राज्य सरकार ने किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूल मौसम से होने वाले फसल नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को खरीफ 2026 एवं रबी 2026-27 के लिए प्रदेश में लागू कर दिया है। योजना के तहत राज्य के पूर्व के 41 जिलों में 25 फसलों को बीमा कवरेज में शामिल किया गया है। किसानों के लिए फसल बीमा पूरी तरह स्वैच्छिक रखा गया है।

जयपुर, 27 जुलाई। भारत सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की परिचालन मार्गदर्शिका-2023, समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों तथा राज्य स्तरीय समन्वय समिति फसल बीमा की बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार जारी अधिसूचना के तहत योजना का क्रियान्वयन राज्य के पूर्व के 41 जिलों के आधार पर किया जाएगा।

योजना के तहत खरीफ मौसम में बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंग, मोठ, ग्वार, चंवला, उड़द, अरहर, सोयाबीन, तिल, धान, कपास एवं मूंगफली सहित 14 फसलों को अधिसूचित किया गया है। वहीं रबी मौसम में गेहूं, जौ, चना, सरसों, तारामीरा, जीरा, धनिया, ईसबगोल, मेथी, रबी मक्का एवं मसूर सहित 11 फसलों को बीमा कवरेज में शामिल किया गया है। इन सभी फसलों के लिए बीमा इकाई क्षेत्र तहसील एवं पटवार मंडल निर्धारित किया गया है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत ऋणी, गैर-ऋणी एवं पात्र बंटाईदार किसान अपनी अधिसूचित फसलों का बीमा करा सकेंगे। योजना में शामिल होना किसानों के लिए पूरी तरह स्वैच्छिक है। ऋणी किसान यदि योजना से बाहर रहना चाहते हैं तो उन्हें खरीफ के लिए 24 जुलाई तथा रबी के लिए 24 दिसंबर तक संबंधित वित्तीय संस्था में निर्धारित घोषणा-पत्र प्रस्तुत करना होगा। घोषणा-पत्र प्रस्तुत नहीं करने पर उन्हें योजना में सम्मिलित माना जाएगा।

गैर-ऋणी किसान खरीफ फसलों के लिए 31 जुलाई 2026 तथा रबी फसलों के लिए 31 दिसंबर 2026 तक नजदीकी बैंक शाखा, केन्द्रीय सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, वाणिज्यिक बैंक, डाकघर अथवा सीएससी के माध्यम से फसल बीमा करा सकेंगे। इसके अलावा अधिकृत बीमा एजेंट/मध्यस्थ तथा राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल के माध्यम से भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत बीमा कराया जा सकेगा।

योजना के तहत किसानों को सीमित प्रीमियम का भुगतान करना होगा। खरीफ फसलों के लिए बीमित राशि का अधिकतम 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत तथा वार्षिक वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम किसान द्वारा वहन किया जाएगा। निर्धारित सीमा से अधिक प्रीमियम राशि का भार केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा नियमानुसार वहन किया जाएगा।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कम वर्षा एवं प्रतिकूल मौसम के कारण बाधित अथवा निष्फल बुवाई, खड़ी फसल में सूखा, लंबी सूखा अवधि, बाढ़, जलप्लावन, कीट एवं रोग, भूस्खलन, बिजली गिरने से प्राकृतिक आग, तूफान, ओलावृष्टि एवं चक्रवात से होने वाले नुकसान को बीमा सुरक्षा प्रदान की गई है।

फसल कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए काटकर रखी गई फसल को चक्रवात, चक्रवाती वर्षा, असामयिक वर्षा एवं ओलावृष्टि से होने वाले नुकसान के लिए भी अधिकतम 14 दिवस तक व्यक्तिगत आधार पर बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी।

फसल कटाई उपरांत नुकसान की स्थिति में प्रभावित किसान को घटना के 72 घंटे के भीतर कृषि रक्षक पोर्टल, हेल्पलाइन 14447, Crop Insurance App अथवा लिखित रूप में संबंधित बैंक या कृषि विभाग के अधिकारियों को सूचना देनी होगी। निर्धारित समय में सूचना नहीं दे पाने की स्थिति में किसान को अधिकतम सात दिवस के भीतर निर्धारित प्रपत्र में बीमा कंपनी को पूर्ण सूचना उपलब्ध करानी होगी।

खरीफ मौसम में कम वर्षा अथवा प्रतिकूल मौसम के कारण यदि किसी अधिसूचित इकाई क्षेत्र में प्रमुख फसल के 75 प्रतिशत या अधिक क्षेत्र में किसान बुवाई नहीं कर पाते हैं अथवा बाधित/निष्फल बुवाई की स्थिति उत्पन्न होती है, तो योजना प्रावधानों के अनुसार पात्र किसानों को बीमित राशि के 25 प्रतिशत तक क्षतिपूर्ति देय होगी। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित समय-सीमा में अधिसूचना जारी करना आवश्यक होगा।

राज्य में तकनीक आधारित फसल उपज आकलन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की YES-TECH (Yield Estimation System Through Technology) गाइडलाइन के अनुरूप 5,000 हेक्टेयर से अधिक बुवाई क्षेत्र वाले जिलों में गेहूं एवं सोयाबीन के लिए फसल कटाई प्रयोगों से प्राप्त उपज को 50 प्रतिशत तथा तकनीकी उपज को 50 प्रतिशत भार देकर उपज का आकलन किया जाएगा। इससे फसल बीमा दावों के निर्धारण में आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक आंकड़ों का उपयोग सुनिश्चित होगा।

बीमा इकाई की गारंटी उपज निर्धारित करने के लिए वर्ष 2018-19 से 2024-25 तक के सात वर्षों में से श्रेष्ठ पांच वर्षों की औसत उपज को आधार बनाया गया है। इस औसत उपज को निर्धारित 80 प्रतिशत जोखिम स्तर से गुणा कर गारंटी उपज तय की गई है। गारंटी उपज संपूर्ण अनुबंध अवधि में समान रहेगी।

फसल बीमा दावों की गणना के लिए निर्धारित संख्या में फसल कटाई प्रयोग CCE Agri App के माध्यम से ऑनलाइन किए जाएंगे। पटवार मंडल स्तर पर प्रत्येक अधिसूचित फसल के लिए 4 तथा तहसील स्तर पर प्रत्येक अधिसूचित फसल के लिए न्यूनतम 16 फसल कटाई प्रयोग कराए जाएंगे। प्राप्त वास्तविक औसत उपज यदि गारंटी उपज से कम रहती है तो योजना के प्रावधानों के अनुसार पात्र बीमित किसानों को उपज में कमी के अनुपात में बीमा क्षतिपूर्ति दी जाएगी।

राज्य के 41 जिलों को 8 क्लस्टरों में विभाजित कर चयनित बीमा कंपनियों को योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड तथा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड शामिल हैं। संबंधित बीमा कंपनियां किसानों के बीमा दावों के आकलन एवं भुगतान के लिए योजना के निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार जिम्मेदार होंगी।

व्यापक फसल क्षति के मामलों में भारत सरकार एवं राज्य सरकार से प्रीमियम अनुदान प्राप्त होने के बाद नियमानुसार अधिकतम तीन सप्ताह में पात्र किसानों के बीमा क्लेम की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी। फसल कटाई उपरांत नुकसान के मामलों में संयुक्त समिति द्वारा क्षति आकलन रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार 15 दिवस के भीतर दावा राशि का भुगतान किया जाएगा।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी अधिसूचित फसलों का बीमा निर्धारित अंतिम तिथि से पहले अवश्य कराएं। बीमा करवाते समय भूमि, फसल, बैंक खाता, आधार एवं एग्रीस्टैक आईडी सहित सभी आवश्यक दस्तावेज सही एवं पूर्ण रूप से उपलब्ध कराने होंगे। किसान फसल बीमा पॉलिसी एवं आवेदन की जानकारी सुरक्षित रखें तथा फसल नुकसान होने की स्थिति में निर्धारित 72 घंटे की समय-सीमा में सूचना देकर योजना का लाभ उठा सकेंगे।

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