उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) एवं स्कूल ऑफ मीडिया स्टडीज, जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय भव्य "नृत्यम" कार्यक्रम का बुधवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। संगीत की मधुरता, नृत्य की लय और भावों की गहराई जब एक मंच पर साकार हुई, तो इस आयोजन ने दर्शकों को कला के उस संसार में पहुंचा दिया, जहां हर प्रस्तुति एक नई अनुभूति बन गई।

विशिष्ट अतिथियों का स्वागत और उद्बोधन

कार्यक्रम के तीसरे और आखिरी दिन मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सौम्या गुर्जर (निवर्तमान महापौर, नगर निगम ग्रेटर जयपुर), सुश्री श्रुति मिश्रा (सचिव, जयपुर कथक केंद्र) तथा सुश्री अर्निशा डाबले (वरिष्ठ संवाददाता, दूरदर्शन, जयपुर) की गरिमामय उपस्थिति रही। प्रो-चांसलर प्रोफेसर एच एन वर्मा, वाईस चांसलर आर एल रैना व स्कूल ऑफ मीडिया के निदेशक प्रोफेसर मौलिक शाह ने मुख्य अतिथि डॉ. सौम्या गुर्जर व अन्य अतिथियों का आत्मीय स्वागत सत्कार किया।

भारतीय सांस्कृतिक गौरव और नृत्य की दिव्यता

संबोधन के दौरान निवर्तमान महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर ने कहा कि "हम भारतीयों का नृत्य और संगीत का एक लंबा और गौरवशाली इतिहास रहा है। हमें खुद को भाग्यशाली समझना चाहिए कि हम इन आयोजनों के माध्यम से अपने देश की सांस्कृतिक गौरव को प्रदर्शित करने में सक्षम हैं।" उन्होंने नृत्य को एक दिव्य कला बताते हुए कहा कि यह विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर देती है और कई लोग तनाव कम करने के लिए इसका सहारा लेते हैं। जयपुर कथक केंद्र की सचिव श्रुति मिश्रा ने कलाकारों के समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि "कलाकारों ने मंच पर अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से जान डाल दी है। आपका नृत्य न केवल आँखों को, बल्कि सीधे दिल को छू गया।"

वैश्विक कला के रूप में नृत्य की गूँज

दूरदर्शन की वरिष्ठ संवाददाता अर्निशा डाबले ने अपने विचार रखते हुए कहा कि "नृत्य आज एक ग्लोबल कला का रूप है, जो अपनी परंपरा को बनाए रखते हुए समकालीन विषयों को भी अपना रहा है।" उन्होंने रेखांकित किया कि नृत्य केवल शरीर का संचालन नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है, जो इस मंच पर स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।

कथक, ओडिसी और लोक कलाओं का अद्भुत संगम

सांस्कृतिक कार्यक्रम में डॉ. ज्योति भारती गोस्वामी एवं दल, जयपुर द्वारा भजन एवं तीनताल पर आधारित कथक प्रस्तुति से शास्त्रीय सौंदर्य और लय का आकर्षक समन्वय पेश किया गया। इसके बाद स्मृद्धि खुराना एवं दल, दिल्ली द्वारा ओडिसी नृत्य की शुरुआत “शंकरवर्णम पल्लवी” से हुई। इसके पश्चात महाकवि कालिदास की रचना “ऋतुसंहार” के अंश पर आधारित वसंत अभिव्यक्ति ने प्रकृति के सौंदर्य को जीवंत कर दिया। अंत में मयूरभंज छाऊ और ओडिसी का अद्भुत संगम “शंभु स्वयंभू” के रूप में प्रस्तुत हुआ, जिसमें भगवान शिव की दिव्यता और ऊर्जा का प्रभावशाली चित्रण दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति से भर गया।

ब्रज की होली और मयूर नृत्य का आकर्षण

मथुरा की लोक परंपरा को साकार करते हुए दीपक शर्मा एवं दल ने “मयूर” एवं “ब्रज की होली” की मनमोहक प्रस्तुति दी। कलाकारों ने “बरसाने की मोर मुकुट में मोर बन आयो रसिया” और “होली खेले…” जैसे पारंपरिक गीतों पर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम के अंत में स्कूल ऑफ मीडिया स्टडीज के निदेशक प्रोफेसर मौलिक शाह ने नृत्य को "आत्मा की भाषा" बताते हुए बच्चों की प्रतिभा और शिक्षकों के समर्पण की सराहना की और सफल आयोजन के लिए सबका धन्यवाद ज्ञापित किया।

Pratahkal Bureau

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