जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी ने कांग्रेस द्वारा मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों को सिरे से खारिज करते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस की राजनीति अब केवल झूठ, फरेब और नौटंकी के सहारे टिकी रह गई है। जनता द्वारा पूरी तरह नकारी जा चुकी यह पार्टी अब आधारहीन मुद्दों पर बेतुकी बयानबाजी कर अपना अस्तित्व बचाने की कोशिश कर रही है। बगड़ी ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस का जनाधार खत्म हो चुका है, इसलिए वह संवैधानिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाकर भ्रम फैलाने का काम कर रही है।

श्रवण सिंह बगड़ी ने मतदाता सूची की शुचिता पर उठ रहे विवादों का जवाब देते हुए कहा कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ना या हटाना पूरी तरह से निर्वाचन आयोग का विशेषाधिकार है। उन्होंने कानूनी प्रक्रिया का हवाला देते हुए बताया कि मृत व्यक्तियों, दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं और बाहरी लोगों के नाम हटाने की एक तय प्रक्रिया है, जिसमें सभी राजनीतिक दलों के बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) की सहभागिता होती है। बगड़ी ने सवाल उठाया कि यदि निर्वाचन आयोग नियमों के तहत किसी फॉर्म की जांच करता है या उसे निरस्त करता है, तो कांग्रेस को इससे परेशानी क्यों हो रही है? उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग ही अंतिम रूप से तय करता है कि कौन सा आवेदन सही है और कौन सा अधूरा।

जयपुर के स्थानीय हालातों पर चर्चा करते हुए भाजपा महामंत्री ने एक चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा। उन्होंने कहा कि शहर में ऐसे कई घर चिन्हित किए गए हैं, जिनका क्षेत्रफल अत्यंत कम है, लेकिन वहां एक ही पते पर 200 से 300 मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। जब इन संदिग्ध प्रविष्टियों पर आपत्तियां आती हैं और आयोग जांच करता है, तो कांग्रेस में खलबली मच जाती है। बगड़ी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का रोहिंग्याओं, बांग्लादेशियों और अवैध प्रवासियों के प्रति मोह जगजाहिर है, इसलिए नियमानुसार कार्रवाई होने पर उन्हें 'पेट में दर्द' होने लगता है। उन्होंने तंज कसा कि कांग्रेस जहां चुनाव जीतती है, वहां मौन रहती है, लेकिन हारते ही ईवीएम और निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर देती है।

लेख के अंत में श्रवण सिंह बगड़ी ने कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर खुद कांग्रेस के कार्यकर्ता ही आपसी रंजिश के चलते एक-दूसरे के समर्थकों के नाम हटवाना चाहते हैं, लेकिन इसका दोष भाजपा पर मढ़कर ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। राहुल गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश और विदेश में संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना अब कांग्रेस की संस्कृति बन चुकी है। जयपुर से उठी यह सियासी गूँज बता रही है कि आने वाले समय में मतदाता सूची और प्रवासियों का मुद्दा राजस्थान की राजनीति में और अधिक गहराने वाला है।

Pratahkal Bureau

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