उत्तर पश्चिम रेलवे: लंबित न्यायिक प्रकरणों पर कड़ा रुख, अपर महाप्रबंधक ने दिए समयबद्ध निस्तारण के निर्देश
उत्तर पश्चिम रेलवे मुख्यालय जयपुर में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में लंबित न्यायिक मामलों की समीक्षा की गई। अपर महाप्रबंधक श्री अशोक माहेश्वरी ने लंबित प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण और डिजिटल डेटाबेस को अपडेट करने के सख्त निर्देश दिए। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विधि सहायकों को नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। रेलवे प्रशासन का यह कदम न्यायिक पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ी पहल है।

जयपुर। भारतीय रेलवे की कार्यकुशलता और न्याय प्रणाली के प्रति जवाबदेही को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आज उत्तर पश्चिम रेलवे मुख्यालय, जयपुर में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। अपर महाप्रबंधक श्री अशोक माहेश्वरी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में रेलवे से जुड़े विभिन्न न्यायिक मामलों, विशेषकर लंबित प्रकरणों की वर्तमान स्थिति पर गहन मंथन किया गया।
न्यायिक विलंब पर चिंता और समाधान की रणनीति
बैठक को संबोधित करते हुए अपर महाप्रबंधक श्री अशोक माहेश्वरी ने न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय में देरी न केवल प्रशासनिक बोझ बढ़ाती है, बल्कि संस्थान की छवि को भी प्रभावित करती है। श्री माहेश्वरी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि:
सभी लंबित न्यायिक प्रकरणों का एक निश्चित समय सीमा (Deadline) के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
डेटाबेस प्रबंधन: न्यायिक प्रकरणों के डेटाबेस को निरंतर अपडेट रखा जाए ताकि भविष्य में प्रभावी समीक्षा और त्वरित निर्णय लिए जा सकें।
हालांकि, उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि 'अवमानना' (Contempt) और 'अनुपालना' (Compliance) से जुड़े मामलों में पिछले कुछ समय में कमी आई है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
विभागीय समन्वय और समीक्षा
बैठक के दौरान उप महाप्रबंधक (विधि) श्री प्रतुल सारोलिया ने सभी मंडलों और यूनिटों के कार्यों का सूक्ष्म विश्लेषण किया। उन्होंने मंडल स्तर पर लंबित अनुपालन और अवमानना प्रकरणों की प्रगति रिपोर्ट जांची और अधिकारियों को निर्देशित किया कि कानूनी बाधाओं को दूर कर फाइलों का समय पर निस्तारण किया जाए।
उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान की गूँज
समीक्षा बैठक का समापन उत्साहजनक रहा, जहाँ रेल सेवा के प्रति समर्पण को सम्मानित किया गया। अपर महाप्रबंधक ने दो अधिकारियों को उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली के लिए 'सर्वश्रेष्ठ मुख्य विधि सहायक' के खिताब से नवाजा:
श्री बी. आर. जाट (निर्माण विभाग): नवंबर 2025 के लिए।
श्री भगवती प्रसाद यादव (जोधपुर मंडल): दिसंबर 2025 के लिए।
इन विजेताओं को प्रशस्ति पत्र के साथ 2000 रुपये की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की गई। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत परिश्रम को रेखांकित करता है, बल्कि अन्य कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
निष्कर्ष: यह बैठक उत्तर पश्चिम रेलवे के उस संकल्प को दोहराती है, जहाँ प्रशासनिक पारदर्शिता और न्यायिक जवाबदेही को सर्वोपरि रखा गया है। लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण से न केवल रेलवे का कानूनी पक्ष मजबूत होगा, बल्कि कार्यप्रणाली में भी अभूतपूर्व गति आएगी।

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