राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान की 43वीं बैठक: राजस्थान में जल सुरक्षा के लिए 25 हजार करोड़ के कार्य
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने पीकेसी लिंक और यमुना जल समझौते पर प्रगति साझा की।

रूड़की के जल विज्ञान भवन में आयोजित एनआईएच की 43वीं वार्षिक बैठक के दौरान (बाएं से दाएं) सचिव वी.एल. कांथा राव, राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल, उप राज्यपाल एडमिरल डी.के जोशी और राजस्थान के मंत्री सुरेश सिंह रावत रिपोर्ट जारी करते हुए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत-2047' विजन को साकार करने की दिशा में राजस्थान अब जल प्रबंधन के क्षेत्र में अभूतपूर्व गति से कदम बढ़ा रहा है। मंगलवार को राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान सोसायटी (एनआईएच), रूड़की के जल विज्ञान भवन में आयोजित 43वीं वार्षिक बैठक में यह संकल्प और भी सुदृढ़ होकर उभरा। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण सभा में राजस्थान के जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने प्रदेश की जल सुरक्षा और भविष्य की योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया।
बैठक को संबोधित करते हुए जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश को जल सुरक्षित बनाने हेतु 'राजस्थान वाटर ग्रिड कॉर्पोरेशन' की स्थापना की जा चुकी है। उन्होंने जानकारी साझा की कि संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल (पीकेसी) लिंक परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए 25 हजार करोड़ रुपए के कार्यादेश भी जारी कर दिए गए हैं। श्री रावत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यमुना जल समझौते के तहत शेखावाटी क्षेत्र में पानी पहुँचाने और पश्चिमी राजस्थान के क्षेत्रों में जल अपवर्तन संबंधी कार्यों पर तीव्रता से कार्य कर रही है।
तकनीकी पक्ष पर जोर देते हुए श्री रावत ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से आग्रह किया कि राजस्थान की वृहद् जल प्रबंधन परियोजनाओं में वैज्ञानिक संस्थानों, राज्य सरकारों एवं नीति-निर्माताओं का निरंतर सहयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि डेटा प्रबंधन, क्षमता निर्माण और राष्ट्रीय हाइड्रोलॉजी परियोजना के तहत संस्थान का सहयोग राजस्थान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने एनआईएच को केवल एक अनुसंधान केंद्र नहीं, बल्कि देश का अग्रणी नीति एवं तकनीकी समाधान केंद्र बताया, जो बाढ़ पूर्वानुमान, भू-जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर विषयों पर प्रभावी कार्य कर रहा है।
इस उच्चस्तरीय बैठक में जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी, अंडमान और निकोबार के उप राज्यपाल एडमिरल श्री डी.के जोशी, जल शक्ति मंत्रालय के सचिव श्री वी.एल. कांथा राव, आईआईटी रूड़की के निदेशक डॉ. के.के. पंत तथा एनआईएच के निदेशक डॉ. वाई.आर.एस. राव सहित विशेषज्ञ और वैज्ञानिक उपस्थित रहे। यह बैठक प्रदेश की जल आत्मनिर्भरता और आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल तकनीकों के एकीकरण की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
