उत्तर पश्चिम रेलवे: 531 समपार फाटकों का इंटरलॉकिंग कार्य पूर्ण
रेलवे ने संरक्षा बढ़ाने के लिए 531 गेटों पर इंटरलॉकिंग, इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर और रिमोट टर्मिनल यूनिट जैसी अत्याधुनिक तकनीकें स्थापित की हैं।

उत्तर पश्चिम रेलवे पर संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समपार फाटकों के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। वर्ष 2025-26 के दौरान 531 समपार फाटकों का इंटरलॉकिंग किया गया, जिससे रेल संचालन और सड़क यातायात के बीच समन्वय को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया गया है।
इस व्यापक पहल के तहत 14 समपार फाटकों पर इमरजेंसी स्लाइड बूम और 31 स्थानों पर रिमोट टर्मिनल यूनिट्स स्थापित की गई हैं। इंटरलॉकिंग प्रणाली के साथ इमरजेंसी स्लाइड बूम (ESB), इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर (ELB) और रिमोट टर्मिनल यूनिट (RTU) जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं को जोड़ा गया है। इन तकनीकों के उपयोग से गेट संचालन अधिक संरक्षित और भरोसेमंद हो गया है, जिससे समपार फाटकों पर रेल और सड़क दुर्घटनाओं की संभावना समाप्त होने की उम्मीद जताई गई है।
आधुनिकीकरण प्रक्रिया के अंतर्गत पारंपरिक मैकेनिकल लिफ्टिंग बैरियर (MLB) को हटाकर इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर (ELB) लगाए जा रहे हैं। वर्ष 2025-26 में 58 समपार फाटकों पर इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर स्थापित किए गए हैं, जिसके बाद उत्तर पश्चिम रेलवे में कुल 455 समपार फाटक इस प्रणाली से लैस हो चुके हैं।
मार्च 2026 में बीकानेर और जोधपुर मंडलों के कुल 9 इंटरलॉक्ड समपार फाटकों पर आधुनिक इलेक्ट्रिक लिफ्टिंग बैरियर लगाए गए। इनमें बीकानेर मंडल के LC-64 (हनुमानगढ़), LC-125 और LC-126 (लूनकरणसर) तथा जोधपुर मंडल के LC-14 (तालछापर-पडिहारा), LC-4, LC-5, LC-6, LC-8 (राईका बाग-मंडोर) और LC-100 (बड़ी खाटू) शामिल हैं।
इसके साथ ही सड़क उपयोगकर्ताओं को जागरूक करने के लिए विभिन्न स्थानों पर संरक्षा जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि तकनीकी सुधारों के साथ जनभागीदारी भी सुनिश्चित हो सके।
उत्तर पश्चिम रेलवे ने स्पष्ट किया है कि संरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसे सुदृढ़ करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों तथा नवाचारों का निरंतर उपयोग किया जा रहा है। यह पहल रेल और सड़क दोनों के लिए सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

