राजस्थान में पीएम स्वनिधि योजना कैसे बदल रही है लाखों स्ट्रीट वेंडर्स की तकदीर? ऋण वितरण से लेकर डिजिटल सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा तक, क्या है इस आर्थिक बदलाव की पूरी कहानी? जानिए कैसे आत्मनिर्भर बन रहा है राजस्थान का हर छोटा व्यापारी।

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में राजस्थान में प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना रेहड़ी-पटरी और फुटपाथ विक्रेताओं के जीवन में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आई है। यह योजना न केवल इन छोटे कारोबारियों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़कर आर्थिक संबल प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें स्वावलंबी बनाकर सम्मानजनक जीवन जीने का आधार भी दे रही है। प्रदेश में यह योजना शहरी अर्थव्यवस्था के उन नींव के पत्थरों के लिए संजीवनी साबित हो रही है, जो अब तक ऊंची ब्याज दरों वाले साहूकारों के चक्रव्यूह में फंसे थे।

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम यह है कि राजस्थान में अब तक 3 लाख 62 हजार 565 पात्र आवेदकों में से 3 लाख 6 हजार 255 लाभार्थियों को 439 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया है। इनमें से 3 लाख से अधिक लाभार्थियों के खातों में 428 करोड़ 93 लाख रुपये से अधिक की ऋण राशि का हस्तांतरण सुनिश्चित किया जा चुका है। इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के 1 लाख 64 हजार से अधिक लाभार्थियों ने समय पर ऋण चुकाकर वित्तीय अनुशासन का एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। लाभार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सब्सिडी के रूप में 6 करोड़ 57 लाख रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके खातों में पहुंचाई गई है।

डिजिटल समावेशन की दिशा में भी राजस्थान ने उल्लेखनीय प्रगति की है। योजना के अंतर्गत डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए लाभार्थियों को 1,600 रुपये तक का कैशबैक दिया जा रहा है। अब तक 2 लाख 26 हजार से अधिक लाभार्थियों को 10 करोड़ रुपये से अधिक का कैशबैक लाभ प्रदान किया गया है, जिससे छोटे व्यापारी आधुनिक वित्तीय व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बन रहे हैं। इसके साथ ही, 'स्वनिधि से समृद्धि' पहल के तहत इन परिवारों को स्वास्थ्य, आवास और सामाजिक सुरक्षा जैसी केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान किया जा रहा है।

सामाजिक समावेशिता की दृष्टि से यह योजना एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है, जिसमें 34 प्रतिशत महिला लाभार्थी और लगभग 70 प्रतिशत अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं वंचित समुदायों के लोग शामिल हैं। अध्ययनों में यह स्पष्ट हुआ है कि इस योजना से लाभार्थियों की वार्षिक आय में औसतन 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। केंद्र सरकार द्वारा इस योजना की अवधि मार्च 2030 तक बढ़ाए जाने से राजस्थान में आने वाले समय में स्वरोजगार और वित्तीय सशक्तिकरण का दायरा और अधिक विस्तृत होगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश का यह प्रयास न केवल विकसित राजस्थान की नींव को सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि लाखों मेहनतकश परिवारों के सपनों को नई उड़ान भी दे रहा है।

Pratahkal Newsroom

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