जयपुर, 17 जनवरी। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आज पेंशनरों के स्वाभिमान और अधिकारों की एक नई इबारत लिखी गई। राजस्थान पेंशनर समाज के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रदेश कार्यकारिणी एवं जिलाध्यक्षों की संयुक्त बैठक में आक्रोश और संकल्प का एक अनूठा संगम देखने को मिला। सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष शंकर सिंह मनोहर ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि पे कमीशन में पेंशनरों की उपेक्षा को अब किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रदेश भर से आए प्रतिनिधियों में जोश भरते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब हम अपनी एकजुटता की ताकत को न केवल राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाएंगे। पेंशनरों की अनदेखी करने वाली व्यवस्थाओं को अब उनके संगठित विरोध का सामना करना होगा।

इस महत्वपूर्ण बैठक की रणनीतिक जानकारी साझा करते हुए प्रदेश महामंत्री श्री किशन शर्मा ने बताया कि राजस्थान पेंशनर समाज बहुत जल्द एक ऐतिहासिक और व्यापक स्तर का प्रदेश स्तरीय अधिवेशन आयोजित करने जा रहा है। इस महाकुंभ में प्रदेश के कोने-कोने से लगभग 50 हजार पेंशनर जयपुर की धरती पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। यह अधिवेशन केवल एक बैठक नहीं बल्कि पेंशनरों के अधिकारों का घोषणापत्र होगा। इसी गरिमामयी अवसर पर पेंशनरों के अधिकारों की कानूनी लड़ाई के महानायक और 'पेंशनर मसीहा' के रूप में विख्यात श्री डी.एस. नकारा की मूर्ति का अनावरण भी किया जाएगा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष और न्याय का प्रतीक बनेगी।





बैठक में प्रदेश के सभी जिलों से आए जिलाध्यक्षों ने अपनी जमीनी समस्याओं और भावी रणनीति पर विचार-विमर्श किया। संगठन की मजबूती और आंदोलन की रूपरेखा तय करने में प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष सर्व श्री रमेश गुप्ता, डोरी लाल शर्मा, अशोक सिंह चंदेल, ओम प्रकाश शर्मा, सुरेश पाडा, प्रदेश महामंत्री किशन शर्मा और संयुक्त महामंत्री जी.के. मीणा ने भी अपनी ओजस्वी वाणी से कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। सभी वक्ताओं का स्वर एक था कि पेंशनर समाज अपने सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।

कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाने के लिए प्रदेश संरक्षक श्री गुलाबचंद जैन, प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री देवी राम गुप्ता और प्रदेश संभागीय मंत्री बाँसवाड़ा श्री नारायण सिंह भाटी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सेवानिवृत्त कर्मचारी समाज का अनुभव स्तंभ हैं और उनकी आर्थिक सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजस्थान का पेंशनर समाज अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है और आगामी अधिवेशन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

Pratahkal Bureau

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