जयपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में आधुनिक रेल परिवहन, ऊर्जा संरक्षण और परिचालन दक्षता के मानकों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाते हुए विकास की एक गौरवशाली पटकथा लिखी है। भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और पर्यावरण अनुकूल विजन को साकार करते हुए उत्तर पश्चिम रेलवे ने यात्री सुविधाओं से लेकर तकनीकी सुदृढ़ीकरण तक हर मोर्चे पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन ने बताया कि महाप्रबंधक श्री अमिताभ के कुशल मार्गदर्शन में इस वित्तीय वर्ष के दौरान रेलवे विद्युतीकरण, ऊर्जा प्रबंधन और सुरक्षा के क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं।

रेलवे विद्युतीकरण के मोर्चे पर उत्तर पश्चिम रेलवे ने वर्ष 2025-26 में कुल 83 रूट किलोमीटर और 262.71 ट्रैक किलोमीटर का विद्युतीकरण सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। विशेष रूप से जयपुर मंडल के दौसा-अरनिया कलां सलेमपुरा तथा लालसोट-गंगापुर सिटी रेलखंडों में 2.25 केवी प्रणाली के तहत कार्य को अंजाम दिया गया है, जबकि विभिन्न दोहरीकरण परियोजनाओं के तहत भी विद्युतीकरण कार्य ने ट्रेनों की गति और क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि की है। इस विद्युत तंत्र को निर्बाध आपूर्ति प्रदान करने के लिए डूंगरपुर, बाड़मेर एवं लालगढ़ में तीन नए ट्रैक्शन सब-स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बिजली आपूर्ति प्रणाली को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

सुरक्षा और विश्वसनीयता के क्षेत्र में उत्तर पश्चिम रेलवे ने तकनीक और सतर्कता का बेहतरीन समन्वय पेश किया है। ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) विफलताओं में 24 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे तकनीकी खराबी के मामले पिछले वर्ष के 21 से घटकर महज 16 रह गए हैं। यह सफलता नियमित निरीक्षण, उन्नत थर्मो-विजन जांच, फ्लोरोसेंट टेप का उपयोग, पैकिंग सैडल्स और डबल कॉन्टैक्ट वायर व्यवस्था जैसे आधुनिक रखरखाव उपायों से प्राप्त हुई है। साथ ही प्री-समर निरीक्षण और वृक्षों की छंटाई के विशेष अभियानों ने परिचालन को और अधिक सुरक्षित बना दिया है।

हरित ऊर्जा की दिशा में कदम बढ़ाते हुए उत्तर पश्चिम रेलवे ने रिपोर्टिंग माह के दौरान 11.88 लाख यूनिट से अधिक सौर ऊर्जा का उत्पादन किया है और 1408 किलोवाट पीक क्षमता के नए सोलर प्लांट स्थापित किए हैं। ऊर्जा संरक्षण के संकल्प को दोहराते हुए रेलवे ने 1236 बीएलडीसी पंखे और 386 फाइव-स्टार रेटेड उपकरण लगाकर बिजली की खपत को न्यूनतम किया है। प्रभावी ऊर्जा प्रबंधन के चलते पावर फैक्टर को 0.96 से ऊपर बनाए रखने पर रेलवे को 7.65 लाख रुपये का रिबेट मिला, जबकि समयबद्ध बिल भुगतान से 2.86 लाख रुपये की अतिरिक्त बचत हुई है।

वर्तमान में उत्तर पश्चिम रेलवे पर 181 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव सक्रिय हैं और लगभग 220 जोड़ी यानी 77.74 प्रतिशत ट्रेनें पूर्णतः इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर चल रही हैं। इसके साथ ही डीजल ट्रैक्शन में भी दक्षता का ध्यान रखते हुए मार्च 2026 में 483.734 किलोलीटर ईंधन की बचत कर करीब 5.03 करोड़ रुपये का राजस्व संरक्षित किया गया है। रेल संचालन को और अधिक कुशल बनाने के उद्देश्य से 4100 से अधिक रनिंग स्टाफ को इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के संचालन हेतु प्रशिक्षित किया जा चुका है। नवाचार और तकनीकी श्रेष्ठता का यह सफर उत्तर पश्चिम रेलवे को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हुए राष्ट्र की प्रगति में एक महत्वपूर्ण भागीदार बना रहा है।

Pratahkal Newsroom

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