नगर में आयोजित ज्ञानमूर्ति पंडित दिवाकर शास्त्री की श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण और रसपूर्ण वर्णन किया गया, जिसमें पूतना वध प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

कथावाचन के दौरान पंडित दिवाकर शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए पूतना वध प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना ने सुंदर स्त्री का रूप धारण कर ब्रज में नवजात शिशुओं को विषपान कराने का षड्यंत्र रचा, किंतु जब वह नंद भवन पहुंचकर बाल कृष्ण को विषपान कराने लगी तो भगवान ने उसका उद्धार कर दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने पूतना के भीतर छिपे मातृत्व भाव को स्वीकार करते हुए उसे मोक्ष प्रदान किया। इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में बाहरी दिखावे से सावधान रहना चाहिए, क्योंकि कई बार व्यक्ति का वास्तविक स्वरूप उसके व्यवहार से भिन्न होता है।

कथा के दौरान भगवान राम और भगवान कृष्ण की लीलाओं का भी सुंदर तुलनात्मक वर्णन किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो उठा। श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे नजर आए और पूरा पांडाल “राधे-राधे” तथा “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा।

कार्यक्रम के अंत में विधिवत आरती की गई तथा प्रसाद का वितरण किया गया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया, जिससे पूरा आयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव से परिपूर्ण हो गया।

Pratahkal Bureau

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