उत्तर पश्चिम रेलवे के दो प्रतिष्ठानों को IGBC ग्रीन सर्टिफिकेशन
डीजल शेड आबू रोड और डीजल ट्रैक्शन ट्रेनिंग सेंटर को ऊर्जा संरक्षण व टिकाऊ बुनियादी ढांचे के लिए यह प्रतिष्ठित रेटिंग मिली है।

उत्तर पश्चिम रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ रेलवे बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। ‘ग्रीन इंडियन रेलवे’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए रेलवे ने अपने स्टेशनों, कार्यशालाओं और प्रशासनिक इकाइयों में पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित किया है। इसी क्रम में उत्तर पश्चिम रेलवे के दो प्रतिष्ठानों को प्रतिष्ठित इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) का ग्रीन सर्टिफिकेशन प्राप्त हुआ है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार, ये प्रमाणन ऊर्जा संरक्षण, जल प्रबंधन, अपशिष्ट कम करने और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किए गए प्रयासों की आधिकारिक मान्यता हैं।
इन उपलब्धियों में प्रशासनिक कार्यालय, डीजल शेड, आबू रोड को 27 अगस्त 2026 को IGBC ग्रीन सर्विस बिल्डिंग की गोल्ड रेटिंग प्रदान की गई। यह प्रमाणन प्रतिष्ठान में अपनाई गई टिकाऊ निर्माण प्रक्रियाओं, ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और बेहतर आंतरिक पर्यावरणीय गुणवत्ता को मान्यता देता है।
इसी तरह, डीजल ट्रैक्शन ट्रेनिंग सेंटर को 13 अगस्त 2026 को IGBC ग्रीन सर्विस बिल्डिंग प्रमाणन प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि यहां संसाधनों के कुशल उपयोग और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किए गए प्रयासों को मान्यता देती है।
इन प्रमाणनों के माध्यम से रेलवे प्रतिष्ठानों के पर्यावरणीय प्रदर्शन का स्वतंत्र मूल्यांकन होता है। साथ ही, यह व्यवस्था निरंतर सुधार और पर्यावरण अनुकूल कार्यप्रणालियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।
ऊर्जा दक्षता के तहत नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा-कुशल उपकरणों के उपयोग तथा बिजली की खपत में कमी पर जोर दिया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलती है। जल संरक्षण के क्षेत्र में वर्षा जल संचयन, पानी का कुशल उपयोग, अपशिष्ट जल का उपचार और पुनर्चक्रण प्रमुख उपाय हैं।
अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत स्रोत पर ही कचरे का पृथक्करण, पुनर्चक्रण, संसाधनों की पुनः प्राप्ति और लैंडफिल में पहुंचने वाले कचरे को कम करने पर ध्यान दिया जाता है। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण के लिए बेहतर पर्यावरणीय कार्यप्रणालियों के माध्यम से वायु, जल और अन्य प्रकार के प्रदूषण को कम करने के प्रयास किए जाते हैं।
सतत बुनियादी ढांचे के विकास में हरित भू-दृश्य, प्राकृतिक प्रकाश, हवा के बेहतर आवागमन और उच्च पर्यावरणीय गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अतिरिक्त, संसाधनों के अनुकूलन के तहत ऊर्जा और पानी की लागत कम करने, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने तथा दीर्घकालीन परिचालन लागत में बचत पर जोर दिया जाता है।
उत्तर पश्चिम रेलवे की ये उपलब्धियां पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार कार्यप्रणालियां अपनाने, कार्बन फुटप्रिंट कम करने और संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग करने वाला रेलवे बुनियादी ढांचा विकसित करने के निरंतर प्रयासों को दर्शाती हैं।
ग्रीन सर्टिफिकेशन से न केवल संबंधित प्रतिष्ठानों में किए गए पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मान्यता मिलती है, बल्कि पर्यावरणीय प्रदर्शन की निगरानी और अन्य रेलवे प्रतिष्ठानों में भी टिकाऊ कार्यप्रणालियां अपनाने के लिए एक निर्धारित रूपरेखा उपलब्ध होती है।
उत्तर पश्चिम रेलवे ‘ग्रीन इंडियन रेलवे’ के विजन के अनुरूप स्वच्छ, हरित और अधिक टिकाऊ रेलवे प्रणाली विकसित करने की दिशा में प्रतिबद्ध है।

