नई दिल्ली/जयपुर: मतदाता सूची पर मदन राठौड़ और प्रेमचंद बैरवा का डोटासरा पर भीषण प्रहार, कांग्रेस की 'दोहरी राजनीति' का पर्दाफाश
नई दिल्ली और जयपुर में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा ने कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर बड़ा हमला बोला। मदन राठौड़ ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की दोहरी मानसिकता को उजागर किया, वहीं बैरवा ने डोटासरा को विधानसभा में आकर बहस करने की चुनौती दी। जानें राजस्थान की राजनीति में मतदाता सूची को लेकर मचे इस घमासान के पीछे के असल तथ्य।

नई दिल्ली/जयपुर। राजस्थान की सियासत में 'मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) को लेकर छिड़ा घमासान अब निर्णायक मोड़ पर आ गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने देश की राजधानी नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर तीखा हमला बोलते हुए उनकी राजनीति को 'अफवाह और भ्रम' का पर्याय करार दिया है। राठौड़ ने डोटासरा के स्वभाव पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि तथ्यों की अनदेखी कर अनर्गल बयानबाजी करना अब कांग्रेस की स्थायी कार्यशैली बन चुकी है।
इस राजनीतिक संग्राम की जड़ में 'एसआईआर' की प्रक्रिया है, जिसे लेकर राठौड़ ने कांग्रेस को उसके अपने ही इतिहास का आईना दिखाया। उन्होंने सप्रमाण याद दिलाया कि वर्ष 1992, 2002, 2003 और 2004 में तत्कालीन कांग्रेस सरकारों ने ही देश के विभिन्न राज्यों में इस प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाया था। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कड़े शब्दों में कहा कि जब कांग्रेस स्वयं इस प्रक्रिया को लागू करती है तो वह संवैधानिक होती है, लेकिन आज वही प्रक्रिया उन्हें साजिश नजर आ रही है। यह कांग्रेस की 'दोहरी मानसिकता' और राजनीतिक हताशा का जीता-जागता प्रमाण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग एक निष्पक्ष संस्था है जिसका उद्देश्य केवल अपात्र नामों को हटाना और वास्तविक नागरिकों को लोकतंत्र का हिस्सा बनाना है।
इस विवाद में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को घसीटने की कोशिशों पर भी मदन राठौड़ ने गहरा रोष प्रकट किया। उन्होंने देश के गृह मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पर लगाए गए डोटासरा के आरोपों को पूरी तरह निराधार और काल्पनिक बताया। राठौड़ के अनुसार, डोटासरा मानसिक असंतुलन और हताशा के उस दौर से गुजर रहे हैं जहाँ उन्हें हर प्रशासनिक गतिविधि अपने खिलाफ एक साजिश प्रतीत होती है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे कांग्रेस के इस 'झूठ के जाल' से सावधान रहें, क्योंकि भाजपा संविधान और लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रतिबद्ध है।
वहीं दूसरी ओर, राजस्थान के उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने इस बहस को नया विस्तार देते हुए डोटासरा को सदन में आकर चर्चा करने की खुली चुनौती दी है। बैरवा ने स्पष्ट किया कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में है और इसमें आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार हर नागरिक के पास सुरक्षित है। उन्होंने कांग्रेस के उस डर पर तंज कसा जिसमें बहुत अधिक फॉर्म जमा होने को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं, उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर फॉर्म की विधिवत जांच होगी। उप मुख्यमंत्री ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि डोटासरा वास्तव में विधानसभा का सामना करने से कतरा रहे हैं और सदन से भागने के लिए जनता को गुमराह कर रहे हैं।
प्रेमचंद बैरवा ने केवल चुनावी प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि विकास के मुद्दों पर भी कांग्रेस को घेरा। उन्होंने 'राइजिंग राजस्थान' के सफल क्रियान्वयन का उल्लेख करते हुए बताया कि 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश धरातल पर उतर चुके हैं और हजारों युवाओं को रोजगार मिला है। उन्होंने डोटासरा और कांग्रेस नेताओं को नसीहत दी कि वे काल्पनिक आरोपों के बजाय सरकार के दो साल के कामकाज की तुलना अपने पांच साल के कार्यकाल से करें। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि राजस्थान में मतदाता सूची से शुरू हुआ यह विवाद अब आने वाले दिनों में और अधिक आक्रामक राजनीतिक रूप अख्तियार करेगा।

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