित परिस्थितियों ने जोखिम को और अधिक बढ़ा दिया।

यह अभियान कठिन ओर अत्यंत जानलेवा था। प्रत्येक गोताखोरी के साथ ऑक्सीजन संबंधी जटिलताओं, उपकरण विफलता अथवा मलबे में फँसने का गंभीर खतरा बना हुआ था। इन सभी अत्यधिक खतरों के बावजूद, मुख्य गोताखोर प्रदीप शर्मा, सहायक इंजीनियर (ए आर) ने अद्वितीय साहस, लौह-संकल्प और उत्कृष्ट तकनीकी दक्षता का परिचय दिया।


5 घंटे का संघर्ष और परिणाम

उन्होंने डूबे हुए ट्रेलर ट्रक के नीचे सही उठान बिंदुओं की पहचान की, जिससे क्रेन को सुरक्षित और स्थिर पकड़ मिल सके। लगभग पाँच घंटे तक चले निरंतर और उच्च जोखिम वाले प्रयासों के बाद, क्रेन की सहायता से ट्रेलर ट्रक को सफलतापूर्वक समुद्र से बाहर निकाला गया। दुर्भाग्यवश चालक को बचाया नहीं जा सका।

यह मिशन तटरक्षक गोताखोर दल की उच्च स्तरीय तैयारी, परिचालन उत्कृष्टता और अटूट कर्तव्यनिष्ठा का सशक्त प्रमाण है। अत्यंत प्रतिकूल एवं जीवन-घातक परिस्थितियों में मुख्य गोताखोर प्रदीप शर्मा, सहायक इंजीनियर (ए आर) द्वारा प्रदर्शित असाधारण वीरता, त्याग और समर्पण का सर्वोच्च सम्मान अपने माता पिता और गुरुजनों को दिया है।

Pratahkal Bureau

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