जयपुर, 08 अप्रैल 2026। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर-कमलों से 21 अप्रैल 2026 को पचपदरा रिफाइनरी परियोजना का लोकार्पण होगा। इसे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताते हुए राठौड़ ने कहा कि यह परियोजना राजस्थान को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ आर्थिक विकास को नई दिशा देगी। राठौड़ ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा क्षेत्र में निर्माणाधीन रिफाइनरी परियोजना राज्य के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होने जा रही है, जिसकी आधारशिला वर्ष 2007-08 में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व में रखी गई थी।

रोजगार सृजन और जल प्रबंधन के लिए अभिनव पहल

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि "रिफाइनरी परियोजना रोजगार सृजन का बड़ा माध्यम बनेगी। पहले जहां 10 से 30 हजार लोगों के रोजगार की संभावना थी, वहीं अब लगभग 90 हजार लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है।" उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए पानी की व्यवस्था को लेकर सरकार ने नवाचार करते हुए पाली, बालोतरा एवं जोधपुर क्षेत्र के शोधन किए गए अपशिष्ट जल के उपयोग का प्रस्ताव तैयार किया है, जिससे आमजन के लिए पेयजल की उपलब्धता प्रभावित नहीं होगी। भाजपा सरकार जनसेवा के उद्देश्य से कार्य कर रही है और प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समझौतों पर तीखा प्रहार

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बताया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा इस परियोजना को लेकर किया गया समझौता राज्य के हित में नहीं था, जिससे राजस्थान सरकार पर अत्यधिक वित्तीय भार पड़ने वाला था। उन्होंने कहा कि उस समय बिना समुचित पर्यावरण स्वीकृति एवं वित्तीय स्पष्टता के जल्दबाजी में एमओयू किया गया, जिससे राज्य को भारी नुकसान होने की आशंका थी। राठौड़ ने कहा कि "तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सितंबर 2013 में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को पचपदरा बुलाकर रिफाइनरी परियोजना का शिलान्यास कराया, जो केवल एक 'चुनावी ढोंग' साबित हुआ।" उस समय न तो भूमि का अधिग्रहण किया गया था और न ही आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृतियां ली गई थीं, जिसके कारण कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में परियोजना पर कोई ठोस कार्य प्रारंभ नहीं हो सका।

वित्तीय सुधार और राज्य के हितों का संरक्षण

गहलोत सरकार द्वारा किया गया समझौता राज्य के हितों के विपरीत था। इस समझौते के तहत राजस्थान सरकार को 15 वर्षों तक प्रति वर्ष ₹3,736 करोड़ बिना ब्याज के संबंधित कंपनी को देने का प्रावधान किया गया था, जो रिफाइनरी परियोजना में क्रूड निकालने का कार्य करती। राठौड़ ने कहा कि “जमीन हमारी, तेल हमारा और भुगतान भी हम ही करें, जबकि हमें केवल 26 प्रतिशत इक्विटी मिले और 74 प्रतिशत हिस्सेदारी कंपनी को दी जाए”—यह पूरी तरह से राज्य के साथ अन्याय था। उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार के पुनः सत्ता में आने के बाद इस समझौते में व्यापक सुधार किए गए। राज्य सरकार का वित्तीय भार कम करते हुए लगभग 40,000 करोड़ की बचत सुनिश्चित की गई तथा अनावश्यक वार्षिक भुगतान की शर्तों को समाप्त किया गया। साथ ही, परियोजना में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाकर उसे अधिक लाभकारी बनाया गया। वर्तमान में राज्य का वित्तीय योगदान लगभग 16,845 करोड़ तक सीमित किया गया है।

राष्ट्रहित और विपक्ष की भूमिका पर सवाल

राठौड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्तान द्वारा सीज़फायर मध्यस्थता के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए राठौड़ ने कहा कि राष्ट्रीय विषयों पर सभी दलों को एकजुट होकर देशहित में सोचने की आवश्यकता है। उन्होंने विपक्ष से भी राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि "गहलोत साहब को सोचना चाहिए कि वे किस की पैरवी कर रहे है। पाकिस्तान को दलाल कहने पर गहलोत साबह माफी मांगने के लिए बोल रहे है, यह उनका दोहरा चरित्र दर्शाता है।" गहलोत साहब की साहनुभूति भारत के साथ है या फिर पाकिस्तान के साथ! गहलोत और विपक्ष में राष्ट्रभक्ति की जरूरत है।

Pratahkal Bureau

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