नई दिल्ली/रेवाड़ी: भारतीय परिवहन के इतिहास में एक ऐसा अध्याय लिखा जा रहा है जो सड़क की सुगमता और रेल की अपार शक्ति को एक सूत्र में पिरो रहा है। भारतीय रेलवे के समर्पित माल ढुलाई गलियारा (DFC) के नेतृत्व में 'ट्रक-ऑन-ट्रेन' (ToT) सेवा ने माल ढुलाई के पारंपरिक तरीकों को पीछे छोड़ते हुए एक रणनीतिक परिवर्तन की शुरुआत की है। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और उपभोग की विविधताओं के बीच सड़कों पर बढ़ते दबाव, ईंधन की भारी खपत और गिरती वायु गुणवत्ता जैसी गंभीर चुनौतियों का समाधान अब डीएफसी के विद्युतीकृत रेल पटरियों पर दौड़ते ट्रकों में दिखाई दे रहा है। यह पहल केवल एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि एक भविष्योन्मुखी विजन है जो प्रदूषण, राजमार्गों की भीड़भाड़ और रसद लागत को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

वर्तमान में पश्चिमी डीएफसी नेटवर्क पर न्यू रेवाड़ी और न्यू पालनपुर के बीच संचालित यह सेवा आधुनिक इंजीनियरिंग और कुशल प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण पेश कर रही है। न्यू पालनपुर से न्यू रेवाड़ी के बीच लगभग 636 किलोमीटर की दूरी तय करने में जहां सड़क मार्ग से ट्रकों को 30 घंटे का लंबा समय लगता था, वहीं अब टूटी (ToT) सेवा के माध्यम से यह सफर मात्र 12 घंटे में सिमट गया है। इस जादुई परिवर्तन ने न केवल समय की बचत की है, बल्कि परिवहन की विश्वसनीयता को भी एक नए स्तर पर पहुँचा दिया है। विशेष रूप से संशोधित फ्लैट वैगनों पर लदे ये ट्रक लंबी और थकान भरी राजमार्ग यात्राओं के बजाय अब निर्बाध गति से अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं।

इस सेवा की आर्थिक व्यवहार्यता इसकी सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। रेलवे ने एक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी मूल्य संरचना तैयार की है, जिसमें 25 टन तक के ट्रकों के लिए ₹25,543 और 58 टन तक के भारी ट्रकों के लिए ₹32,000 प्रति वैगन का शुल्क निर्धारित किया गया है। व्यावसायिक दृष्टिकोण से यह मॉडल कितना सफल है, इसका प्रमाण चालू वित्त वर्ष 2025 के आंकड़े देते हैं। अप्रैल से दिसंबर के बीच कुल 545 रेकों का संचालन हुआ, जिससे 3 लाख टन से अधिक माल की ढुलाई हुई और ₹36.95 करोड़ का प्रभावशाली राजस्व प्राप्त हुआ। विशेष रूप से न्यू पालनपुर टर्मिनल ने 273 रेकों के माध्यम से ₹20.18 करोड़ का योगदान दिया, जबकि न्यू रेवाड़ी टर्मिनल ने 272 रेकों के साथ ₹16.76 करोड़ का राजस्व अर्जित कर अपनी उपयोगिता सिद्ध की।

इस पूरी परियोजना को गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (अमूल) जैसे बड़े औद्योगिक दिग्गजों का अटूट समर्थन प्राप्त है। जून 2023 में जीसीएमएमएफ (GCMMF) के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) ने डेयरी क्षेत्र के लिए एक भरोसेमंद गलियारा तैयार किया है। दूध के टैंकरों पर जीएसटी की छूट ने इसे और अधिक आकर्षक बना दिया है। इसके अतिरिक्त, जनवरी 2024 से शुरू की गई 'ओपन इंडेंट बुकिंग' ने ग्राहकों को उनके माल की आवाजाही की योजना बनाने में अभूतपूर्व लचीलापन प्रदान किया है। यह सेवा न केवल अमूल जैसे बड़े संस्थानों बल्कि ऑटोमोबाइल और एफएमसीजी (FMCG) क्षेत्रों के लिए भी वरदान साबित हो रही है।

पर्यावरण और सुरक्षा के मोर्चे पर भी यह मॉडल किसी क्रांति से कम नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, इस प्रणाली से लगभग 88,81,285 लीटर डीजल की बचत और 2.3 करोड़ किलोग्राम से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी का अनुमान है। लंबी दूरी के ट्रक चालकों के लिए यह सेवा एक राहत की खबर है, क्योंकि यह उन्हें अत्यधिक थकान और दुर्घटनाओं के जोखिम से बचाती है। कोहरे और भारी बारिश जैसे प्रतिकूल मौसम में भी डीएफसी का उन्नत सिग्नलिंग सिस्टम आपूर्ति श्रृंखला को टूटने नहीं देता। टोल प्लाजा के खर्चों से मुक्ति और राजमार्गों पर कम होती भीड़ इस मॉडल को सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोणों से अनिवार्य बनाती है।

भविष्य की ओर देखते हुए, समर्पित माल ढुलाई गलियारा निगम ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) अब फ्लैट मल्टीपर्पस (FMP) प्लेटफॉर्म के तहत नई पीढ़ी के वैगन डिजाइन कर रहा है, जो उच्च पेलोड क्षमता सुनिश्चित करेंगे। नासिक के प्याज से लेकर महाराष्ट्र के ताजे चीकू तक, अब भारत के खेत और कारखाने सीधे बड़े बाजारों से जुड़ेंगे। ट्रक-ऑन-ट्रेन सेवा वास्तव में एक स्वतंत्र पहल न होकर डीएफसीसीआईएल के उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जहाँ रेल और सड़क एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि पूरक बनकर देश की प्रगति का पहिया घुमा रहे हैं।

Pratahkal Newsroom

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