नई दिल्ली। देश की राजधानी में आज राजस्थान के विकास पथ को नई दिशा देने वाले एक महत्वपूर्ण अध्याय की शुरुआत हुई। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी के साथ हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में राजस्थान की कायापलट करने वाली दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं और लंबे समय से लंबित क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान पर निर्णायक चर्चा की गई। यह बैठक न केवल राज्य के परिवहन ढांचे को मजबूती प्रदान करने वाली है, बल्कि औद्योगिक और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु जयपुर के चारों ओर यातायात को सुगम बनाने वाली 99.35 किलोमीटर लंबी उत्तरी जयपुर रिंग रोड का निर्माण रहा। इसके साथ ही, जयपुर को सीधे अमृतसर और जामनगर कॉरिडोर से जोड़ने वाली 394 किलोमीटर लंबी महत्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वयन पर विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया। ये गलियारे न केवल राजस्थान के व्यापारिक संबंधों को पंजाब और गुजरात के बंदरगाहों से मजबूती से जोड़ेंगे, बल्कि आर्थिक गलियारे के रूप में उभरकर राज्य में निवेश के नए द्वार भी खोलेंगे।

संवाद के दौरान बुनियादी ढांचे के साथ-साथ जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों को भी प्राथमिकता दी गई। औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी में पिछले कई वर्षों से नासूर बनी जल भराव की समस्या पर गहन मंथन हुआ। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर चर्चा की गई, जिससे स्थानीय निवासियों और उद्योगों को जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

इस महत्वपूर्ण विमर्श में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की उपस्थिति ने परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी और पारिस्थितिक संतुलन के साथ आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को बल दिया। बैठक में राजस्थान के जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत और केंद्र व राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हुए। इस उच्चस्तरीय वार्ता के दूरगामी परिणाम राजस्थान की भौगोलिक कनेक्टिविटी को एक वैश्विक स्तर प्रदान करेंगे, जो आने वाले समय में राज्य की प्रगति का मुख्य आधार सिद्ध होंगे।

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