जयपुर। राजस्थान के पाली जिले के सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र स्थित खैरोफड़ा गांव में एक किसान की मेहनत ने मरूभूमि में विकास की नई इबारत लिख दी है। अपने खेतों में खजूर की खेती के अनूठे प्रयोग से एक प्रगतिशील किसान ने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि संपूर्ण प्रदेश के लिए जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश किया है। राज्य के पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने हाल ही में खैरोफड़ा ग्राम का दौरा कर इस खजूर के बाग का गहन निरीक्षण किया और किसान की इस उपलब्धि की मुक्त कंठ से सराहना की।

निरीक्षण के दौरान सामने आया कि इस किसान ने करीब पांच वर्ष पूर्व अपने खेत में खजूर के 270 पौधे रोपित किए थे। निरंतर देखभाल, बेहतर कृषि प्रबंधन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के चलते आज ये सभी पौधे पूर्णतः विकसित होकर फल देने की स्थिति में हैं। किसान ने मंत्री को अवगत कराया कि वर्तमान में इस बाग से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग दस लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इस सफल प्रयोग को देखकर मंत्री कुमावत ने किसान के साहस और नवाचार की प्रशंसा की।

इस कृषि मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसका पर्यावरण-अनुकूल होना है। किसान ने कम जल उपलब्धता वाले क्षेत्र में बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति यानी ड्रिप इरिगेशन का सफल प्रयोग किया है, जिससे पानी की बर्बादी को पूरी तरह रोका गया है। पौधों के पोषण के लिए पूर्णतः प्राकृतिक खाद का उपयोग किया जा रहा है, जिससे न केवल भूमि की उर्वरता बनी हुई है, बल्कि खेती की लागत भी न्यूनतम हो गई है। मंत्री कुमावत ने इस मॉडल को जीरो बजट फार्मिंग और जल संरक्षण का उत्कृष्ट संगम करार देते हुए कहा कि यह प्रदेश के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक अध्याय है। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को इस सफल प्रयोग का अध्ययन करने और इसे अन्य क्षेत्रों में भी प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए, ताकि बागवानी को बढ़ावा देकर किसानों की आय को दोगुना करने के संकल्प को साकार किया जा सके।

Pratahkal Newsroom

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