नई दिल्ली: भारतीय रेल से औपनिवेशिक मानसिकता का होगा पूर्ण सफाया, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यशोभूमि में फूंका सुधारों का शंखनाद
नई दिल्ली के यशोभूमि में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 101 रेल अधिकारियों को अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया। मंत्री ने रेलवे से औपनिवेशिक मानसिकता को समाप्त करने और 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए 6 महत्वपूर्ण संकल्प दिलाए। विद्युतीकरण के 100 साल पूरे होने पर डाक टिकट जारी कर रेलवे की सुरक्षा और नवाचार पर विशेष जोर दिया गया।

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नए युग का सूत्रपात करते हुए केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज स्पष्ट किया कि अब रेलवे में गुलामी की प्रतीकों और औपनिवेशिक मानसिकता के लिए कोई स्थान नहीं है। नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित कन्वेंशन सेंटर 'यशोभूमि' में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान श्री वैष्णव ने 70वें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार प्रदान किए। इस दौरान उन्होंने न केवल 101 रेल अधिकारियों को उनकी असाधारण सेवाओं के लिए सम्मानित किया, बल्कि विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 26 रेलवे जोनों को शील्ड प्रदान कर उनके पुरुषार्थ को सराहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में यह आयोजन मील का पत्थर साबित हुआ, जहाँ रेल मंत्री ने रेलकर्मियों को छह सूत्रीय संकल्प दिलाकर भविष्य की कार्ययोजना स्पष्ट की।
समारोह की गंभीरता और महत्व को रेखांकित करते हुए रेल मंत्री ने भारतीय रेल के विद्युतीकरण के गौरवशाली 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक विशेष डाक टिकट भी जारी किया। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए श्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले एक दशक में रेलवे में हुए आमूलचूल परिवर्तनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने रेलवे के बुनियादी ढांचे में नवाचार, सुधार और संरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए अधिकारियों का आह्वान किया कि वे वर्ष के प्रत्येक सप्ताह में एक नया संस्थागत सुधार लागू करें। उन्होंने '52 सप्ताह, 52 सुधार' का मंत्र देते हुए ट्रैक मेंटेनेंस में नई सोच और तकनीक के समावेश पर जोर दिया, ताकि यात्रियों को शत-प्रतिशत सुरक्षित यात्रा की गारंटी दी जा सके। मंत्री ने स्पष्ट किया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में रेलवे को अपनी प्रशिक्षण प्रणाली को आधुनिक बनाना होगा और उन पुरानी पद्धतियों को त्यागना होगा जो औपनिवेशिक काल की विरासत रही हैं।
इस गौरवपूर्ण अवसर पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं सीईओ श्री सतीश कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए भारतीय रेल की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि रेलवे का लक्ष्य किफायती सेवाओं के साथ-साथ विश्व स्तरीय यात्रा अनुभव प्रदान करना है। श्री सतीश कुमार ने गति, आराम और सुरक्षा के त्रिकोण को रेलवे की प्राथमिकता बताया और कहा कि यात्री अनुभव को बेहतर बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का निरंतर समावेश किया जा रहा है। समारोह में रेलवे बोर्ड के सदस्यों सहित विभिन्न रेल मंडलों एवं उत्पादन इकाइयों के महाप्रबंधकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जो रेलवे के सामूहिक नेतृत्व और समर्पण का प्रतीक रहा।
यह वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह केवल सम्मान का मंच नहीं, बल्कि रेल कर्मियों के उस कठिन परिश्रम और समर्पण का उत्सव है जो भारतीय रेल को अधिक कुशल और यात्री-अनुकूल बनाने में रात-दिन जुटे रहते हैं। व्यक्तिगत पुरस्कारों के साथ-साथ जोनल शील्ड प्रदान करने का उद्देश्य प्रतिस्पर्धात्मक श्रेष्ठता को बढ़ावा देना है। आयोजन का समापन एक सशक्त संदेश के साथ हुआ कि भारतीय रेलवे अब केवल पटरी पर दौड़ता एक तंत्र मात्र नहीं है, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की सबसे सशक्त कड़ी है, जो अपनी जड़ों से औपनिवेशिक प्रभाव को उखाड़ फेंकने और आधुनिकता के नए आसमान को छूने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Pratahkal Bureau
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