गुप्त वृंदावन धाम में पानीहाटी दही चिड़ा महोत्सव का भव्य आयोजन
जयपुर में आयोजित इस उत्सव के दौरान श्री श्री कृष्ण-बलराम का 1100 किलो फलों से विशेष फल-अलंकार किया गया और भक्तों ने संकीर्तन किया।

तस्वीर में दिख रही श्रद्धालुओं की भीड़ गुप्त वृंदावन धाम परिसर में दोनों हाथ उठाकर संकीर्तन और प्रार्थना कर रही है।
गुप्त वृंदावन धाम में शनिवार को पानीहाटी दही चिड़ा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और भव्यता के साथ मनाया गया। इस दिव्य आयोजन के दर्शन और भगवान के आशीर्वाद के लिए पूरे जयपुर से लाखों श्रद्धालु धाम पहुंचे। महोत्सव के दौरान श्री श्री कृष्ण-बलराम ने 500 किलो पुष्प-पंखुड़ियों से सजे दिव्य कुंड में जल-विहार किया, जबकि संपूर्ण आयोजन धार्मिक उल्लास और संकीर्तन से गूंज उठा।
महोत्सव के अवसर पर श्री श्री कृष्ण-बलराम का 1100 किलो फलों से विशेष फल-अलंकार किया गया। भक्तों ने भव्य पालकी उत्सव में संकीर्तन करते हुए नृत्य किया। वहीं, श्री श्री गौर-निताई (कृष्ण-बलराम) का फलों के रस और पुष्पों से महाअभिषेक संपन्न हुआ। दही चिड़ा उत्सव पर भगवान श्री श्री कृष्ण-बलराम ने 15 प्रकार के सूखे मेवों से निर्मित विशेष पौशाक धारण की, जिसे 551 घंटों में तैयार किया गया।
पानीहाटी दही चिड़ा महोत्सव के दौरान 30,000 लीटर दिव्य जल से श्री श्री कृष्ण-बलराम का पवित्र कुंड में जल-विहार कराया गया। इस दिव्य कुंड के निर्माण में 500 किलो पुष्प-पंखुड़ियों, सात पवित्र नदियों के जल, गुलाब जल, केवड़ा जल तथा सुगंधित इत्र का उपयोग किया गया। गुप्त वृंदावन धाम में वर्ष में केवल एक बार बनने वाले 21 प्रकार के विशेष चिड़ा-दही का महाभोग भी भगवान को अर्पित किया गया।
गुप्त वृंदावन धाम के अध्यक्ष श्री अमितासना दास ने बताया कि पश्चिम बंगाल में कोलकाता के निकट स्थित पानीहाटी गांव में श्री नित्यानंद प्रभु और श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी की पहली भेंट हुई थी। इसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक प्रसंग की स्मृति में प्रतिवर्ष गुप्त वृंदावन धाम में पानीहाटी चिड़ा दही उत्सव का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि इसी दिन श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी ने श्री नित्यानंद प्रभु के आदेश का पालन करते हुए सभी भक्तों को दही के साथ मिश्रित चावल वितरित किए थे। यही कारण है कि इस पर्व को दंड महोत्सव अर्थात सजा का त्योहार भी कहा जाता है।
भक्ति, परंपरा और वैष्णव संस्कृति के अद्भुत संगम के रूप में आयोजित यह महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आस्था, धार्मिक विरासत और भगवान श्री श्री कृष्ण-बलराम की दिव्य लीलाओं के साक्षात्कार का विशेष अवसर बना।

Pratahkal Bureau
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