जलवायु परिवर्तन के बढ़ते वैश्विक खतरों के बीच उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बेहद व्यापक और संवेदनात्मक जागरूकता अभियान चलाया गया। इसी कड़ी में 05 जून 2025 को उत्तर पश्चिम रेलवे मुख्यालय में “जलवायु परिवर्तन” विषय पर केंद्रित प्लास्टिक प्रदूषण की रोकथाम और कचरा प्रबंधन पर एक भव्य संगोष्ठी, नुक्कड़ नाटक और भारत स्काउट्स एवं गाइड्स द्वारा विशेष जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन के अनुसार, विश्व पर्यावरण दिवस के इस पावन अवसर पर उत्तर पश्चिम रेलवे मुख्यालय सहित विभिन्न मंडलों, कारखानों, अस्पतालों और स्टेशनों पर बीते 15 मई से 05 जून 2025 तक विशेष पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता अभियान चलाकर जन-जन को प्रकृति के प्रति सचेत किया गया।

इस वृहद अभियान के समापन पर गुरुवार, 05 जून को मुख्यालय स्थित सभा कक्ष में आयोजित संगोष्ठी के आरंभ में उत्तर पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ उप महाप्रबंधक श्री शिवेंद्र मोहन ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारतीय रेलवे के बहुमूल्य योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) के एमेरिटस फेलो (Emeritus Fellow) श्री अरुण कुमार ने "Climate Change, focusing on the challenges posed by Mother Earth" विषय पर अपना अत्यंत ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। इस उच्च स्तरीय संगोष्ठी में अपर महाप्रबंधक व प्रमुख मुख्य यांत्रिक इंजीनियर सहित रेलवे के तमाम वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

अधिकारिक प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करते हुए विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्री सतीश कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यालय में उपस्थित सभी रेल अधिकारियों और कर्मियों को "पर्यावरण संरक्षा शपथ" दिलाई। इस दौरान संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों, प्लास्टिक प्रदूषण से उत्पन्न हो रही भयानक चुनौतियों तथा वैज्ञानिक व प्रभावी कचरा प्रबंधन की तात्कालिक आवश्यकता पर गहराई से मंथन किया गया। उपस्थित वक्ताओं ने पुरजोर शब्दों में रेखांकित किया कि पर्यावरण संरक्षण अब सिर्फ चर्चा का विषय नहीं बल्कि एक वैश्विक आवश्यकता बन चुका है, जिसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय और सजग भागीदारी अनिवार्य है। कार्यक्रम में मौजूद सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने, एकल उपयोग प्लास्टिक (सिंगल यूज़ प्लास्टिक) के उपभोग को न्यूनतम करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए गहराई से प्रेरित किया गया।

चर्चा के दौरान सिंगल यूज़ प्लास्टिक से हमारे नाजुक पर्यावरण, अमूल्य जल स्रोतों, बेजुबान वन्यजीवों और खुद मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहे जानलेवा व प्रतिकूल प्रभावों को पुरजोर तरीके से सामने रखा गया। इसके साथ ही कचरे के सही पृथक्करण, पुनक्र्रण (री-साइक्लिंग) तथा स्वच्छता से जुड़े व्यावहारिक उपायों की तकनीकी व व्यावहारिक जानकारियां साझा की गईं। संगोष्ठी में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराते हुए संपूर्ण परिसर और समाज को प्लास्टिक मुक्त वातावरण बनाने का दृढ़ संकल्प लिया।

इस जागरूकता अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के सदस्यों द्वारा एक भव्य व विशेष जागरूकता रैली निकाली गई। रैली में स्काउट एवं गाइड के जांबाज सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े गंभीर संदेशों वाली तख्तियां तथा बैनर हाथों में लेकर आमजन को जागरूक किया। इस मार्च के दौरान “प्लास्टिक मुक्त भारत”, “स्वच्छ पर्यावरण-स्वस्थ जीवन”, “हरित भविष्य हमारी जिम्मेदारी”, “कचरा सही स्थान पर डालें” तथा “पर्यावरण बचाओ- भविष्य बचाओ” जैसे गगनभेदी नारों के माध्यम से लोगों के भीतर छिपी पर्यावरणीय चेतना को जगाया गया। स्काउट एवं गाइड ने जनसाधारण से अपील की कि वे प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह बंद कर कपड़े या जूट के थैलों को अपनी आदत में शुमार करें और चारों तरफ स्वच्छता बनाए रखें।

इसी क्रम में वैचारिक चेतना को और धार देने के लिए उत्तर पश्चिम रेलवे मुख्यालय में रेल कलाकारों द्वारा सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग न करने की थीम पर आधारित ‘‘टोकेंगे तो रोकेंगे” विषय पर एक बेहद मार्मिक और प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से कलाकारों ने अपनी सरल, धारदार और बेहद रोचक शैली में यह प्रदर्शित किया कि किस तरह प्लास्टिक का अंधाधुंध उपयोग हमारी धरा, नदी-नालों, निर्दोष पशु-पक्षियों तथा संपूर्ण मानव जीवन को धीरे-धीरे लील रहा है। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, जीवंत संवादों और गहरे जन-संदेशों के जरिए दर्शकों की आंखों को खोलने और उन्हें पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय व साहसिक भूमिका निभाने के लिए झकझोर दिया। नाटक ने समाज को यह बड़ा संदेश दिया कि यदि देश का हर एक नागरिक प्लास्टिक के अनावश्यक उपयोग का डटकर विरोध करे और दूसरों को भी इसके लिए टोके, तो प्लास्टिक प्रदूषण के इस दैत्य पर आसानी से प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ उप महाप्रबंधक ने नुक्कड़ नाटक के कलाकारों के इस बेहतरीन व आंखें खोल देने वाले प्रदर्शन की मुक्तकंठ से सराहना की और नाट्य दल के उत्साहवर्धन के लिए ₹8,000 के नकद पुरस्कार की सहर्ष घोषणा की। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि जन-जागरूकता के ऐसे रचनात्मक व कलात्मक प्रयास पर्यावरण संरक्षण के पावन संदेश को समाज के हर अंतिम वर्ग तक सहजता से पहुँचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कलाकारों, स्काउट-गाइड सदस्यों सहित कार्यक्रम में शामिल सभी अधिकारियों व प्रतिभागियों को बधाई देते हुए जीवनपर्यंत पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर संघर्ष और प्रयास करने का आह्वान किया। उल्लेखनीय है कि पर्यावरण दिवस के इस महापर्व पर उत्तर पश्चिम रेलवे के सभी मंडलों और विभिन्न यूनिटों में भी चेतना जागृत करने के लिए ऐसे कई कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गई, जिसमें स्टेशनों पर रेल यात्रियों की सीधी सहभागिता सुनिश्चित कर उन्हें भी प्रकृति के प्रति सजग और जिम्मेदार नागरिक बनाने का एक बड़ा और ऐतिहासिक कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।

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