विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर उत्तर पश्चिम रेलवे की पहल, ‘स्वर से समाधान’ अभियान शुरू
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर उत्तर पश्चिम रेलवे ने ‘स्वर से समाधान’ अभियान शुरू किया। जयपुर के केंद्रीय चिकित्सालय में तनाव प्रबंधन संगोष्ठी, 50 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों की भागीदारी और मरीज के 10 वर्षों के अनुभव चर्चा में रहे।

तस्वीर में केंद्रीय चिकित्सालय, जयपुर में आयोजित तनाव प्रबंधन संगोष्ठी के दौरान स्वास्थ्यकर्मी और रेलवे अधिकारी नजर आ रहे हैं।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर उत्तर पश्चिम रेलवे ने कर्मचारियों और उनके परिवारों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ‘स्वर से समाधान’ विशेष अभियान की शुरुआत की। 10 अक्टूबर 2026 को शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे लोगों को सहयोग प्रदान करना है। अभियान के तहत लोगों की समस्याएं सुनने, उनकी परिस्थितियों को समझने और समाधान खोजने में साथ देने पर जोर दिया गया।
उत्तर पश्चिम रेलवे के चिकित्सा विभाग की ओर से शुरू किए गए इस अभियान की वैश्विक थीम “जीने के अनुभवों को सुनें—वास्तविक आवाज़ें, वास्तविक बदलाव” रही। इसी संदेश के तहत केंद्रीय चिकित्सालय, जयपुर में तनाव प्रबंधन विषय पर एक संवादात्मक संगोष्ठी आयोजित की गई। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ चुनौतियों का सामना कर रहे लोगों को सहयोग उपलब्ध कराना था।
‘स्वर से समाधान’ पहल की शुरुआत डॉ. राम मटोरिया, अतिरिक्त मुख्य स्वास्थ्य निदेशक एवं नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम, उत्तर पश्चिम रेलवे ने की। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय चिकित्सालय, जयपुर के चिकित्सा निदेशक डॉ. संजय साहा ने की। इस अवसर पर मुख्य स्टाफ सर्जन डॉ. सुबैदा मलफिकन और अतिरिक्त मुख्य स्वास्थ्य निदेशक (प्रशासन एवं सामान्य) डॉ. रुचि जैन भी उपस्थित रहीं।
संगोष्ठी में डॉ. राम मटोरिया और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट सुश्री प्रीति शर्मा ने तनाव प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों की पहचान, उनसे निपटने की प्रभावी रणनीतियों और समय पर पेशेवर सहायता लेने के महत्व पर प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में 50 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय भागीदारी की। उन्होंने तनाव, भावनात्मक स्वास्थ्य और कार्यस्थल से जुड़ी चुनौतियों पर अपने प्रश्न और चिंताएं साझा कीं। डॉ. मटोरिया ने प्रतिभागियों के सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं और समस्याओं का समाधान किया।
संगोष्ठी में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े व्यक्तिगत अनुभवों को महत्व देने के उद्देश्य से मरीज राजेंद्र कुमार (परिवर्तित नाम) ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के साथ जीवन बिताने के पिछले 10 वर्षों के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वह पिछले 10 वर्षों से केंद्रीय चिकित्सालय में डॉ. राम मटोरिया से लगातार उपचार ले रहे हैं। इस अवधि में उन्हें अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्यकर्मियों से अभूतपूर्व सहयोग मिला।
डॉ. राम मटोरिया ने इस अवसर पर अपील की कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को छिपाने के बजाय बिना झिझक तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय पर निदान और सही उपचार से हर प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य चुनौती से उबरना पूरी तरह संभव है।
उन्होंने कहा, “मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों से जूझ रहे व्यक्ति को केवल उसकी बीमारी, समस्या या कार्यक्षमता के आधार पर नहीं देखना चाहिए। उसके अनुभवों को सुनना, उसकी परिस्थितियों को समझना और उसकी समस्याओं के समाधान में सहभागी बनना आवश्यक है। ‘स्वर से समाधान’ का संदेश है—बिना पूर्वाग्रह के सुनें, सहानुभूति के साथ संवाद करें और मिलकर समाधान खोजें। वास्तविक बदलाव तभी आएगा, जब व्यक्ति की आवाज को महत्व दिया जाएगा और उसकी बाधाओं को दूर करने के ठोस प्रयास होंगे।”
डॉ. मटोरिया ने बताया कि चिकित्सा विभाग इस संदेश को मरीजों, उनके परिजनों, चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, कर्मचारियों, कार्यस्थल के पर्यवेक्षकों, प्रभारियों और प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. संजय साहा ने कहा, “स्वस्थ कार्यस्थल और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी समान ध्यान देना अनिवार्य है। स्वास्थ्यकर्मी और रेलवे कर्मचारी कई प्रकार की व्यावसायिक व व्यक्तिगत चुनौतियों से गुजरते हैं। ऐसे में उनकी बात सुनना और उचित सहयोग उपलब्ध कराना एक संवेदनशील वातावरण तैयार करता है।”
‘स्वर से समाधान’ अभियान का अंतिम लक्ष्य मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संकोच और सामाजिक कलंक को समाप्त करना है। इस पहल के माध्यम से उत्तर पश्चिम रेलवे ने सुनने, संवाद करने और समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने के महत्व पर जोर दिया। अभियान का मुख्य संदेश है कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे लोगों की आवाज को महत्व देना और उन्हें उचित सहयोग उपलब्ध कराना वास्तविक बदलाव की दिशा में आवश्यक है।

